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नीट पेपर लीक: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत, शिवसेना (यूबीटी) ने मांगी PM मोदी से माफी

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नीट पेपर लीक: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत, शिवसेना (यूबीटी) ने मांगी PM मोदी से माफी

सारांश

नीट पेपर लीक के खिलाफ 35 दिनों के आंदोलन ने धर्मेंद्र प्रधान को राजनीतिक शिकार बनाया — लेकिन शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार यह सिर्फ शुरुआत है। सामना संपादकीय ने PM मोदी से माफी और अमित शाह की जवाबदेही की मांग करते हुए सरकार के नए एंटी-पेपर लीक विधेयक को भी महज दिखावा बताया।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 27 जुलाई को दावा किया कि नीट पेपर लीक विरोधी 35 दिनों के आंदोलन ने एनडीए सरकार को देशभर में उपहास का पात्र बनाया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को पार्टी ने 'पहला राजनीतिक शिकार' बताया और इसे 'सिर्फ शुरुआत' करार दिया।
सामना संपादकीय में अमित शाह को कथित लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार ठहराया और PM मोदी से आधिकारिक माफी की मांग की।
आंदोलन में अभिजीत दीपके , सोनम वांगचुक और नेहा बोरा जैसे प्रमुख चेहरों की भूमिका को रेखांकित किया गया।
नए एंटी-पेपर लीक विधेयक को पार्टी ने 'पुराने कानून में सजा-जुर्माना बदलकर बनाया दिखावा' बताया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सोमवार, 27 जुलाई को दावा किया कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 35 दिनों तक चले नीट पेपर लीक विरोधी आंदोलन के दौरान भाजपा नीत एनडीए सरकार देशभर में उपहास का पात्र बन गई। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को महज एक शुरुआत बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आधिकारिक माफी की मांग की।

सामना संपादकीय में तीखा हमला

ठाकरे गुट के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक तीखे संपादकीय में कहा गया कि नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ चले लंबे आंदोलन ने केंद्र सरकार की छवि को गंभीर झटका दिया और उसे वास्तविकता का एहसास कराया। संपादकीय के अनुसार, देशभर के युवाओं के आक्रोश ने धर्मेंद्र प्रधान को इस आंदोलन का पहला राजनीतिक शिकार बनाया।

संपादकीय में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रारंभ में सरकार इस्तीफे के पक्ष में नहीं थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस कथित बयान का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि एनडीए की कार्यशैली में इस्तीफे शामिल नहीं हैं। बावजूद इसके, बढ़ते जनाक्रोश के चलते सरकार को अंततः धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा।

इस्तीफे का आधिकारिक कारण खारिज

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि उन्होंने राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और राष्ट्रविरोधी ताकतों को आंदोलन का फायदा उठाने से रोकने के लिए इस्तीफा दिया। इस पर संपादकीय ने सवाल उठाया कि जंतर-मंतर या देशभर के प्रदर्शनों में उन्हें कौन-सी राष्ट्रविरोधी ताकतें दिखाई दीं? संपादकीय में यह भी कहा गया, 'छात्र नेताओं और जलवायु कार्यकर्ताओं को राष्ट्रविरोधी बताना पूरे देश में मौजूद वास्तविक आक्रोश का अपमान है। देश तो नीट पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले 20 युवाओं के बलिदान से एकजुट हुआ था।'

आंदोलन के प्रमुख चेहरे

संपादकीय में उन प्रमुख व्यक्तित्वों का उल्लेख किया गया जिन्होंने 35 दिनों के आंदोलन को गति दी। इनमें अमेरिका से लौटे अभिजीत दीपके शामिल हैं, जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ लोगों को संगठित करने के लिए 'कॉकरोच जनता पार्टी' बनाई। इसके अलावा जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और छात्र नेता नेहा बोरा का भी नाम लिया गया।

पार्टी ने सरकार के रुख में विरोधाभास का आरोप लगाया — एक तरफ भाजपा ने सोनम वांगचुक को विदेशी एजेंट बताने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ उसके मंत्री उनसे मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील करते नजर आए।

अमित शाह पर सीधा निशाना, PM से माफी की मांग

संपादकीय में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी से आधिकारिक माफी की मांग की गई। ठाकरे गुट का यह भी आरोप है कि सरकार द्वारा लाया गया नया एंटी-पेपर लीक विधेयक महज दिखावा है — पुराने कानून में केवल सजा और जुर्माने की रकम बदलकर छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित करने की कोशिश की गई है।

आगे क्या होगा

संपादकीय में दावा किया गया कि आंदोलन में शामिल युवाओं की डिजिटल समझ और तकनीकी क्षमता ने भाजपा के आईटी सेल और डिजिटल प्रचार को एक महीने तक प्रभावहीन बनाए रखा। शिवसेना (यूबीटी) ने चेतावनी दी कि यदि सरकार छात्रों की नाराजगी और प्रशासनिक विफलताओं के मूल कारणों को दूर नहीं करती, तो असंतोष की यह चिंगारी और भड़कती जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो परीक्षा प्रणाली की संरचनात्मक खामियाँ बरकरार रहेंगी। सोनम वांगचुक को 'विदेशी एजेंट' बताने और फिर मंत्रियों द्वारा उनसे मिलने की विरोधाभासी स्थिति सरकार की प्रतिक्रिया में गहरी असंगति दर्शाती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'सिर्फ शुरुआत' क्यों कहा?
शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि नीट पेपर लीक विरोधी आंदोलन का राजनीतिक असर केवल धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पार्टी ने अमित शाह की जवाबदेही और PM मोदी से आधिकारिक माफी की मांग की है।
जंतर-मंतर पर नीट आंदोलन कितने दिनों तक चला और इसमें कौन शामिल थे?
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर यह आंदोलन 35 दिनों तक चला। इसमें अमेरिका से लौटे अभिजीत दीपके (जिन्होंने 'कॉकरोच जनता पार्टी' बनाई), जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और छात्र नेता नेहा बोरा प्रमुख चेहरे थे।
नए एंटी-पेपर लीक विधेयक पर शिवसेना (यूबीटी) की क्या आपत्ति है?
पार्टी का आरोप है कि यह विधेयक पुराने कानून की ही पुनरावृत्ति है, जिसमें केवल सजा और जुर्माने की रकम बदली गई है। सामना संपादकीय के अनुसार, इससे छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित करने की कोशिश की गई है।
सामना संपादकीय में अमित शाह पर क्या आरोप लगाए गए?
सामना संपादकीय में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी से इस पूरे मामले में आधिकारिक माफी की मांग की गई।
भाजपा और सोनम वांगचुक के बीच विरोधाभास क्या था?
शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार, एक तरफ भाजपा ने सोनम वांगचुक को विदेशी एजेंट बताने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ सरकार के मंत्री उनसे मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील करते नजर आए। पार्टी ने इसे सरकार की नीतिगत असंगति बताया।
राष्ट्र प्रेस
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