जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन को केजरीवाल-उद्धव का समर्थन, सरकार से बातचीत की माँग
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर जारी छात्र विरोध प्रदर्शन को 22 जुलाई को दो बड़े विपक्षी नेताओं का खुला समर्थन मिला — शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार से छात्रों के साथ तत्काल संवाद स्थापित करने की अपील की। दोनों नेताओं ने यह भी माँग की कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और देश की परीक्षा प्रणाली में आमूल सुधार होना चाहिए।
उद्धव ठाकरे की कड़ी प्रतिक्रिया
एक प्रेस वार्ता में उद्धव ठाकरे ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, 'महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार बिल्कुल मंजूर नहीं है। बच्चे किसी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं तो इसमें क्या बुराई है? यह उनके भविष्य का मामला है। एक व्यक्ति या बच्चों का भविष्य, आपको चुनना है।'
ठाकरे ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में सोनम वांगचुक के पिता के अनशन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री ने स्वयं उनसे बातचीत की थी। इसी प्रकार अन्ना हजारे के आंदोलन के समय कांग्रेस सरकार ने संवाद का रास्ता अपनाया था। उन्होंने जोर दिया कि प्रजातंत्र में बातचीत अनिवार्य है — बिना संवाद के लोकतंत्र की परिभाषा अधूरी रहती है।
केजरीवाल का छात्रों के साथ एकजुटता का संदेश
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने उद्धव ठाकरे से मुलाकात की और देश के मौजूदा हालात, खासकर युवा आंदोलन पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि वे स्वयं 21 जुलाई को दिन में जंतर-मंतर गए थे, जबकि ठाकरे उसी रात वहाँ पहुँचे थे — दोनों ने प्रदर्शनकारी नेताओं और छात्रों से सीधी बातचीत की।
केजरीवाल ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक, विफल मूल्यांकन प्रणाली और परीक्षा तंत्र के भीतर सक्रिय बड़े रैकेट गंभीर चिंता के विषय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन समस्याओं को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि पेपर लीक की घटनाएँ हाल के वर्षों में कई राज्यों में सामने आई हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हो रहा यह प्रदर्शन युवाओं की व्यापक निराशा और आक्रोश का प्रतीक बनकर उभरा है।
सरकार से अपील और आगे की राह
दोनों नेताओं ने एक स्वर में सरकार से अनुरोध किया कि वह छात्रों को 'देश का भविष्य' मानते हुए उनसे सीधा संवाद करे। केजरीवाल ने दोहराया कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी व जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। विपक्ष के इस संयुक्त मोर्चे ने आंदोलन को नई राजनीतिक ऊर्जा दी है — अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस दबाव पर क्या रुख अपनाती है।