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जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन: AAP नेताओं ने की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

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जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन: AAP नेताओं ने की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

सारांश

जंतर-मंतर पर छात्रों का आक्रोश अब राजनीतिक मोर्चे पर भी गूँज उठा है। AAP के शीर्ष नेताओं ने पेपर लीक और शिक्षा सुधार की माँग को लेकर प्रदर्शन में उतरकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की — और सवाल उठाया कि परीक्षाएँ सुरक्षित रखने में जो गंभीरता नहीं दिखी, वह प्रदर्शन दबाने में क्यों दिखी।

मुख्य बातें

20 जुलाई को जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में AAP के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
मनीष सिसोदिया , संजय सिंह , आतिशी , सौरभ भारद्वाज और गोपाल राय समेत कई नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।
प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश , हरियाणा , महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के छात्र भी शामिल हुए।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया गया।
आंदोलनकारी अभिजीत दीपके की तत्काल रिहाई की माँग भी उठाई गई।
AAP ने केंद्र से छात्रों की माँगों पर संवाद के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को चल रहे छात्र आंदोलन ने सोमवार को राजनीतिक आयाम ग्रहण कर लिया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के कई वरिष्ठ नेता प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को अपना समर्थन दिया। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग को लेकर आयोजित किया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शन में मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, नेता प्रतिपक्ष आतिशी, गोपाल राय, विधायक संजीव झा और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा सहित कई नेता उपस्थित रहे। सभी ने एकस्वर में पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग दोहराई। सौरभ भारद्वाज के अनुसार, प्रदर्शन में दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के छात्र भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

नेताओं की प्रतिक्रिया

मनीष सिसोदिया ने कहा कि जंतर-मंतर पर युवाओं की भारी उपस्थिति यह साबित करती है कि अब लोग भय से मुक्त हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन यह आंदोलन अब पूरे देश के युवाओं की आवाज़ बन चुका है। उनके अनुसार, लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इसके लिए जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।

सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों से संवाद करने के बजाय पुलिस बल का सहारा लिया। उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया गया। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके की हिरासत का मुद्दा उठाते हुए उनकी तत्काल रिहाई की माँग की।

आतिशी और गोपाल राय का आरोप

आतिशी ने तीखे शब्दों में कहा कि यदि सरकार परीक्षाओं के आयोजन में उतनी ही सतर्कता बरतती, जितनी प्रदर्शन रोकने में दिखाई दी, तो NEET, SSC और TET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ नहीं होतीं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक पारदर्शिता और सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।

गोपाल राय ने सरकार से तीन तत्काल कदम उठाने की माँग की — अभिजीत दीपके की रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई। उन्होंने कहा कि छात्रों के धैर्य की और परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए।

आम जनता और छात्रों पर असर

विधायक संजीव झा ने कहा कि युवाओं की समस्याओं का समाधान उनकी आवाज़ दबाकर नहीं, बल्कि संवाद के ज़रिए होना चाहिए। अनुराग ढांडा ने कहा कि बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी शिक्षा और रोज़गार जैसे मुद्दों पर जवाबदेही चाहती है। यह ऐसे समय में आया है जब NEET पेपर लीक विवाद पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

क्या होगा आगे

AAP ने केंद्र सरकार से छात्रों की माँगों पर गंभीरता से विचार करने और संवाद के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की है। गौरतलब है कि यह प्रदर्शन ऐसे समय में तेज़ हुआ है जब परीक्षा सुधार और पेपर लीक रोकने की माँग पूरे देश में उठ रही है। आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा और बढ़ सकता है, यदि केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आती।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह संकट वर्षों से जारी है और किसी एक सरकार या मंत्री तक सीमित नहीं। असली सवाल यह है कि क्या इस्तीफे की माँग परीक्षा प्रणाली की संरचनागत खामियों को दूर करेगी, या केवल एक चेहरा बदल देगी। जब तक परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, डिजिटल सुरक्षा और स्वतंत्र निगरानी तंत्र पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह आंदोलन भी पिछले आंदोलनों की तरह बिना नतीजे के समाप्त हो सकता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन किस माँग को लेकर हो रहा है?
यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, NEET, SSC और TET जैसी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित किया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पेपर लीक से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
AAP के कौन-से नेता जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल हुए?
मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, नेता प्रतिपक्ष आतिशी, गोपाल राय, विधायक संजीव झा और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा प्रदर्शन में उपस्थित रहे। सभी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग का समर्थन किया।
अभिजीत दीपके कौन हैं और उनकी रिहाई की माँग क्यों की जा रही है?
अभिजीत दीपके इस छात्र आंदोलन से जुड़े एक प्रदर्शनकारी हैं, जिन्हें हिरासत में लिया गया है। AAP सांसद संजय सिंह और गोपाल राय ने उनकी तत्काल रिहाई की माँग करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेना किसी की गिरफ्तारी का आधार नहीं हो सकता।
क्या प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई हुई?
AAP सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया गया। हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
AAP ने केंद्र सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
AAP ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — अभिजीत दीपके की तत्काल रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई। पार्टी ने केंद्र से संवाद के ज़रिए समाधान निकालने की भी अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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