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उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप नीति और स्किलिंग से नवाचार की नई दिशा

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उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप नीति और स्किलिंग से नवाचार की नई दिशा

सारांश

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्टार्टअप और एआई स्किलिंग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जानें कैसे ये नीतियाँ युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर रही हैं।

मुख्य बातें

स्टार्टअप नीति के माध्यम से 10 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
प्रदेश में 400 सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स की इकाइयाँ सक्रिय हैं।
100 से अधिक स्टार्टअप इन्क्यूबेटर विकसित किए जाने की योजना है।
एआई और डेटा एनालिटिक्स में प्रशिक्षण देने के लिए 49 आईटीआई में लैब स्थापित की जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश आईटी-आईटीईएस क्षेत्र में निर्यात में वृद्धि कर रहा है।

लखनऊ, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कौशल विकास को प्रोत्साहित करने के लिए योगी सरकार निरंतर नए कदम उठा रही है। स्टार्टअप नीति और एआई प्रज्ञा प्रोग्राम के जरिए राज्य में नवाचार पर आधारित एक अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में कार्य चल रहा है।

सरकार का उद्देश्य है कि एआई और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में लगभग 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए ताकि उन्हें रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिल सकें। स्टार्टअप नीति, एआई स्किलिंग, और तकनीकी निवेश के सामूहिक प्रयासों से कानपुर, लखनऊ, नोएडा, और वाराणसी जैसे शहरों में स्टार्टअप गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इससे एमएसएमई क्षेत्र को नई दिशा मिल रही है और युवा उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

राज्य में तकनीकी-आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) की लगभग 400 इकाइयाँ सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त, 100 से अधिक स्टार्टअप इन्क्यूबेटर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन इन्क्यूबेटरों के माध्यम से युवाओं को अपने नवाचार और तकनीकी विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और संसाधन प्रदान किए जा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी से युवाओं को आधुनिक डिजिटल कौशल और एआई तकनीक की प्रशिक्षण दी जा रही है।

उत्तर प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र भी तेजी से विकसित हो रहा है। राज्य देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में लगभग 65% हिस्सेदारी के साथ एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊर्जा मिल रही है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से संबंधित सप्लाई चेन में कई छोटे और मध्यम उद्योगों को नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे रोजगार के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए प्रदेश के 49 आईटीआई संस्थानों में एआई प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा रही हैं। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्रों को एआई, डेटा एनालिटिक्स, और उन्नत डिजिटल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाना है। आईटी और तकनीकी क्षेत्र में बढ़ते निवेश का असर निर्यात पर भी देखा जा रहा है।

प्रदेश से आईटी-आईटीईएस क्षेत्र का निर्यात लगातार बढ़ रहा है, जो वर्तमान में 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल और तकनीकी नवाचार के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है। यह नीति प्रदेश को तकनीकी नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
स्टार्टअप नीति का उद्देश्य युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
एआई प्रज्ञा प्रोग्राम क्या है?
यह कार्यक्रम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्किलिंग को बढ़ावा देता है।
राज्य में कितने आईटीआई संस्थानों में एआई लैब स्थापित की जा रही हैं?
प्रदेश के 49 आईटीआई संस्थानों में एआई लैब स्थापित की जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा कितना है?
राज्य का मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा है।
आईटी-आईटीईएस क्षेत्र का निर्यात कितना है?
आईटी-आईटीईएस क्षेत्र का निर्यात वर्तमान में 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक है।
राष्ट्र प्रेस
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