भगवंत मान ने आनंदपुर साहिब हेरिटेज स्ट्रीट के संशोधित प्लान को दी मंजूरी, शंभू सीमा पर बनेगा भव्य स्वागत द्वार
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 3 जून को आनंदपुर साहिब में प्रस्तावित हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना के संशोधित संस्करण को मंजूरी दे दी, जो किला श्री आनंदगढ़ साहिब, तख्त श्री केसगढ़ साहिब और अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों को एक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गलियारे के रूप में जोड़ेगी। इसी बैठक में मुख्यमंत्री ने शंभू सीमा पर पंजाब की पहचान और स्थापत्य विरासत को दर्शाने वाले एक भव्य स्वागत द्वार के निर्माण को भी हरी झंडी दी।
मुख्य घटनाक्रम
पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने और इसकी समृद्ध विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से शुरू की गईं दो प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। संशोधित योजना के तहत हेरिटेज स्ट्रीट किला आनंदगढ़ साहिब के निकट स्थित गोलचक्कर से शुरू होकर तख्त श्री केसगढ़ साहिब पार्क, गुरुद्वारा सिसगंज साहिब और गुरुद्वारा भोरा साहिब तक विस्तारित होगी।
क्यों मायने रखती है यह परियोजना
आनंदपुर साहिब सिख धर्म के सबसे पूजनीय ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्रों में से एक है। हेरिटेज स्ट्रीट के माध्यम से ऐतिहासिक गुरुद्वारों को आपस में जोड़ने का प्रयास श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक सहज, सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध अनुभव प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह कदम राज्य की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “आनंदपुर साहिब में प्रस्तावित हेरिटेज स्ट्रीट किला आनंदगढ़ साहिब के पास स्थित गोलचक्कर से शुरू होकर तख्त श्री केसगढ़ साहिब पार्क, गुरुद्वारा सिसगंज साहिब और गुरुद्वारा भोरा साहिब तक जाएगी। इस परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं और आगंतुकों के आध्यात्मिक और विरासत संबंधी अनुभव को और अधिक सशक्त बनाना है।”
उन्होंने आगे कहा, “इस डिज़ाइन को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा विधिवत मंजूरी दी जाएगी। परियोजना के सुचारू और निर्बाध कार्यान्वयन की देखरेख के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन भी किया जाएगा।”
शंभू सीमा पर भव्य स्वागत द्वार
बैठक में मंजूर किया गया शंभू सीमा का प्रस्तावित स्वागत द्वार पंजाब में प्रवेश करने वाले यात्रियों के लिए राज्य की पहचान का प्रथम दृश्य संकेत होगा। डिज़ाइन को पंजाब की स्थापत्य परंपराओं और सांस्कृतिक प्रतीकों के इर्द-गिर्द आकार दिया जा रहा है। गौरतलब है कि शंभू सीमा हाल के वर्षों में किसान आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में रही है, और इस द्वार के माध्यम से सरकार सीमा-बिंदु को सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में पुनः परिभाषित करने का प्रयास कर रही है।
क्या होगा आगे
मुख्यमंत्री के अनुसार, परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों से सभी आवश्यक स्वीकृतियाँ शीघ्र प्राप्त की जाएँगी। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की मंजूरी मिलने और उच्चस्तरीय समिति के गठन के बाद ज़मीनी कार्य तेज़ी पकड़ सकता है।