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वंदे मातरम विवाद: कांग्रेस नेताओं ने अमित शाह के दावे को खारिज कर भाजपा पर राष्ट्रीय गीत के राजनीतिकरण का आरोप लगाया

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वंदे मातरम विवाद: कांग्रेस नेताओं ने अमित शाह के दावे को खारिज कर भाजपा पर राष्ट्रीय गीत के राजनीतिकरण का आरोप लगाया

सारांश

कांग्रेस ने अमित शाह के 'वंदे मातरम' दावे पर पलटवार किया — संतोष सिंह सलूजा से लेकर पवन बंसल तक, नेताओं ने भाजपा पर राष्ट्रीय गीत को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया और 1936 की कांग्रेस CWC बैठक का ऐतिहासिक संदर्भ सामने रखा।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने गृह मंत्री अमित शाह के 'वंदे मातरम' दावे को खारिज किया और भाजपा पर राष्ट्रीय गीत के राजनीतिकरण का आरोप लगाया।
सलूजा ने कहा कि आजादी के 50 साल बाद तक नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया गया।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रवींद्रनाथ टैगोर और सरदार पटेल की विरासत का हवाला देते हुए कांग्रेस के दावे को ऐतिहासिक बताया।
कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने 1936 की कांग्रेस CWC बैठक का संदर्भ देते हुए कहा कि वंदे मातरम को दो पदों तक सीमित रखने का निर्णय तत्कालीन नेताओं की सहमति से हुआ था।
उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा 'वंदे मातरम', देशभक्ति और धर्म को विवाद पैदा करने के लिए इस्तेमाल करती है।

नई दिल्ली, 21 अगस्त — कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने गृह मंत्री अमित शाह के 'वंदे मातरम' संबंधी दावे को सिरे से खारिज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर राष्ट्रीय गीत का राजनीतिकरण करने का सीधा आरोप लगाया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने एक स्वर में कहा कि भाजपा देशभक्ति के प्रतीकों को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

सलूजा का पलटवार: आरएसएस और तिरंगे का सवाल

संतोष सिंह सलूजा ने कहा, 'सबसे पहली बात तो यह है कि भारत का हर बच्चा आजादी की लड़ाई के बारे में जानता है कि यह लड़ाई महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और दूसरे महान स्वतंत्रता सेनानियों के नेतृत्व में लड़ी गई थी, जिनमें से अधिकतर कांग्रेस से जुड़े थे। उस समय भाजपा नहीं, आरएसएस था। आरएसएस के लोग अंग्रेजों के एजेंट के तौर पर काम करते थे। आजादी के 50 साल बाद भी नागपुर में आरएसएस के हेडक्वार्टर पर कभी तिरंगा नहीं फहराया गया। उन्होंने तिरंगा नहीं फहराया, वे अपना भगवा झंडा फहराते थे।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों की विरासत को लेकर तनातनी बढ़ती जा रही है।

इमरान मसूद और पवन बंसल का ऐतिहासिक तर्क

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वंदे मातरम विवाद पर कहा, 'रवींद्रनाथ टैगोर और सरदार पटेल क्या थे? हम टैगोर, सरदार पटेल और महात्मा गांधी की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।' उनका इशारा था कि राष्ट्रीय गीत की विरासत पर कांग्रेस का दावा इतिहास-समर्थित है।

कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने 1936 की कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक का हवाला देते हुए कहा, 'पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव मौजूद थे। उस समय, सभी ने तय किया था कि वे ये दो पद गाएंगे। वंदे मातरम एक युद्ध-घोष है। जब लोग आजादी के लिए आगे बढ़ते थे, तो यह जोश भरने वाला गीत बन गया था। इसलिए इसे दो पदों तक ही सीमित रखा गया था।' गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर यह ऐतिहासिक संदर्भ लंबे समय से राजनीतिक बहसों में उठता रहा है।

उदयवीर सिंह: रिपोर्ट-कार्ड न हो तो विवाद छेड़ो

कांग्रेस नेता उदयवीर सिंह ने भाजपा की रणनीति पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि जिन सरकारों के पास कोई रिपोर्ट-कार्ड नहीं होता, वे विवादित मुद्दों को छेड़ते रहते हैं और उनकी कोशिश होती है कि मूल मुद्दों पर बात न आए। उन्होंने आरोप लगाया कि 'वंदे मातरम', देशभक्ति और धर्म को भाजपा ने विवाद पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों — तिरंगे, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत — की राजनीतिक व्याख्याओं को लेकर बहस तेज हो रही है। भाजपा की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक मंचों पर और गरमाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसकी अपनी सरकारों के दौर में भी राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर असंगतियाँ रही हैं। भाजपा पर 'राजनीतिकरण' का आरोप लगाते हुए कांग्रेस खुद इस विवाद को हवा दे रही है — जो दोनों दलों के लिए चुनावी दृष्टि से लाभकारी है। असली सवाल यह है कि क्या यह बहस नागरिकों की वास्तविक चिंताओं — महंगाई, बेरोज़गारी, शासन — से ध्यान हटाने का माध्यम बन रही है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम विवाद में कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर 'वंदे मातरम' का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। संतोष सिंह सलूजा ने गृह मंत्री अमित शाह के दावे को खारिज करते हुए कहा कि आरएसएस ने आजादी के 50 साल बाद भी नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया।
पवन कुमार बंसल ने 1936 की CWC बैठक का संदर्भ क्यों दिया?
कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने 1936 की कांग्रेस कार्यसमिति बैठक का हवाला देते हुए बताया कि नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आज़ाद और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने सर्वसम्मति से वंदे मातरम को केवल दो पदों तक सीमित रखने का निर्णय लिया था। उनका तर्क था कि यह निर्णय राजनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सहमति पर आधारित था।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वंदे मातरम पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रवींद्रनाथ टैगोर और सरदार पटेल का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस इन महापुरुषों की विरासत को आगे बढ़ा रही है। उनका संकेत था कि राष्ट्रीय गीत की विरासत पर कांग्रेस का दावा ऐतिहासिक रूप से अधिक मजबूत है।
उदयवीर सिंह ने भाजपा पर क्या आरोप लगाया?
उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया कि जिन सरकारों के पास रिपोर्ट-कार्ड नहीं होता, वे विवादित मुद्दे उठाती हैं ताकि मूल मुद्दों पर बात न हो। उन्होंने कहा कि भाजपा 'वंदे मातरम', देशभक्ति और धर्म को विवाद पैदा करने के लिए इस्तेमाल करती रही है।
भाजपा ने इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अभी तक भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। यह विवाद आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर और तेज होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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