अरुणाचल के राज्यपाल ने शैक्षणिक संस्थानों से स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने की अपील की
सारांश
Key Takeaways
- उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
- शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना चाहिए।
- हिमालयी पारिस्थितिकी और नवीकरणीय ऊर्जा पर अनुसंधान को बढ़ावा देना आवश्यक है।
- दूरदराज के छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उपाय करने चाहिए।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग की आवश्यकता है।
ईटानगर, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के. टी. परनाइक ने शनिवार को शैक्षणिक संस्थानों से निवेदन किया कि वे उद्यमिता को बढ़ावा दें और इनोवेशन हब, इन्क्यूबेशन सेंटर तथा स्टार्ट-अप लैब के माध्यम से एक मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का निर्माण करें, ताकि छात्र केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि नौकरी देने वाले भी बन सकें।
राज्यपाल ने ईटानगर में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के 23वें सम्मेलन में संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को नवाचार, अनुसंधान और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना चाहिए और छात्रों तथा शिक्षकों को क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सतत कृषि, जैव विविधता संरक्षण, आपदा प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि हिमालयी पारिस्थितिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर आधारित अनुसंधान राज्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी बताया कि तकनीक शिक्षा का सबसे बड़ा सक्षम माध्यम है और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, कोडिंग और डेटा साइंस जैसी आधुनिक तकनीकों को शामिल किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म, वर्चुअल लैब और स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से दूरदराज के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सकती है। हालांकि, उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि एआई का उपयोग सहायक के रूप में करें, न कि आलोचनात्मक सोच का विकल्प बनाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि इको-टूरिज्म, एग्री-टेक्नोलॉजी, हस्तशिल्प और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अरुणाचल प्रदेश में विशाल संभावनाएं हैं और ये आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के साथ प्रभावी सहयोग स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि अनुसंधान, संकाय विकास और वैश्विक अनुभव को बढ़ावा मिल सके। साथ ही, उन्होंने हिमालयी अध्ययन, जैव विविधता और सतत विकास के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता भी बताई।
इस अवसर पर, राज्यपाल ने अरुणाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले अग्रदूतों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में राज्य के शिक्षा मंत्री पीडी सोना ने भी शिक्षा क्षेत्र में सुधारात्मक कदम उठाने के लिए सभी हितधारकों से प्रतिबद्ध प्रयास करने की अपील की और डिजिटल परिवर्तन के महत्व पर जोर दिया।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विधायक और शिक्षा मंत्री के सलाहकार मुत्चु मिथी, शिक्षा आयुक्त अमजद ताक और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा निदेशक डॉ. मिलोराई मोदी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने राज्य में उच्च और तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने के लिए नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।