14 अगस्त 2026
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विजय भारद्वाज: एलजी कप में 'प्लेयर ऑफ द सीरीज', कर्नाटक को तीन रणजी खिताब दिलाने वाला ऑलराउंडर

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विजय भारद्वाज: एलजी कप में 'प्लेयर ऑफ द सीरीज', कर्नाटक को तीन रणजी खिताब दिलाने वाला ऑलराउंडर

सारांश

एलजी कप में 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बनने वाले विजय भारद्वाज को भारतीय क्रिकेट का उभरता सितारा माना गया था — लेकिन महज 13 अंतरराष्ट्रीय मैचों में करियर थम गया। घरेलू मैदान पर कर्नाटक को तीन रणजी खिताब दिलाए और अब कन्नड़ कमेंटेटर व NCA-सर्टिफाइड कोच के रूप में क्रिकेट से जुड़े हैं।

मुख्य बातें

विजय भारद्वाज का जन्म 15 अगस्त 1975 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ।
एलजी कप (1999-2000) में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 10 विकेट और 89 रन के साथ प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए।
अंतरराष्ट्रीय करियर में 3 टेस्ट (28 रन, 1 विकेट) और 10 वनडे (136 रन, 16 विकेट) तक सीमित रहा।
कर्नाटक के लिए 96 प्रथम श्रेणी मैचों में 5,553 रन और 59 विकेट ; 90 के दशक में तीन रणजी ट्रॉफी खिताब का हिस्सा।
2000-2002 तक कर्नाटक टीम के कप्तान रहे।
4 नवंबर 2006 को संन्यास; अब NCA-सर्टिफाइड लेवल थ्री कोच और कन्नड़ क्रिकेट कमेंटेटर ।

विजय भारद्वाज — यह नाम भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय सीरीज में ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरा क्रिकेट जगत उनका दीवाना हो गया, लेकिन उसके बाद करियर उस ऊँचाई को दोबारा नहीं छू सका। 15 अगस्त 1975 को बेंगलुरु, कर्नाटक में जन्मे भारद्वाज आज अपना 51वाँ जन्मदिन मना रहे हैं — और यह संयोग ही है कि उनका जन्मदिन स्वतंत्रता दिवस के साथ मेल खाता है।

धमाकेदार अंतरराष्ट्रीय शुरुआत

विजय भारद्वाज ने सितंबर 1999 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। उनकी पहली सीरीज — एलजी कप (1999-2000) — उनके करियर की सबसे यादगार और निर्णायक साबित हुई। इस सीरीज में उन्होंने 10 विकेट चटकाए और निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए 89 रन भी जोड़े, जिसके दम पर उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार मिला। उस प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम का भावी स्तंभ माना जाने लगा था।

गौरतलब है कि यह वह दौर था जब भारतीय क्रिकेट तेज़-तर्रार ऑलराउंडरों की तलाश में था। भारद्वाज उस खाँचे में एकदम फिट नज़र आते थे — गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने में सक्षम।

अंतरराष्ट्रीय करियर के आँकड़े

चमकदार शुरुआत के बावजूद, विजय भारद्वाज का अंतरराष्ट्रीय करियर अपेक्षाकृत छोटा रहा। उन्होंने 3 टेस्ट मैचों की 3 पारियों में 28 रन बनाए और 1 विकेट लिया। वनडे फॉर्मेट में 10 मैचों की 9 पारियों में 136 रन और 16 विकेट उनके नाम रहे। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2002 में जिम्बाब्वे के खिलाफ था। टेस्ट और वनडे दोनों में प्रदर्शन में आई गिरावट के कारण वह टीम से बाहर हो गए और फिर राष्ट्रीय टीम में वापसी नहीं कर सके।

घरेलू क्रिकेट में लंबा और गौरवशाली सफर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो अधूरा रह गया, वह कर्नाटक के लिए घरेलू क्रिकेट में पूरा हुआ। 1994-95 में कर्नाटक की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने वाले भारद्वाज ने 2004 तक 96 प्रथम श्रेणी मैच खेले। 149 पारियों में 14 शतक और 26 अर्धशतक की मदद से 5,553 रन बनाए और 59 विकेट भी झटके।

लिस्ट ए क्रिकेट में उन्होंने 72 मैचों की 66 पारियों में 1 शतक और 5 अर्धशतक के साथ 1,707 रन बनाए और 46 विकेट लिए। 90 के दशक में कर्नाटक की तीन रणजी ट्रॉफी जीत में उनकी अहम भूमिका रही। 2000 से 2002 तक वह कर्नाटक टीम के कप्तान भी रहे — एक ऐसी ज़िम्मेदारी जो घरेलू क्रिकेट में उनकी साख को दर्शाती है।

संन्यास और कोचिंग की नई पारी

4 नवंबर 2006 को विजय भारद्वाज ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा की। मैदान छोड़ने के बाद उन्होंने कोचिंग को अपना नया मिशन बनाया। वह नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA), बेंगलुरु से सर्टिफाइड लेवल थ्री कोच हैं। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पहले तीन सीजन में वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के सहायक कोच रहे। इसके अलावा वह ओमान क्रिकेट टीम के फील्डिंग कोच की भूमिका भी निभा चुके हैं और दिल्ली कैपिटल्स से भी जुड़े रहे हैं।

वर्तमान में विजय भारद्वाज कन्नड़ भाषा के अग्रणी क्रिकेट कमेंटेटर के रूप में सक्रिय हैं। उनका यह सफर बताता है कि क्रिकेट से उनका नाता मैदान के बाहर भी उतना ही गहरा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह महज 13 अंतरराष्ट्रीय मैचों में सिमट गया — यह सवाल उठाता है कि क्या उन्हें पर्याप्त अवसर मिले। घरेलू क्रिकेट में 96 प्रथम श्रेणी मैच और तीन रणजी खिताब बताते हैं कि प्रतिभा की कमी नहीं थी। भारद्वाज का पोस्ट-रिटायरमेंट सफर — NCA कोचिंग से ओमान क्रिकेट और IPL तक — दर्शाता है कि खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता मैदान से कहीं आगे तक जाती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजय भारद्वाज कौन हैं और उन्होंने भारत के लिए कितने मैच खेले?
विजय भारद्वाज कर्नाटक के पूर्व भारतीय क्रिकेट ऑलराउंडर हैं, जिन्होंने सितंबर 1999 से 2002 के बीच भारत के लिए 3 टेस्ट और 10 वनडे मैच खेले। वह एलजी कप 1999-2000 में 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' रहे थे।
विजय भारद्वाज को 'वन सीरीज वंडर' क्यों कहा जाता है?
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एलजी कप (1999-2000) में 10 विकेट और 89 रन के साथ 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बनने के बाद भारद्वाज से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उसके बाद टेस्ट और वनडे दोनों में प्रदर्शन नहीं बना सके और टीम से बाहर हो गए। इसीलिए उन्हें 'वन सीरीज वंडर' कहा जाता है।
विजय भारद्वाज ने कर्नाटक के लिए घरेलू क्रिकेट में क्या उपलब्धियाँ हासिल कीं?
भारद्वाज ने 1994-95 से 2004 के बीच कर्नाटक के लिए 96 प्रथम श्रेणी मैचों में 5,553 रन और 59 विकेट लिए। 90 के दशक में कर्नाटक की तीन रणजी ट्रॉफी जीत में उनकी अहम भूमिका रही और 2000 से 2002 तक वह टीम के कप्तान भी रहे।
विजय भारद्वाज ने क्रिकेट से संन्यास कब लिया और अब क्या करते हैं?
विजय भारद्वाज ने 4 नवंबर 2006 को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लिया। अब वह NCA-सर्टिफाइड लेवल थ्री कोच हैं, IPL में RCB के सहायक कोच और दिल्ली कैपिटल्स से जुड़े रह चुके हैं, और वर्तमान में कन्नड़ भाषा के अग्रणी क्रिकेट कमेंटेटर हैं।
विजय भारद्वाज का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
विजय भारद्वाज का जन्म 15 अगस्त 1975 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ था। उनका जन्मदिन भारत के स्वतंत्रता दिवस के साथ मेल खाता है।
राष्ट्र प्रेस
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