वंदे मातरम विवाद: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का अमित शाह पर पलटवार, बोले — आजादी में सबका हिस्सा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के 'वंदे मातरम' प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। मसूद ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस उसी विचारधारा और नीति पर अडिग रहेगी, जिसके बल पर देश ने स्वतंत्रता संग्राम लड़ा था। उनके अनुसार, स्वतंत्रता आंदोलन में विभिन्न वर्गों, समुदायों और नेताओं के योगदान को न तो नकारा जा सकता है और न ही इतिहास से मिटाया जा सकता है।
ऐतिहासिक तथ्यों पर पलटवार
मसूद ने कहा कि अमित शाह द्वारा दिए जा रहे ऐतिहासिक संदर्भ कई मामलों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से जुड़े लोगों के विरुद्ध भी जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि 1941 तक कई स्थानों पर हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक सहयोग के उदाहरण इतिहास में दर्ज हैं।
कांग्रेस सांसद ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि वे ए.के. फजलुल हक की सरकार में वित्त मंत्री के पद पर रहे थे। उन्होंने सिंध प्रांत की तत्कालीन राजनीति और मुस्लिम लीग से जुड़े घटनाक्रमों का भी हवाला दिया। मसूद का आरोप था कि उस दौर में एक पक्ष ब्रिटिश शासन के साथ राजनीतिक समीकरण बना रहा था, जबकि कांग्रेस अंग्रेजों के विरुद्ध सड़कों पर संघर्ष कर रही थी।
वंदे मातरम और ऐतिहासिक संदर्भ
'वंदे मातरम' के प्रश्न पर मसूद ने कहा कि यह गीत कांग्रेस के कार्यक्रमों में दशकों से गाया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि 1937 में इस विषय पर विचार-विमर्श हुआ था और उस समय के कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को पत्र लिखकर उनकी राय माँगी थी। टैगोर की सलाह को निर्णय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया था।
मसूद ने सरदार वल्लभभाई पटेल सहित स्वतंत्रता संग्राम के अन्य प्रमुख नेताओं का स्मरण करते हुए प्रश्न किया कि क्या इन महान विभूतियों के योगदान को देशभक्ति के पैमाने पर कमतर ठहराया जा सकता है। उनका कहना था कि देशभक्ति की एकाधिकारी व्याख्या किसी एक संगठन या विचारधारा के पास नहीं हो सकती।
महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर रुख
महाराष्ट्र में गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों के विरुद्ध कार्रवाई की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए मसूद ने कहा कि किसी भी भाषा को बलपूर्वक नहीं थोपा जाना चाहिए। उनके अनुसार, भाषा प्रेम और समझाइश से सीखी जाती है, दबाव या दंड से नहीं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यदि किसी नागरिक से किसी भाषा की अपेक्षा है, तो उसके लिए सकारात्मक और सहयोगी माहौल तैयार किया जाए।
राजीव गांधी की जयंती और शिक्षा पर आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर मसूद ने उनके राष्ट्र-निर्माण में योगदान को याद किया और कहा कि कांग्रेस उनकी विरासत को सदैव सम्मान देती रहेगी।
शिक्षा संस्थानों के संदर्भ में मसूद ने आरोप लगाया कि RSS से जुड़े लोगों ने देश के शैक्षणिक ढाँचे को कमज़ोर किया है। उन्होंने हाल के पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए इसे इसी प्रवृत्ति का परिणाम बताया — हालाँकि ये आरोप कांग्रेस नेता के अपने बयान हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह ऐसे समय में आया है जब CWC के 'वंदे मातरम' प्रस्ताव को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच वैचारिक टकराव तेज़ हो गया है। स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर यह बहस आने वाले दिनों में और गहरी होने की संभावना है।