धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष एकजुट: केजरीवाल बोले 'लोकतंत्र की बड़ी जीत', TMC ने पूछा देर क्यों
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 25 जुलाई — धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने एकस्वर में इसे छात्र आंदोलन की जीत करार दिया है। नीट पेपर लीक विवाद की पृष्ठभूमि में देशभर में उठे छात्र प्रदर्शनों के बीच प्रधान का यह इस्तीफा राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केजरीवाल और AAP की प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूरे देश को बधाई। डेमोक्रेसी के लिए बड़ी जीत।' केजरीवाल ने कहा कि लोगों का संघर्ष रंग लाया और इतने बड़े जनदबाव के बाद सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार नीट की व्यवस्था को दुरुस्त करेगी, 'जिससे बच्चों को आत्महत्या न करनी पड़े।'
राजद और पंजाब सरकार का रुख
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा, 'युवाओं के जोश की वजह से धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा। छात्रों ने लोकतंत्र में उत्तरदायित्व को फिर से कायम किया।' झा ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन किया, उनके जज्बे को सलाम।
पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद से पेपर लीक और परीक्षा घोटालों का सिलसिला जारी है, जिससे छात्रों का भविष्य दाँव पर लगा है। उन्होंने कहा, 'कई दिनों तक भाजपा ने आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन देश के युवा एकजुट रहे। आज घमंडी शासकों को झुकना पड़ा।'
कांग्रेस और TMC की टिप्पणी
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इस्तीफे को 'बहुत अच्छा फैसला' बताते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि जनता के दबाव से बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने जोड़ा कि राजनेताओं को हमेशा जनता से जुड़े रहना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने तीखे शब्दों में कहा, 'यह पहले हो जाना चाहिए था। इसमें इतने दिन क्यों लगे? पूरा देश इसकी माँग कर रहा था।' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रधान को बचाती रही।
धार्मिक संगठन की तीखी प्रतिक्रिया
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि सैकड़ों छात्र घायल हुए, कई मारे गए और लाठीचार्ज तक हुआ — 'क्या आज ज़मीर जागा है?' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्वयं धर्मेंद्र प्रधान कभी कांग्रेस शासनकाल के पेपर लीक मामले पर धरने पर बैठे थे।
रशीदी ने आगाह किया कि सरकार के झुकने से विपक्षी दलों के हौसले बुलंद होंगे और वे अब प्रधानमंत्री के इस्तीफे की माँग उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि 'जेन जी' (युवा पीढ़ी) इस घटनाक्रम से संतुष्ट होती है या नहीं।
आगे क्या होगा
यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है और केंद्र सरकार पर चौतरफा दबाव है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी परीक्षा घोटाले ने केंद्रीय मंत्री की कुर्सी तक असर डाला हो। नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और नीट सुधारों की दिशा पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।