वंदे मातरम विवाद: इमरान मसूद का अमित शाह पर पलटवार — 'शर्म आपको आनी चाहिए जो छात्रों पर लाठियाँ चलवाईं'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 18 अगस्त को सहारनपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा पलटवार किया। 'वंदे मातरम' विवाद के संदर्भ में अमित शाह ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा था कि उन्हें शर्म आनी चाहिए — इसी बयान के जवाब में मसूद ने कहा कि शर्म उन्हें आनी चाहिए जिन्होंने दिल्ली छात्र आंदोलन के दौरान बच्चों पर लाठियाँ चलवाईं और बिहार में छात्रों पर एके-47 से फायरिंग कराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को किसी से देशभक्ति का प्रमाणपत्र लेने की ज़रूरत नहीं है।
गृह मंत्री के बयान पर सीधा जवाब
इमरान मसूद ने कहा, 'आपको शर्म आनी चाहिए कि आपने इस देश का क्या हाल कर दिया है?' उनका यह बयान अमित शाह की उस टिप्पणी के सीधे जवाब में था, जिसमें शाह ने सोनिया गांधी को 'वंदे मातरम' विवाद पर घेरा था। मसूद ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को पहले अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए।
छात्र आंदोलन और युवाओं पर बयान
मसूद ने दिल्ली छात्र आंदोलन और बिहार में छात्रों पर कथित एके-47 फायरिंग का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की जवानी खतरे में नहीं है — बल्कि देश के युवा देश के काम के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस युवा ऊर्जा को बर्बाद कर रही है।
बाबा रामदेव पर तंज
विरोध-प्रदर्शनों में बच्चों की भागीदारी पर योग गुरु बाबा रामदेव के बयान पर भी मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'बाबा जी, आपका उद्योग अच्छा चल रहा है। अपना उद्योग चलाइए। बच्चों को शिक्षा लायक आप छोड़ोगे कहाँ?' यह टिप्पणी रामदेव के व्यावसायिक हितों और उनके राजनीतिक बयानों पर एक साथ निशाना साधती है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सवाल
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी द्वारा चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दिए जाने पर भी मसूद ने सवाल उठाए। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'सईयां कोतवाल है तो डर किस चीज का — उन्हें तो हर मामले में क्लीन चिट मिलनी ही थी।' यह टिप्पणी जाँच एजेंसियों की निष्पक्षता पर अप्रत्यक्ष प्रश्नचिह्न लगाती है।
असम के सामाजिक कानून पर समर्थन
हालाँकि, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा घोषित व्यापक सामाजिक कानून पैकेज — जिसमें शादी की जवाबदेही, बच्चों के कल्याण और माता-पिता की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान हैं — का मसूद ने समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'यह अच्छी बात है। हर चीज का विरोध करने की ज़रूरत नहीं है।' उनका मानना है कि अगर कोई कदम समाज के हित में है, तो उसका स्वागत होना चाहिए और विपक्ष हर मुद्दे पर विरोध के लिए नहीं खड़ा होता। यह बयान विपक्ष की उस छवि को तोड़ता है जिसमें वह हर सरकारी कदम को नकारता दिखता है।