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हेमकुंड साहिब: चमोली की 15,200 फीट ऊंचाई पर बसा सिखों का पवित्र धाम, CM धामी ने की तारीफ

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हेमकुंड साहिब: चमोली की 15,200 फीट ऊंचाई पर बसा सिखों का पवित्र धाम, CM धामी ने की तारीफ

सारांश

समुद्र तल से 15,200 फीट की ऊंचाई पर सात हिमखंडित चोटियों के बीच बसा हेमकुंड साहिब — जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी ने पूर्व जन्म में तपस्या की थी — इस गर्मी में श्रद्धालुओं के लिए खुला है। CM धामी ने वीडियो साझा कर इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बताया।

मुख्य बातें

श्री हेमकुंड साहिब , चमोली जिले , उत्तराखंड में 15,200 फीट (4,632 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है।
सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने दसम ग्रंथ में इस स्थान पर पूर्व जन्म की तपस्या का उल्लेख किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 मई को गुरुद्वारे का विशेष वीडियो साझा कर इसे 'आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र' बताया।
यह तीर्थस्थल वर्ष में केवल 5-6 महीने ( मई/जून से अक्टूबर ) श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है।
गुरुद्वारे के निकट लोकपाल लक्ष्मण मंदिर भी स्थित है, जो हिंदू-सिख आस्था का संगम है।

श्री हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से लगभग 15,200 फीट (4,632 मीटर) की ऊंचाई पर सात हिमाच्छादित चोटियों और एक बर्फीली झील के किनारे स्थित, सिख धर्म के सर्वाधिक पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। यह स्थान केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हिमालय की अलौकिक प्रकृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्वितीय संगम है, जहाँ पहुँचकर हर श्रद्धालु को मानसिक शांति और आत्मिक सुकून मिलता है।

मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार, 23 मई को श्री हेमकुंड साहिब का एक विशेष वीडियो साझा किया और इस पवित्र स्थल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने लिखा, 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल। चमोली जिले में स्थित श्री हेमकुंड साहिब लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का पवित्र स्थल है। हिमालय की शांत वादियों में बसे इस गुरुद्वारे में पहुंचकर मन को शांति और आत्मा को सुकून मिलता है। यह केवल एक धार्मिक स्थान नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्य अनुभव का केंद्र भी है।'

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी, ने अपनी आत्मकथा दसम ग्रंथ में उल्लेख किया है कि उन्होंने अपने पूर्व जन्म में इसी स्थान पर गहन तपस्या की थी। यही कारण है कि देशभर से लाखों सिख श्रद्धालु प्रतिवर्ष यहाँ माथा टेकने आते हैं। गौरतलब है कि गुरुद्वारे के समीप ही लोकपाल लक्ष्मण मंदिर भी स्थित है, जहाँ हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान लक्ष्मण ने तपस्या की थी — यह स्थान सिख और हिंदू दोनों आस्थाओं का संगम बनाता है।

यात्रा का सही समय

अत्यधिक ठंड और भारी बर्फबारी के कारण श्री हेमकुंड साहिब वर्ष में केवल 5 से 6 महीने — सामान्यतः मई/जून से अक्टूबर तक — श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। इस समय उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि यहाँ का वातावरण सुखद और शीतल बना हुआ है। ऐसे में गर्मियों की यात्रा के लिए यह एक आदर्श गंतव्य है।

आम श्रद्धालुओं पर असर

देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं। चमोली के इस पवित्र धाम की यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार सक्रिय रूप से धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित कर रही है।

क्या होगा आगे

अक्टूबर तक खुले रहने वाले इस तीर्थस्थल पर आने वाले महीनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। मुख्यमंत्री धामी की सक्रिय प्रचार पहल से राज्य में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस तीर्थस्थल तक पहुँचने का बुनियादी ढाँचा — ट्रेक मार्ग, चिकित्सा सुविधाएँ, भीड़ प्रबंधन — हर वर्ष बढ़ती श्रद्धालु संख्या के अनुरूप है या नहीं, यह सवाल अनुत्तरित रहता है। मुख्यमंत्री का सोशल मीडिया प्रचार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की रणनीति का हिस्सा है, जो स्वागतयोग्य है — पर इसके साथ तीर्थयात्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर समान ध्यान आवश्यक है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमकुंड साहिब कहाँ स्थित है और इसकी ऊंचाई कितनी है?
हेमकुंड साहिब उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमालय की गोद में समुद्र तल से लगभग 15,200 फीट (4,632 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। यह सात हिमाच्छादित चोटियों और एक बर्फीली झील के किनारे बसा है।
हेमकुंड साहिब सिखों के लिए इतना पवित्र क्यों है?
सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी, ने अपनी आत्मकथा दसम ग्रंथ में उल्लेख किया है कि उन्होंने अपने पूर्व जन्म में इसी स्थान पर गहन तपस्या की थी। इसी कारण यह स्थान सिख श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।
हेमकुंड साहिब के दर्शन कब किए जा सकते हैं?
अत्यधिक ठंड और बर्फबारी के कारण यह तीर्थस्थल वर्ष में केवल 5 से 6 महीने — सामान्यतः मई/जून से अक्टूबर तक — श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। इस समय गर्मियों का मौसम होने के कारण यात्रा सुखद रहती है।
CM पुष्कर सिंह धामी ने हेमकुंड साहिब के बारे में क्या कहा?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 मई को हेमकुंड साहिब का एक विशेष वीडियो साझा किया। उन्होंने इसे 'लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का पवित्र स्थल' और 'आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्य अनुभव का केंद्र' बताया।
हेमकुंड साहिब के पास और कौन-सा धार्मिक स्थल है?
हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के समीप ही पौराणिक लोकपाल लक्ष्मण मंदिर स्थित है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान लक्ष्मण ने इसी स्थान पर तपस्या की थी, जो इसे सिख और हिंदू दोनों आस्थाओं का संगम बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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