29 जून 2026
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गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले पर CM भगवंत मान, सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर ने दी संगत को बधाई

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गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले पर CM भगवंत मान, सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर ने दी संगत को बधाई

सारांश

गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले पर पंजाब के सीएम भगवंत मान, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने संगत को बधाई दी। उत्तराखंड के चंपावत में स्थित यह ऐतिहासिक सिख तीर्थ 1501 ईस्वी में गुरु नानक देव जी की यात्रा से जुड़ा है।

मुख्य बातें

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान , सुखबीर सिंह बादल और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने 29 जून 2025 को गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले पर संगत को बधाई दी।
गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब उत्तराखंड के चंपावत जिले में लधिया और रतिया नदियों के संगम पर स्थित है।
1501 ईस्वी में गुरु नानक देव जी ने यहाँ नाथ योगियों के साथ आध्यात्मिक चर्चा की थी।
मान्यता है कि गुरु नानक देव जी ने भाई मरदाना की भूख मिटाने के लिए कड़वे रीठे को मीठा बनाया था; आज भी 'रीठे का रस' प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
हर वर्ष वैशाख पूर्णिमा पर यहाँ विशाल धार्मिक मेला आयोजित होता है।

उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित ऐतिहासिक सिख तीर्थस्थल गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले के अवसर पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल सहित कई नेताओं ने 29 जून 2025 को समस्त संगत को हार्दिक बधाई दी। यह पवित्र स्थल प्रथम पातशाह गुरु नानक देव जी के पावन चरणों से पवित्र हुई भूमि के रूप में श्रद्धालुओं में विशेष महत्व रखता है।

नेताओं की शुभकामनाएं

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'प्रथम पातशाह गुरु नानक देव के पवित्र चरणों से पवित्र हुई पवित्र जगह गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले के मौके पर सभी संगत को हार्दिक बधाई।' उन्होंने इसी अवसर पर महान संत भगत कबीर के पवित्र जन्मदिवस पर भी संगत को बधाई देते हुए उन्हें 'महान आध्यात्मिक गुरु और सामाजिक समानता के संदेशवाहक' बताया।

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी एक्स पर लिखा, 'प्रथम पातशाह गुरु नानक देव के पवित्र चरणों के स्पर्श से पवित्र हुई पवित्र भूमि, गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के सालाना मेले के मौके पर सभी संगत को हार्दिक बधाई।'

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस अवसर पर गुरुद्वारे की आध्यात्मिक महत्ता का स्मरण कराते हुए लिखा कि इस पवित्र स्थान पर गुरु साहिब ने दिव्य प्रवचन दिए थे और गुरु के शब्दों से कड़वे रीठे के फल भी मीठे हो गए थे। उन्होंने संगत से गुरु साहिब की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब का ऐतिहासिक महत्व

गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब उत्तराखंड के चंपावत जिले में लधिया और रतिया नदियों के संगम पर स्थित है। यह सिख धर्म के अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थस्थलों में से एक है। 1501 ईस्वी में अपनी यात्रा के दौरान गुरु नानक देव जी ने यहाँ नाथ योगियों के साथ आध्यात्मिक चर्चा की थी।

रीठे के मीठे होने की पवित्र मान्यता

स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहाँ रुकने पर गुरु नानक देव जी ने अपने शिष्य भाई मरदाना की भूख मिटाने के लिए कड़वे रीठे (साबुन) के पेड़ के फलों को चमत्कारिक रूप से मीठा बना दिया था। इस पवित्र परंपरा के अनुसरण में आज भी इस गुरुद्वारे में तीर्थयात्रियों को 'रीठे का रस' मीठे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

गुरुद्वारे से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित 'नानक बगीची' में इन रीठों के पेड़ उगाए जाते हैं और प्रसाद के लिए फल वहीं से लाए जाते हैं। यह बगीची भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है।

सालाना मेले का आयोजन

हर वर्ष वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब में एक विशाल धार्मिक मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु गुरु नानक देव जी के दर्शन और प्रसाद ग्रहण करने पहुँचते हैं। यह मेला सिख समुदाय की आस्था और एकता का प्रतीक है। इस वर्ष भी देश भर के नेताओं और श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर को हर्षोल्लास के साथ मनाया।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो धार्मिक अवसरों पर राजनीतिक एकजुटता की परंपरा को रेखांकित करता है। यह उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में स्थित इस तीर्थ पर पंजाब के नेताओं की सक्रिय भागीदारी सिख पहचान की भौगोलिक सीमाओं से परे व्यापकता को दर्शाती है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब कहाँ स्थित है?
गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब उत्तराखंड के चंपावत जिले में लधिया और रतिया नदियों के संगम पर स्थित है। यह सिख धर्म का एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थस्थल है।
गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब का सिख धर्म में क्या महत्व है?
1501 ईस्वी में अपनी यात्रा के दौरान गुरु नानक देव जी ने यहाँ नाथ योगियों के साथ आध्यात्मिक चर्चा की थी। मान्यता है कि उन्होंने भाई मरदाना की भूख मिटाने के लिए कड़वे रीठे के फलों को चमत्कारिक रूप से मीठा बना दिया था, जिसके कारण यह स्थल 'रीठा साहिब' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
रीठा साहिब का सालाना मेला कब आयोजित होता है?
गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब का सालाना मेला हर वर्ष वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है। इस मेले में देश भर से श्रद्धालु गुरु नानक देव जी के दर्शन और प्रसाद ग्रहण करने पहुँचते हैं।
रीठा साहिब में कौन-सा प्रसाद मिलता है?
'रीठे का रस' इस गुरुद्वारे का विशेष मीठा प्रसाद है, जो तीर्थयात्रियों को दिया जाता है। गुरुद्वारे से लगभग 10 किलोमीटर दूर 'नानक बगीची' में उगाए गए रीठों के पेड़ों से ये फल प्रसाद के लिए लाए जाते हैं।
CM भगवंत मान ने रीठा साहिब मेले पर क्या कहा?
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर लिखा कि प्रथम पातशाह गुरु नानक देव के पवित्र चरणों से पवित्र हुई इस भूमि के सालाना मेले पर समस्त संगत को हार्दिक बधाई। उन्होंने इसी अवसर पर भगत कबीर के जन्मदिवस पर भी संगत को शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्र प्रेस
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