संजय राउत का राहुल गांधी के 'जोकर' बयान को समर्थन, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से की प्रेस कॉन्फ्रेंस की माँग
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने 14 अगस्त को मुंबई में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को 'जोकर' कहने वाले बयान का खुलकर समर्थन किया। राउत ने इस मौके पर आरएसएस और केंद्र सरकार पर तीखे हमले बोले।
राउत का आरएसएस पर सीधा हमला
संजय राउत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को सीधे चुनौती देते हुए कहा, 'अगर आरएसएस अपने आप को राष्ट्रभक्त संगठन मानती है, तो सबसे पहले मोहन भागवत को दिल्ली में आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए और पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की पोल खोलनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि संघ प्रमुख की यह जिम्मेदारी है कि देश में जो चल रहा है, उसके खिलाफ आवाज उठाएँ।
मोदी की विदेश नीति पर तंज
राहुल गांधी ने इससे पहले व्यंग्य किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गले मिलना ही विदेश नीति बन गई है। इस पर राउत ने कहा, 'यह विदेश नीति पीएम मोदी की है, देश की नहीं। देश की विदेश नीति बीते दस साल में खत्म हो गई है।' उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री जहाँ भी जाते हैं, जोर से गले मिलते हैं — और कहा कि 'एक-दो विदेशी राष्ट्रों के राष्ट्रपति का तो साँस तक थम गई थी।'
जंतर मंतर प्रदर्शन और सरकार पर सवाल
राउत ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि BJP के शीर्ष नेतृत्व का अहंकार इन छात्रों ने चकनाचूर कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।
उत्तर प्रदेश की सौगात पर आरोप
उत्तर प्रदेश में महिलाओं को ₹50 लाख की सौगात देने के सरकारी ऐलान पर राउत ने आरोप लगाया कि यह सब आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को ₹10,000-₹10,000 और महाराष्ट्र में चुनाव से पहले ₹1,500-₹1,500 दिए गए थे। राउत के अनुसार, यह पैटर्न चुनावी राजनीति का हिस्सा है।
BJP की प्रतिक्रिया और आगे का राजनीतिक समीकरण
गौरतलब है कि राउत के इन बयानों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इस तरह के बयान विपक्षी एकता को धार देने की कोशिश के रूप में देखे जा सकते हैं। यह देखना होगा कि BJP इन आरोपों का जवाब किस रूप में देती है।