25 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष एकजुट: केजरीवाल बोले 'लोकतंत्र की बड़ी जीत', TMC ने पूछा देर क्यों

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष एकजुट: केजरीवाल बोले 'लोकतंत्र की बड़ी जीत', TMC ने पूछा देर क्यों

सारांश

नीट पेपर लीक के बाद उबले छात्र आंदोलन ने आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी छीन ली। विपक्ष ने इसे जनशक्ति की जीत बताया, लेकिन TMC और इमाम एसोसिएशन ने पूछा — इतनी देर क्यों? अब सवाल है कि क्या यह इस्तीफा आंदोलन को शांत करेगा या और भड़काएगा।

मुख्य बातें

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया, नीट पेपर लीक विवाद के बीच।
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर इसे 'डेमोक्रेसी के लिए बड़ी जीत' करार दिया।
RJD सांसद मनोज झा ने युवाओं के जोश को इस्तीफे की असली वजह बताया।
TMC विधायक कुणाल घोष ने सवाल उठाया कि इस फैसले में इतने दिन क्यों लगे।
मौलाना साजिद रशीदी ने आगाह किया कि विपक्ष अब प्रधानमंत्री के इस्तीफे की माँग उठा सकता है।
नीट-यूजी मामले में सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है; नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति प्रतीक्षित।

नई दिल्ली, 25 जुलाईधर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने एकस्वर में इसे छात्र आंदोलन की जीत करार दिया है। नीट पेपर लीक विवाद की पृष्ठभूमि में देशभर में उठे छात्र प्रदर्शनों के बीच प्रधान का यह इस्तीफा राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केजरीवाल और AAP की प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूरे देश को बधाई। डेमोक्रेसी के लिए बड़ी जीत।' केजरीवाल ने कहा कि लोगों का संघर्ष रंग लाया और इतने बड़े जनदबाव के बाद सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार नीट की व्यवस्था को दुरुस्त करेगी, 'जिससे बच्चों को आत्महत्या न करनी पड़े।'

राजद और पंजाब सरकार का रुख

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा, 'युवाओं के जोश की वजह से धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा। छात्रों ने लोकतंत्र में उत्तरदायित्व को फिर से कायम किया।' झा ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन किया, उनके जज्बे को सलाम।

पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद से पेपर लीक और परीक्षा घोटालों का सिलसिला जारी है, जिससे छात्रों का भविष्य दाँव पर लगा है। उन्होंने कहा, 'कई दिनों तक भाजपा ने आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन देश के युवा एकजुट रहे। आज घमंडी शासकों को झुकना पड़ा।'

कांग्रेस और TMC की टिप्पणी

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इस्तीफे को 'बहुत अच्छा फैसला' बताते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि जनता के दबाव से बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने जोड़ा कि राजनेताओं को हमेशा जनता से जुड़े रहना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने तीखे शब्दों में कहा, 'यह पहले हो जाना चाहिए था। इसमें इतने दिन क्यों लगे? पूरा देश इसकी माँग कर रहा था।' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रधान को बचाती रही।

धार्मिक संगठन की तीखी प्रतिक्रिया

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि सैकड़ों छात्र घायल हुए, कई मारे गए और लाठीचार्ज तक हुआ — 'क्या आज ज़मीर जागा है?' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्वयं धर्मेंद्र प्रधान कभी कांग्रेस शासनकाल के पेपर लीक मामले पर धरने पर बैठे थे।

रशीदी ने आगाह किया कि सरकार के झुकने से विपक्षी दलों के हौसले बुलंद होंगे और वे अब प्रधानमंत्री के इस्तीफे की माँग उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि 'जेन जी' (युवा पीढ़ी) इस घटनाक्रम से संतुष्ट होती है या नहीं।

आगे क्या होगा

यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है और केंद्र सरकार पर चौतरफा दबाव है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी परीक्षा घोटाले ने केंद्रीय मंत्री की कुर्सी तक असर डाला हो। नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और नीट सुधारों की दिशा पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि प्रणालीगत सुधार का संकेत — और विपक्ष भी यह जानता है। असली सवाल यह है कि नीट की संरचनात्मक खामियाँ — जिनमें परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्र वितरण और परिणाम सत्यापन शामिल हैं — क्या अगले मंत्री के कार्यकाल में दुरुस्त होंगी? मौलाना रशीदी की यह टिप्पणी कि खुद प्रधान कभी कांग्रेस के पेपर लीक पर धरने पर बैठे थे, इस पूरे प्रकरण की विडंबना को उजागर करती है। जब तक परीक्षा प्रशासन में जवाबदेही का ढाँचा नहीं बनता, मंत्री बदलना महज़ कुर्सी की अदला-बदली है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया, जो नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और उससे उपजे देशव्यापी छात्र आंदोलन के बीच आया। विपक्षी दलों ने इसे जनदबाव की जीत बताया है।
अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफे पर क्या कहा?
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट कर इसे 'डेमोक्रेसी के लिए बड़ी जीत' बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार नीट प्रणाली को सुधारेगी ताकि छात्रों को आत्महत्या जैसे कदम न उठाने पड़ें।
TMC और कांग्रेस ने इस्तीफे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि यह इस्तीफा पहले हो जाना चाहिए था और भाजपा प्रधान को बचाती रही। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इसे 'बहुत अच्छा फैसला' बताते हुए कहा कि जनदबाव से बड़े बदलाव संभव हैं।
क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से नीट विवाद खत्म होगा?
विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं के अनुसार इस्तीफा आंदोलन को पूरी तरह शांत नहीं करेगा। मौलाना साजिद रशीदी ने आगाह किया है कि विपक्षी दल अब प्रधानमंत्री के इस्तीफे की माँग उठा सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय में नीट मामले की सुनवाई जारी है।
नीट पेपर लीक आंदोलन में क्या हुआ था?
नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद देशभर के छात्र सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों पर कई जगह लाठीचार्ज की खबरें आईं और कुछ छात्रों की मौत की भी रिपोर्टें सामने आईं। इस दबाव में अंततः शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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