हनुमान का चमत्कारिक मंदिर: इटावा में जहां मिलती है दिव्यता और आस्था
सारांश
Key Takeaways
- श्री पिलुआ महावीर हनुमान मंदिर इटावा का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- यहाँ मोदक खाने की चमत्कारी घटना होती है।
- भक्तों का मानना है कि यहां दर्शन करने से कष्ट दूर होते हैं।
- सप्ताह के विशेष दिनों में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है।
- मंदिर का वातावरण दिव्य और शांति प्रदान करने वाला है।
इटावा, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देश भर में श्रीराम दूत हनुमान के अनेक मंदिर हैं, जहाँ न केवल भक्ति की अद्भुत शक्ति अनुभव होती है, बल्कि उनकी अनोखी लीला भी देखने को मिलती है। उत्तर प्रदेश के इटावा में एक ऐसा मंदिर है, जहाँ बजरंगबली मोदक खाते और पानी पीते हैं। मान्यता है कि आज तक उनके मुखारविंद को कोई नहीं भर सका है और यह रहस्य आज भी अनसुलझा है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, इटावा में यमुना नदी के किनारे स्थित इस अद्भुत हनुमान मंदिर का नाम श्री पिलुआ महावीर हनुमान मंदिर है। यहां हनुमान जी की स्वयंभू मूर्ति लेटी हुई मुद्रा में स्थापित है, और सबसे खास बात यह है कि भक्तों द्वारा चढ़ाया गया प्रसाद, जैसे कि लड्डू, दूध या पानी, मूर्ति के मुखारविंद में डालते ही रहस्यमय तरीके से गायब हो जाता है। आज तक कोई नहीं जान पाया कि यह प्रसाद कहाँ जाता है।
मंदिर के प्रति मान्यता है कि हनुमान जी प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं, जिसे भक्त अपनी भेंट की स्वीकृति का संकेत मानते हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहाँ दर्शन करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी भी कष्ट नहीं आते। हनुमान जी की आंखों में एक बार देखने से कई समस्याएँ अपने आप दूर हो जाती हैं।
किंवदंतियों के अनुसार, लगभग 300 वर्ष पहले यह क्षेत्र प्रतापनेर के राजा हुक्म चंद्र प्रताप सिंह चौहान के अधीन था। एक रात राजा को सपने में श्रीराम भक्त के दर्शन हुए जिन्होंने राजा को बताया कि एक विशेष स्थान पर उनकी मूर्ति प्रकट हुई है। राजा उस स्थान पर पहुंचे और मूर्ति को देखकर समझ गए कि भगवान यहीं रहना चाहते हैं। इसके बाद राजा ने विधि-विधान से पूजा कर उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया।
मंदिर का नाम पिलुआ महावीर इस कारण पड़ा क्योंकि पहले यहां पिलुआ नाम का एक जंगली पेड़ था, जिसके नीचे से यह स्वयंभू मूर्ति मिली थी।
यमुना नदी के सुंदर किनारे पर स्थित होने के कारण मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और दिव्य है। इस मंदिर के लिए विशेष मान्यताएं हैं, जिनके अनुसार मूर्ति के मुखारविंद में जितना भी लड्डू, दूध या पानी डाला जाए, वह कभी भरता नहीं है और धीरे-धीरे गायब हो जाता है। पुजारी और भक्त बताते हैं कि यह चमत्कार वर्षों से निरंतर देखा जा रहा है।
श्रीराम दूत का यह अद्भुत मंदिर इटावा जिला मुख्यालय से लगभग 10-12 किलोमीटर दूर थाना सिविल लाइन क्षेत्र के रूरा गांव के पास यमुना नदी के किनारे स्थित है। यहां पहुंचने के लिए इटावा शहर से सड़क मार्ग उपलब्ध है। निजी वाहन, ऑटो या कैब से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में आने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की समस्याएं दूर होती हैं। जो भी व्यक्ति यहां सच्चे मन से आता है, उसे हनुमान जी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। मंदिर में आम दिनों के अलावा, मंगलवार और शनिवार को भक्तों की विशेष भीड़ लगती है। बड़े मंगल, हनुमान जन्मोत्सव और अन्य पर्वों पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचते हैं। यहां भक्त अक्सर हनुमान चालीसा का पाठ, राम नाम जप और सुंदरकांड और रामचरितमानस का पाठ करते हैं। सुबह-शाम आरती का विशेष आयोजन होता है।