ध्यान बद्री मंदिर: पंच बद्री का पवित्र धाम जहाँ पद्मासन में विराजते हैं भगवान विष्णु
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के चमोली जिले में पांडुकेश्वर स्थित श्री ध्यान बद्री मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित पंच बद्री में से एक है, जहाँ भगवान विष्णु की काले पत्थर की चतुर्भुजी प्रतिमा ध्यान की मुद्रा (पद्मासन) में स्थापित है। जोशीमठ और बद्रीनाथ के मार्ग पर अवस्थित यह तीर्थस्थल सात पूजनीय सप्त बद्री मंदिरों में भी गिना जाता है।
मंदिर का महत्व और स्थान
यह मंदिर उत्तराखंड की उर्गम घाटी के समीप, जोशीमठ और बद्रीनाथ धाम के बीच पांडुकेश्वर में स्थित है। मुख्य बद्रीनाथ धाम की तुलना में यह स्थान कहीं अधिक शांत, एकांत और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है, जो इसे ध्यान और साधना के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाता है। इसके निकट ही पंच केदार में से एक प्रसिद्ध कल्पेश्वर महादेव मंदिर भी स्थित है, जिससे इस क्षेत्र की धार्मिक महत्ता और अधिक बढ़ जाती है।
पौराणिक पृष्ठभूमि
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडवों के पिता राजा पांडु ने इसी स्थान पर अपने पापों के प्रायश्चित हेतु कठोर तपस्या की थी। इसके अतिरिक्त, पांडवों के वंशज राजा पुरंजय के पुत्र उर्वरऋषि ने उर्गम घाटी में भगवान विष्णु की प्राप्ति के लिए घोर तपस्या की थी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार उनकी अटूट साधना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु यहाँ प्रकट हुए और पद्मासन की मुद्रा में विराजे। भगवान के इसी ध्यानमग्न स्वरूप के कारण इस पवित्र स्थल का नाम 'ध्यान बद्री' पड़ा।
मुख्यमंत्री धामी का आह्वान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए सभी श्रद्धालुओं से इस धाम के दर्शन का आग्रह किया। धामी ने लिखा, 'चमोली में मौजूद श्री ध्यान बद्री मंदिर, भगवान विष्णु को समर्पित एक पुरानी और पवित्र जगह है। यह मंदिर पंच बद्री में से एक है। यहाँ भगवान विष्णु का ध्यान करने वाला रूप भक्तों को बहुत ज़्यादा शांति और आध्यात्मिक अनुभव देता है। चमोली आने पर इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करें।'
आम श्रद्धालुओं पर असर
मुख्यमंत्री के इस आह्वान से उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को नई ऊर्जा मिलने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार चारधाम यात्रा और सप्त बद्री सर्किट को और व्यापक रूप से प्रचारित कर रही है। ध्यान बद्री मंदिर उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण है जो भीड़भाड़ से दूर एकांत में भगवान के दर्शन और ध्यान की अनुभूति चाहते हैं। दूर-दराज़ से आने वाले तीर्थयात्री इस स्थान की आध्यात्मिक शांति और नैसर्गिक सुंदरता की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं।