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सिद्धबली धाम: उत्तराखंड में पिंडी रूप में विराजते हैं बजरंगबली, जानें 400 साल पुरानी मान्यता

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सिद्धबली धाम: उत्तराखंड में पिंडी रूप में विराजते हैं बजरंगबली, जानें 400 साल पुरानी मान्यता

सारांश

उत्तराखंड के कोटद्वार में बसा श्री सिद्धबली धाम उन विरले स्थलों में है जहाँ बजरंगबली की आराधना पिंडी स्वरूप में होती है। गुरु गोरखनाथ की तपस्या से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताएँ और CM धामी की ताज़ा पोस्ट ने इस सिद्ध पीठ को एक बार फिर श्रद्धालुओं की नज़र में ला दिया है।

मुख्य बातें

श्री सिद्धबली धाम उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित है।
यहाँ भगवान हनुमान की पूजा पिंडी स्वरूप में की जाती है, जो इसे अन्य मंदिरों से विशिष्ट बनाता है।
धाम की स्थापना से गुरु गोरखनाथ और सिद्ध बाबा की तपस्या से जुड़ी एकाधिक पौराणिक मान्यताएँ प्रचलित हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार यह धाम लगभग 400 वर्ष प्राचीन है; हालाँकि कोई अभिलेखीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को एक्स पर वीडियो साझा कर श्रद्धालुओं को दर्शन का आह्वान किया।

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित श्री सिद्धबली धाम देवभूमि के उन विरले सिद्ध पीठों में से एक है जहाँ भगवान हनुमान की आराधना पिंडी स्वरूप में की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह धाम लगभग 400 वर्ष प्राचीन है, हालाँकि इसका कोई अभिलेखीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है। प्राकृतिक सौंदर्य और अध्यात्म के अनूठे संगम के कारण यह स्थल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

सिद्धबली धाम की भौगोलिक स्थिति और महत्त्व

गढ़वाल क्षेत्र की पावन भूमि पर बसा श्री सिद्धबली धाम प्रकृति की शांत गोद में अवस्थित है। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ आने वाले प्रत्येक भक्त को एक असीम आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। पौड़ी गढ़वाल आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यह धाम एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है।

नामकरण के पीछे की पौराणिक मान्यताएँ

इस धाम के नाम के पीछे कई पौराणिक आख्यान प्रचलित हैं। पहली मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर एक सिद्ध बाबा ने दीर्घ तपस्या की थी और उन्हें हनुमानजी के प्रत्यक्ष दर्शन हुए। इसी पुण्य घटना के स्मरण में यहाँ बजरंगबली की स्थापना की गई और स्थान का नाम 'सिद्धबली' पड़ा।

दूसरी प्रचलित कथा गुरु गोरखनाथ और हनुमानजी के बीच हुए पौराणिक प्रसंग से जुड़ी है। मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ अपने गुरु मत्स्येन्द्रनाथ को लेने के लिए निकले थे। मार्ग में हनुमानजी ने रूप बदलकर उनका रास्ता रोका और दोनों के बीच दीर्घ युद्ध हुआ, किन्तु कोई भी परास्त नहीं हुआ। अन्ततः हनुमानजी ने अपने वास्तविक स्वरूप में दर्शन दिए और वरदान माँगने को कहा। गुरु गोरखनाथ ने उनसे सदा इसी स्थान पर विराजमान रहने की प्रार्थना की।

एक तीसरे मत के अनुसार, गुरु गोरखनाथ ने अपने अनुयायियों सहित यहाँ दीर्घकाल तक तप किया, जिससे इस स्थान को 'सिद्ध' की संज्ञा प्राप्त हुई। इन्हीं मान्यताओं के सम्मिलित प्रभाव से इस पवित्र स्थल का नाम सिद्धबली पड़ा।

मुख्यमंत्री धामी की विशेष पोस्ट

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इस धाम का वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में मौजूद श्री सिद्धबली धाम भगवान हनुमान की असीम कृपा और भक्ति का पवित्र केंद्र है। प्राकृतिक सुंदरता के बीच इस दिव्य धाम में पहुंचकर भक्तों को आध्यात्मिक शांति और पॉजिटिव एनर्जी का अनुभव होता है। पौड़ी गढ़वाल जिले में आने पर आपको भी इस पवित्र धाम के दर्शन जरूर करने चाहिए।' मुख्यमंत्री की इस पोस्ट के बाद धाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

पिंडी पूजा की परंपरा और आस्था

यह धाम इस मायने में भी विशेष है कि यहाँ हनुमानजी की आराधना मूर्ति के बजाय पिंडी स्वरूप में की जाती है — एक परंपरा जो इस सिद्ध पीठ को उत्तराखंड के अन्य हनुमान मंदिरों से अलग करती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ माँगी गई मनोकामनाएँ बजरंगबली की कृपा से पूर्ण होती हैं।

आगंतुकों के लिए संदेश

देवभूमि उत्तराखंड की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कोटद्वार स्थित श्री सिद्धबली धाम के दर्शन एक अनूठा अनुभव है। धाम के प्रति बढ़ती लोकप्रियता और मुख्यमंत्री के आह्वान के बाद यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बुनियादी सुविधाओं और श्रद्धालु प्रबंधन पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, सोशल मीडिया प्रचार अकेले टिकाऊ धार्मिक पर्यटन नहीं बना सकता।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धबली धाम कहाँ स्थित है?
श्री सिद्धबली धाम उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित है। यह गढ़वाल क्षेत्र का एक प्रमुख हनुमान सिद्ध पीठ माना जाता है।
सिद्धबली धाम में हनुमानजी की पूजा किस रूप में होती है?
इस धाम में भगवान हनुमान की आराधना पिंडी स्वरूप में की जाती है, न कि सामान्य मूर्ति के रूप में। यह परंपरा इस सिद्ध पीठ को उत्तराखंड के अन्य हनुमान मंदिरों से विशिष्ट बनाती है।
सिद्धबली धाम का नाम कैसे पड़ा?
इस नाम के पीछे कई मान्यताएँ प्रचलित हैं। एक के अनुसार एक सिद्ध बाबा को यहाँ हनुमानजी के दर्शन हुए थे। दूसरी मान्यता के अनुसार गुरु गोरखनाथ और हनुमानजी के बीच यहाँ युद्ध हुआ और बाद में गोरखनाथ ने उन्हें इसी स्थान पर विराजमान रहने का वरदान माँगा — इन्हीं कारणों से स्थान का नाम 'सिद्धबली' पड़ा।
सिद्धबली धाम कितना पुराना है?
स्थानीय मान्यता के अनुसार यह धाम लगभग 400 वर्ष प्राचीन है। हालाँकि इसका कोई अभिलेखीय या दस्तावेज़ी प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सिद्धबली धाम के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को एक्स पर धाम का वीडियो साझा करते हुए इसे 'भगवान हनुमान की असीम कृपा और भक्ति का पवित्र केंद्र' बताया। उन्होंने पौड़ी गढ़वाल आने वाले सभी लोगों से इस धाम के दर्शन करने का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
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