25 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का हमला: खड़गे बोले — 28 दिन के छात्र संघर्ष के आगे झुकी सरकार

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का हमला: खड़गे बोले — 28 दिन के छात्र संघर्ष के आगे झुकी सरकार

सारांश

28 दिन के अटूट छात्र संघर्ष ने वह कर दिखाया जो संसदीय बहसें नहीं कर पाईं — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। विपक्ष ने इसे युवा लोकतंत्र की जीत बताया, लेकिन साफ़ कर दिया कि नीट सुधार और जवाबदेही की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया, नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर 28 दिवसीय छात्र आंदोलन के दबाव में।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे 'करोड़ों युवाओं की जीत' और 'पीएम मोदी के हठ की हार' बताया।
शरद पवार (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरद पवार गुट) ने इसे 'लोकतंत्र की ताक़त का प्रतीक' और 'युवा शक्ति की बड़ी जीत' कहा।
सुप्रिया सुले और के.सी.
वेणुगोपाल ने व्यापक शैक्षिक सुधार, संसद में नीट पर चर्चा और छात्रों पर बल प्रयोग के ज़िम्मेदारों पर कार्रवाई की माँग की।
विपक्ष ने स्पष्ट किया कि आंदोलन जारी रहेगा जब तक प्रधानमंत्री माफ़ी नहीं माँगते और शिक्षा प्रणाली में निष्पक्ष सुधार नहीं होते।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया — यह कदम नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में चल रहे 28 दिवसीय छात्र आंदोलन के बीच आया। विपक्षी दलों ने इस इस्तीफे को देशभर के युवाओं की जीत बताते हुए सरकार पर और जवाबदेही की माँग तेज़ कर दी है।

खड़गे की प्रतिक्रिया: 'सत्य की जीत, मोदी के हठ की हार'

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'भारत के छात्रों की गूंज आखिरकार अहंकारी सत्ता की दहलीज तक पहुँच गई। ये हमारे करोड़ों युवाओं की जीत है, जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सड़क पर आवाज़ उठाई।' खड़गे ने इसे 'सत्य की जीत और पीएम मोदी के हठ की हार' करार दिया।

उन्होंने आगे माँग की कि प्रधानमंत्री मोदी युवा पीढ़ी से माफ़ी माँगें और जिन अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर 'लाठी-डंडे और पैलेट गन' चलवाई, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

शरद पवार: 'लोकतंत्र की ताक़त का प्रतीक'

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने एक्स पर लिखा कि जंतर-मंतर पर युवाओं ने लगातार 28 दिनों तक जो संघर्ष और दृढ़ संकल्प दिखाया, वह तारीफ के काबिल है। उन्होंने कहा, 'यह लड़ाई, जो बिना डरे दमन के खिलाफ मज़बूती से लड़ी गई, लोकतंत्र की ताक़त का प्रतीक है।' पवार ने इसे देश में 'युवा शक्ति की एकता की बड़ी जीत' बताया और विपक्षी सांसदों का आभार व्यक्त किया।

सुप्रिया सुले और वेणुगोपाल की माँगें

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले ने एक्स पर कहा कि प्रधान का इस्तीफा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, छात्रों और विपक्ष के लगातार दबाव का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह अंत नहीं हो सकता — हम असल जवाबदेही, व्यापक शैक्षिक सुधार और संसद में नीट मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की माँग करते हैं।'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने एक्स पर कहा कि जिस पल नीट का पेपर लीक हुआ, तभी से कांग्रेस और विशेषकर राहुल गांधी प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हमला करने वालों को सज़ा मिले और प्रधानमंत्री माफ़ी माँगें — 'शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए आंदोलन जारी रहेगा।'

आगे क्या: विपक्ष की माँगें अधूरी

इस्तीफे के बावजूद विपक्ष ने संकेत दिया है कि उनका दबाव जारी रहेगा। प्रमुख माँगों में शामिल हैं — छात्रों पर बल प्रयोग के ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, नीट परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार, और प्रधानमंत्री की सार्वजनिक माफ़ी। यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर देशव्यापी बहस छिड़ी हुई है और संसद का मानसून सत्र भी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह नीट संकट की जड़ — परीक्षा प्रणाली की संरचनात्मक कमज़ोरियाँ — का समाधान नहीं है। मंत्री की बलि देना सरकार के लिए एक परिचित रणनीति है जो असली सुधार की जगह ले लेती है। असली सवाल यह है कि क्या नया मंत्री नीट को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस संस्थागत बदलाव लाएगा, या यह इस्तीफा महज़ जनआक्रोश को शांत करने का तात्कालिक उपाय बनकर रह जाएगा। विपक्ष की माँगें — प्रधानमंत्री की माफ़ी और बल प्रयोग पर कार्रवाई — राजनीतिक रूप से तीखी हैं, पर असली कसौटी आने वाले महीनों में शिक्षा नीति की दिशा होगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?
नीट पेपर लीक के विरोध में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन और विपक्ष के लगातार दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया। विपक्षी नेताओं के अनुसार यह जनदबाव की सीधी जीत है।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने इस्तीफे पर क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे 'करोड़ों युवाओं की जीत' और 'पीएम मोदी के हठ की हार' बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री से युवा पीढ़ी से माफ़ी माँगने और छात्रों पर बल प्रयोग के ज़िम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की माँग की।
नीट पेपर लीक मामला क्या है?
नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) का प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आने के बाद देशभर के छात्र सड़कों पर उतरे। जंतर-मंतर पर 28 दिनों तक चले इस आंदोलन में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार और जवाबदेही की माँग की गई।
विपक्ष की अगली माँगें क्या हैं?
विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि इस्तीफे से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनकी प्रमुख माँगें हैं — छात्रों पर बल प्रयोग के ज़िम्मेदारों पर कार्रवाई, संसद में नीट मुद्दे पर विस्तृत चर्चा, व्यापक शैक्षिक सुधार और प्रधानमंत्री की सार्वजनिक माफ़ी।
शरद पवार और सुप्रिया सुले ने क्या कहा?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने इसे 'लोकतंत्र की ताक़त का प्रतीक' और 'युवा शक्ति की बड़ी जीत' बताया। सुप्रिया सुले ने कहा कि यह इस्तीफा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के दबाव का नतीजा है और असल जवाबदेही अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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