राजा राममोहन राय जयंती: ओम बिरला, अमित शाह और योगी समेत नेताओं ने नमन किया, कहा — भारतीय नवजागरण के अग्रदूत

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राजा राममोहन राय जयंती: ओम बिरला, अमित शाह और योगी समेत नेताओं ने नमन किया, कहा — भारतीय नवजागरण के अग्रदूत

सारांश

राजा राममोहन राय की जयंती पर देश के शीर्ष नेताओं ने एकजुट होकर उन्हें नमन किया — ओम बिरला से अमित शाह तक, योगी से रेखा गुप्ता तक। सती प्रथा के उन्मूलन से लेकर ब्रह्म समाज की स्थापना तक, उनकी विरासत आज भी आधुनिक भारत की नींव में जीवित है।

मुख्य बातें

राजा राममोहन राय की जयंती 22 मई को मनाई गई; उन्हें भारतीय नवजागरण का अग्रदूत कहा जाता है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर पोस्ट कर उन्हें 'प्रखर समाज सुधारक' बताया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ब्रह्म समाज की स्थापना और सामाजिक जागृति में उनके योगदान को रेखांकित किया।
UP CM योगी आदित्यनाथ , दिल्ली CM रेखा गुप्ता और हरियाणा CM नायब सिंह सैनी ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
राजा राममोहन राय ने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की और 1829 में सती प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

नई दिल्ली, 22 मई — ब्रह्म समाज के संस्थापक और महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय की जयंती पर शुक्रवार को देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित अनेक नेताओं ने उन्हें भारतीय नवजागरण का अग्रदूत बताते हुए स्मरण किया।

ओम बिरला ने बताया — समाज परिवर्तन के महान पुरोधा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर लिखा, राजा राममोहन राय ने सत्य, तर्क, शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज परिवर्तन का आधार बनाते हुए भारतीय समाज को नई चेतना प्रदान की। उन्होंने नारी शिक्षा, महिला अधिकारों और सामाजिक समानता की वकालत करते हुए यह संदेश दिया कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब समाज का हर वर्ग सम्मान और अवसर प्राप्त करे।

बिरला ने आगे लिखा कि राजा राममोहन राय ने भारतीय संस्कृति और आधुनिक विचारों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए एक ऐसे भारत की कल्पना की, जो विवेकशील, प्रगतिशील और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण हो। उनके विचारों ने नवजागरण की वह चेतना पैदा की, जिसने आगे चलकर सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों को नई दिशा दी।

अमित शाह का नमन — ब्रह्म समाज और सामाजिक जागृति का उल्लेख

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी पोस्ट में कहा, राजा राममोहन राय जी ने ब्रह्म समाज की स्थापना कर सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वासों और भेदभाव के विरुद्ध लोगों को जागरूक किया। शिक्षा, सामाजिक सुधार और लोक प्रशासन के क्षेत्र में उनके योगदान ने आधुनिक भारत की नींव को भी मजबूत किया। शाह ने यह भी कहा कि उनके विचार और आदर्श सदैव राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जागृति के पथ को आलोकित करते रहेंगे।

योगी आदित्यनाथ और अन्य मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजा राममोहन राय ने समाज को अंधविश्वास से विवेक की ओर और कुरीतियों से प्रगतिशील चेतना की ओर अग्रसर किया। आधुनिक शिक्षा के प्रसार में उनका योगदान सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा कि सती प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाकर उन्होंने समाज को प्रगति की नई राह दिखाई। उनके सामाजिक सुधार के प्रयास हमें सदैव सशक्त और समतामूलक समाज के निर्माण की प्रेरणा देते रहेंगे।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें 'आधुनिक भारत के जनक' की संज्ञा देते हुए कहा कि समाज को रूढ़िवादी सोच से बाहर निकालने, महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करने और प्रगतिशील भारत के निर्माण में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

राजा राममोहन राय की विरासत

राजा राममोहन राय (1772–1833) को आधुनिक भारत के निर्माताओं में अग्रणी माना जाता है। उन्होंने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की और सती प्रथा के उन्मूलन में निर्णायक भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप 1829 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने इस प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध लगाया। गौरतलब है कि उन्होंने महिला शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के लिए भी सशक्त आवाज उठाई, जो उस काल में अत्यंत साहसिक कदम था।

आगे की प्रासंगिकता

राजा राममोहन राय की जयंती हर वर्ष उनके सामाजिक सुधारों और शैक्षिक योगदान को स्मरण करने का अवसर बनती है। उनकी विचारधारा आज भी लैंगिक समानता, धार्मिक सहिष्णुता और तर्कसंगत सोच को बढ़ावा देने वाले आंदोलनों को दिशा देती है। देश के शीर्ष नेताओं द्वारा एक साथ उन्हें याद करना इस बात का संकेत है कि उनकी विरासत आज भी राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में केंद्रीय स्थान रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनकी सरकारों के कार्यकाल में वैज्ञानिक तर्कवाद बनाम धार्मिक परंपरा की बहस कई बार तीखी रही है। राममोहन राय की असली कसौटी यह है कि उनके नाम पर श्रद्धांजलि देने वाले उनके मूल्यों — महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और सामाजिक समानता — को नीतिगत स्तर पर कितना आगे ले जाते हैं।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा राममोहन राय कौन थे और उनकी जयंती क्यों मनाई जाती है?
राजा राममोहन राय (1772–1833) भारतीय नवजागरण के अग्रदूत और ब्रह्म समाज के संस्थापक थे, जिन्होंने सती प्रथा उन्मूलन, महिला शिक्षा और धार्मिक सुधार के लिए संघर्ष किया। उनकी जयंती हर वर्ष उनके सामाजिक और शैक्षिक योगदान को स्मरण करने के लिए मनाई जाती है।
ओम बिरला ने राजा राममोहन राय के बारे में क्या कहा?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर लिखा कि राजा राममोहन राय ने सत्य, तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज परिवर्तन का आधार बनाया और भारतीय समाज को नई चेतना दी। उन्होंने कहा कि उनके विचारों ने आगे चलकर सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों को नई दिशा दी।
राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ क्या किया?
राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध जोरदार अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप 1829 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने इस प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध लगाया। यह भारतीय इतिहास में महिला अधिकारों की दिशा में पहला बड़ा कानूनी कदम माना जाता है।
ब्रह्म समाज की स्थापना कब और क्यों हुई?
राजा राममोहन राय ने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास और जाति-भेद के विरुद्ध जन-जागरण करना था। यह संगठन एकेश्वरवाद और तर्कसंगत धार्मिक दृष्टिकोण पर आधारित था।
22 मई को किन-किन नेताओं ने राजा राममोहन राय को श्रद्धांजलि दी?
22 मई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, UP CM योगी आदित्यनाथ, दिल्ली CM रेखा गुप्ता और हरियाणा CM नायब सिंह सैनी ने एक्स पर पोस्ट कर राजा राममोहन राय को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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