वंदे मातरम को सांप्रदायिकता का हथियार बना रही BJP-RSS: सीपीआई(एम) सांसद शिवदासन
सारांश
मुख्य बातें
सीपीआई(एम) सांसद वी. शिवदासन ने 11 अगस्त को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) 'वंदे मातरम' गीत का उपयोग समाज में सांप्रदायिक विभाजन फैलाने के लिए कर रहे हैं। 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से पहली बार 'वंदे मातरम' गाए जाने की घटना के संदर्भ में की गई यह टिप्पणी राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है।
शिवदासन का मुख्य आरोप
सांसद वी. शिवदासन ने अपने बयान में कहा, 'इसमें कोई शक नहीं कि वंदे मातरम हमारे राष्ट्रीय आंदोलन का अहम हिस्सा है। हम सभी वंदे मातरम का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन RSS और BJP इस महान गीत का इस्तेमाल हमारे समाज में सांप्रदायिकता का जहर घोलने के लिए कर रहे हैं। इसलिए इसका विरोध किया जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' दोनों पर विचार-विमर्श किया था और स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं ने यह तय किया था कि गीत का पूरा संस्करण गाना अनिवार्य नहीं है।
संसद में विरोध-प्रदर्शन और किरेन रिजिजू का रुख
वी. शिवदासन ने दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार गृह मंत्री अमित शाह चर्चा के दौरान इस विषय पर अपना पक्ष रखेंगे। हालाँकि, सांसद ने यह स्पष्टता माँगी कि क्या यह केवल एक बयान होगा अथवा उसके बाद विस्तृत चर्चा और जवाब भी होगा।
NEET और संघीय ढाँचे पर सवाल
सांसद ने NEET परीक्षा को संघीय ढाँचे के विरुद्ध बताते हुए कहा कि तमिलनाडु, केरल और कई अन्य राज्य इस परीक्षा पर पहले से आपत्ति जताते आए हैं। उनके अनुसार, केंद्र सरकार पूरी शिक्षा-व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही है, जबकि राज्य-स्तरीय परीक्षाएँ संबंधित राज्य सरकारों या उनकी एजेंसियों द्वारा संचालित होनी चाहिए। उन्होंने NEET को समाप्त करने की माँग दोहराई।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर चिंता
शिवदासन ने मंगलवार को कहा था कि सरकार का एजेंडा देश की आम जनता को स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, प्रस्तावित परिसीमन नीति संसद में दक्षिण भारतीय राज्यों की हिस्सेदारी को कम कर देगी, जिससे स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को नुकसान होगा। महिला आरक्षण विधेयक को भी उन्होंने एक संवेदनशील मुद्दा बताया जिस पर व्यापक बहस आवश्यक है।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब संसद का सत्र जारी है और विपक्षी दल कई मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं। गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को लेकर राजनीतिक बहस नई नहीं है, लेकिन लाल किले पर इसके गायन ने इसे एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। सांसद शिवदासन के इस बयान पर BJP और RSS की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।