'वंदे मातरम' विवाद: BJP विधायक संजय उपाध्याय का कांग्रेस पर तीखा हमला — 'क्या पार्टी मुस्लिम लीग की राह पर?'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक संजय उपाध्याय ने 21 अगस्त 2026 को मुंबई में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के केवल दो पद गाने के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के कथित फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उपाध्याय ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस अब मुस्लिम लीग की विचारधारा का विकल्प बनती जा रही है।
मुख्य आरोप और बयान
BJP विधायक संजय उपाध्याय ने कहा, "जब स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत का राष्ट्रगीत बज रहा था, तो कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक कांग्रेस कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' को बीच में ही रोकने की कोशिश की। राहुल गांधी भी असहज दिखे, और उसके बाद कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पास किया कि उसके कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सिर्फ दो ही पद गाए जाएंगे।"
उन्होंने आगे कहा कि इससे पहले, 1937 में मुस्लिम लीग की आपत्तियों के बाद कांग्रेस ने पूरे 'वंदे मातरम' से दूरी बना ली थी, और आलोचकों के अनुसार उसी नीति की परिणति में देश का विभाजन हुआ, जिससे पाकिस्तान और बाद में बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
उपाध्याय ने तर्क दिया, "जब देश की संसद 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार करती है और पूरे गीत को गाने की अनुमति देती है, तब भी अगर कांग्रेस उस पर आपत्ति जताती है, तो क्या कांग्रेस अब मुस्लिम लीग का विकल्प बन गई है?"
राहुल गांधी पर अलग से निशाना
BJP नेता ने पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा 'स्वराज' की कथित गलत व्याख्या किए जाने पर भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक अवधारणाओं को लेकर बार-बार भ्रम की स्थिति पैदा करता है।
ISF विधायक की प्रतिक्रिया
इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने इस विवाद पर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "हम सभी राष्ट्रगीत का सम्मान करते हैं। हमारे देश में हर धर्म और जाति के लोग रहते हैं। यहाँ सबसे ज़्यादा आबादी वाले समुदाय को यह देखना चाहिए कि वे ऐसा काम करें जिससे कम आबादी वाले समुदाय पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।"
ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को लेकर विवाद नया नहीं है। 1937 में भी मुस्लिम लीग ने इस गीत पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने गीत के केवल प्रारंभिक दो पद गाने की परंपरा अपनाई थी। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों और अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।
आगे की स्थिति
कांग्रेस की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विवाद आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला सकता है।