3 अगस्त 2026
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जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: सुरभि चंदना, करण शर्मा और भूमि पेडनेकर ने कहा — विरोध हो, पर मर्यादा न टूटे

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जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: सुरभि चंदना, करण शर्मा और भूमि पेडनेकर ने कहा — विरोध हो, पर मर्यादा न टूटे

सारांश

जंतर-मंतर के छात्र प्रदर्शन ने बॉलीवुड को भी बोलने पर मजबूर किया। सुरभि चंदना और करण शर्मा ने मर्यादित विरोध की वकालत की, जबकि भूमि पेडनेकर ने उस युवा प्रदर्शनकारी लड़की के लिए आवाज़ उठाई जिसे वायरल वीडियो के बाद बलात्कार और जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं।

मुख्य बातें

सुरभि चंदना ने कहा कि विरोध शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर केंद्रित रहना चाहिए और अपमानजनक भाषा अस्वीकार्य है।
करण शर्मा ने कहा कि किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति — विशेषकर प्रधानमंत्री — का सम्मान बनाए रखना ज़रूरी है, भले ही राजनीतिक असहमति हो।
भूमि पेडनेकर ने एक युवा प्रदर्शनकारी लड़की को मिल रही बलात्कार और जान से मारने की धमकियों को सार्वजनिक रूप से अस्वीकार्य बताया।
भूमि ने खुलासा किया कि धमकियाँ उस लड़की की माँ और पूरे परिवार को भी भेजी जा रही हैं।
तीनों हस्तियों ने इस बात पर सहमति जताई कि मतभेद रखना जायज़ है, लेकिन भाषा और व्यवहार हमेशा सम्मानजनक होना चाहिए।

जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस थमने का नाम नहीं ले रही। इस विमर्श में अब बॉलीवुड और टेलीविज़न जगत की जानी-मानी हस्तियाँ भी शामिल हो गई हैं। अभिनेत्री सुरभि चंदना, निर्माता करण शर्मा और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने 3 अगस्त को इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। तीनों इस एक बात पर एकमत नज़र आए कि अभद्र भाषा, नफ़रत और धमकियाँ — चाहे किसी भी रूप में हों — किसी भी लोकतांत्रिक विमर्श में स्वीकार्य नहीं हैं।

सुरभि चंदना का रुख: मुद्दे पर केंद्रित रहे विरोध

अभिनेत्री और निर्माता सुरभि चंदना ने कहा, 'अगर शिक्षा व्यवस्था में कोई कमी है तो उसी पर बात होनी चाहिए और उसी को लेकर प्रदर्शन होना चाहिए। सवाल पूछना पूरी तरह जायज़ है और यह हर नागरिक का अधिकार भी है।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य मुद्दे से भटककर कई दूसरी बातें उठाना असली मुद्दे को कमज़ोर करता है।

सुरभि ने किसी भी नेता, प्रधानमंत्री, राजनीतिक दल या सरकार के विरुद्ध अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल को गलत ठहराया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अपनी बात मज़बूती से रखिए, सवाल पूछिए, विरोध कीजिए — लेकिन गाली-गलौज करना या अपमानजनक पोस्टर दिखाना मुझे बिल्कुल भी सही नहीं लगता। सभ्य तरीके से अपनी बात रखने से ही सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा सकती है।'

करण शर्मा की नसीहत: पद का सम्मान ज़रूरी

निर्माता करण शर्मा ने विरोध के तरीके पर ज़ोर देते हुए कहा, 'विरोध का तरीका हमेशा मर्यादित होना चाहिए। किसी भी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति सम्मान बनाए रखना ज़रूरी है, चाहे किसी की राजनीतिक सोच अलग ही क्यों न हो।'

करण ने एक पारिवारिक उपमा देते हुए कहा, 'हम अपने माता-पिता या दादा-दादी से असहमत हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम उनका अपमान करें। उसी तरह देश में कोई भी व्यक्ति चाहे जिस पद पर हो — अगर वह प्रधानमंत्री है तो उसके पद का सम्मान किया जाना चाहिए। विरोध करना गलत नहीं है, लेकिन विरोध का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।'

भूमि पेडनेकर का गंभीर सरोकार: धमकियाँ किसी भी कीमत पर नहीं

अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने इस पूरे प्रकरण के एक अत्यंत संवेदनशील पहलू को उजागर किया। उन्होंने उस युवा लड़की के समर्थन में आवाज़ उठाई जो इस प्रदर्शन में शामिल थी और जिसका एक साक्षात्कार वायरल होने के बाद उसे सोशल मीडिया पर लगातार बलात्कार और जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। भूमि ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, 'सिर्फ वही नहीं, बल्कि उसकी माँ और पूरे परिवार को भी इस तरह के संदेश भेजे जा रहे हैं। यह बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।'

भूमि ने कहा, 'हम किसी लड़की को सिर्फ इसलिए परेशान नहीं कर सकते क्योंकि हम उसकी राय से सहमत नहीं हैं। किसी के मन में डर पैदा करना या उसे मानसिक रूप से तोड़ना सही नहीं है।'

भूमि का निजी अनुभव और अपील

अपना निजी अनुभव साझा करते हुए भूमि पेडनेकर ने कहा, 'एक महिला और पब्लिक फिगर के रूप में मैं भी ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना कर चुकी हूँ। ऐसी घटनाओं का मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा और लंबे समय तक असर पड़ता है।' उन्होंने अपील की कि मतभेद रखें, लेकिन भाषा और व्यवहार हमेशा सम्मानजनक होना चाहिए।

भूमि ने यह भी कहा, 'हर भारतीय चाहता है कि देश आगे बढ़े और विकास करे। अगर लोग एकजुट होकर सही मुद्दों पर सही तरीके से अपनी बात रखेंगे, तभी सकारात्मक बदलाव संभव होगा।' यह बहस इस बात की ओर इशारा करती है कि लोकतांत्रिक असहमति और ऑनलाइन हिंसा के बीच की रेखा को लेकर समाज में एक व्यापक पुनर्विचार की ज़रूरत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली सवाल यह है कि ऑनलाइन हिंसा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। लोकतंत्र में विरोध की मर्यादा तय करना और साइबर अपराध पर चुप्पी — दोनों एक साथ नहीं चल सकते।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर सुरभि चंदना ने क्या कहा?
सुरभि चंदना ने कहा कि विरोध का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था की असली कमियों पर केंद्रित रहना चाहिए। उन्होंने अपमानजनक भाषा और पोस्टर को गलत बताया और कहा कि सभ्य तरीके से बात रखने से ही सकारात्मक बदलाव संभव है।
भूमि पेडनेकर ने किस युवा लड़की के लिए आवाज़ उठाई?
भूमि पेडनेकर ने उस युवा प्रदर्शनकारी लड़की के समर्थन में बात की जिसका साक्षात्कार वायरल होने के बाद उसे सोशल मीडिया पर बलात्कार और जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि यह धमकियाँ उसकी माँ और पूरे परिवार को भी भेजी जा रही हैं।
करण शर्मा ने विरोध के तरीके पर क्या राय दी?
निर्माता करण शर्मा ने कहा कि विरोध का तरीका हमेशा मर्यादित होना चाहिए और किसी भी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति का सम्मान ज़रूरी है। उन्होंने पारिवारिक उपमा देते हुए कहा कि असहमति और अपमान में फर्क होता है।
क्या भूमि पेडनेकर खुद ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार हुई हैं?
हाँ, भूमि पेडनेकर ने बताया कि एक महिला और पब्लिक फिगर के रूप में वे खुद भी ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा और लंबे समय तक असर पड़ता है।
इस पूरे विवाद में तीनों हस्तियों की साझा राय क्या थी?
सुरभि चंदना, करण शर्मा और भूमि पेडनेकर तीनों इस बात पर एकमत थे कि अभद्र भाषा, नफ़रत और धमकियाँ किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी माना कि लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार हर नागरिक को है — बशर्ते वह सम्मानजनक तरीके से हो।
राष्ट्र प्रेस
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