धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का हमला: खड़गे बोले — 28 दिन के छात्र संघर्ष के आगे झुकी सरकार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया — यह कदम नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में चल रहे 28 दिवसीय छात्र आंदोलन के बीच आया। विपक्षी दलों ने इस इस्तीफे को देशभर के युवाओं की जीत बताते हुए सरकार पर और जवाबदेही की माँग तेज़ कर दी है।
खड़गे की प्रतिक्रिया: 'सत्य की जीत, मोदी के हठ की हार'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'भारत के छात्रों की गूंज आखिरकार अहंकारी सत्ता की दहलीज तक पहुँच गई। ये हमारे करोड़ों युवाओं की जीत है, जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सड़क पर आवाज़ उठाई।' खड़गे ने इसे 'सत्य की जीत और पीएम मोदी के हठ की हार' करार दिया।
उन्होंने आगे माँग की कि प्रधानमंत्री मोदी युवा पीढ़ी से माफ़ी माँगें और जिन अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर 'लाठी-डंडे और पैलेट गन' चलवाई, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
शरद पवार: 'लोकतंत्र की ताक़त का प्रतीक'
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने एक्स पर लिखा कि जंतर-मंतर पर युवाओं ने लगातार 28 दिनों तक जो संघर्ष और दृढ़ संकल्प दिखाया, वह तारीफ के काबिल है। उन्होंने कहा, 'यह लड़ाई, जो बिना डरे दमन के खिलाफ मज़बूती से लड़ी गई, लोकतंत्र की ताक़त का प्रतीक है।' पवार ने इसे देश में 'युवा शक्ति की एकता की बड़ी जीत' बताया और विपक्षी सांसदों का आभार व्यक्त किया।
सुप्रिया सुले और वेणुगोपाल की माँगें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले ने एक्स पर कहा कि प्रधान का इस्तीफा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, छात्रों और विपक्ष के लगातार दबाव का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह अंत नहीं हो सकता — हम असल जवाबदेही, व्यापक शैक्षिक सुधार और संसद में नीट मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की माँग करते हैं।'
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने एक्स पर कहा कि जिस पल नीट का पेपर लीक हुआ, तभी से कांग्रेस और विशेषकर राहुल गांधी प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हमला करने वालों को सज़ा मिले और प्रधानमंत्री माफ़ी माँगें — 'शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए आंदोलन जारी रहेगा।'
आगे क्या: विपक्ष की माँगें अधूरी
इस्तीफे के बावजूद विपक्ष ने संकेत दिया है कि उनका दबाव जारी रहेगा। प्रमुख माँगों में शामिल हैं — छात्रों पर बल प्रयोग के ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, नीट परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार, और प्रधानमंत्री की सार्वजनिक माफ़ी। यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर देशव्यापी बहस छिड़ी हुई है और संसद का मानसून सत्र भी जारी है।