22 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें — नीट गड़बड़ी पर प्रियंका चतुर्वेदी का सरकार पर तीखा प्रहार

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धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें — नीट गड़बड़ी पर प्रियंका चतुर्वेदी का सरकार पर तीखा प्रहार

सारांश

नीट पेपर लीक और 22 से अधिक छात्रों की आत्महत्या की पृष्ठभूमि में शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा। उनका कहना है — सरकार जवाबदेही से भाग रही है, और 900 से अधिक छात्रों की हिरासत लोकतंत्र पर सीधा हमला है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 22 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।
नीट-यूजी अनियमितताओं के कारण कथित तौर पर 22 से अधिक छात्रों की आत्महत्या; परिजन जंतर-मंतर पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान 900 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया गया; छात्रों पर लाठीचार्ज और आँसू गैस के इस्तेमाल का आरोप।
राहुल गांधी , अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए।
आदित्य ठाकरे ने हिरासत में लिए गए छात्रों के लिए विशेष कानूनी टीम गठित की; सोनम वांगचुक भी 'मातोश्री' में उद्धव ठाकरे से मिले।
चतुर्वेदी ने विदेशी साजिश के सरकारी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह जवाबदेही से बचने का प्रयास है।

शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 22 जुलाई को मुंबई में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर कड़ा हमला बोलते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की माँग की। उनका आरोप है कि नीट-यूजी समेत अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है, और सरकार जवाबदेही स्वीकार करने के बजाय दमन का रास्ता चुन रही है।

मुख्य आरोप और माँगें

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को सोशल मीडिया पर लंबी-लंबी पोस्ट लिखने के बजाय नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर पद छोड़ना चाहिए। उनके अनुसार, यदि शिक्षा मंत्री अपने एक्स पोस्ट के नीचे आए हजारों कमेंट पढ़ें, तो उन्हें जनमत का अंदाज़ा हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की माँग के लिए सड़कों पर उतरे हैं।

नीट और पेपर लीक: मानवीय कीमत

चतुर्वेदी ने कहा कि नीट परीक्षा से जुड़ी अव्यवस्थाओं के कारण 22 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है और उनके परिजन जंतर-मंतर पर न्याय की गुहार लगाते बैठे हैं। उनके अनुसार, पेपर लीक माफिया पहले से अधिक मजबूत हुआ है और धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था लगातार विफल होती रही है। इस पृष्ठभूमि में मंत्री का पद पर बने रहना उचित नहीं है।

छात्रों पर कार्रवाई और विपक्ष की हिरासत

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान 900 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया गया और छात्रों पर लाठीचार्ज व आँसू गैस के गोले दागे गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने पहुँचे, और उन्हें भी हिरासत में लिया गया। चतुर्वेदी के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा के विपक्ष के नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक परंपराओं के सर्वथा विरुद्ध है।

शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन और कानूनी सहायता

चतुर्वेदी ने बताया कि उद्धव ठाकरे लगातार छात्रों की आवाज़ उठा रहे हैं। आदित्य ठाकरे ने हिरासत में लिए गए छात्रों को कानूनी सहायता देने के लिए एक विशेष कानूनी टीम गठित की है। सोनम वांगचुक भी 'मातोश्री' जाकर अपनी माँगों पर चर्चा कर चुके हैं। छात्र नेता अभिजीत दिपके के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्रों के एकजुट होने की उन्होंने सराहना की।

विदेशी साजिश के आरोपों पर पलटवार

सरकार की ओर से विदेशी हस्तक्षेप की आशंका जताए जाने पर चतुर्वेदी ने कहा कि यदि वास्तव में विदेशी ताकतें अस्थिरता फैला रही हैं, तो इसे रोकने में गृह मंत्री और प्रधानमंत्री विफल क्यों रहे। उनके अनुसार, सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए कभी पाकिस्तान, कभी चीन और अब विदेशी साजिश का सहारा लेती है — यह छात्रों के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। उन्होंने संसद में इस विषय पर चर्चा से सरकार के लगातार बचने पर भी सवाल उठाए और कहा कि जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे की पीड़ा वास्तविक है — 22 से अधिक छात्रों की कथित आत्महत्या और 900 से अधिक की हिरासत कोई सामान्य विरोध-प्रदर्शन नहीं है। असली सवाल यह है कि पेपर लीक माफिया को बार-बार सफलता क्यों मिलती है और NTA जैसी संस्था की जवाबदेही तय करने का तंत्र कहाँ है। सरकार का विदेशी साजिश का आख्यान उस व्यवस्थागत विफलता से ध्यान हटाता है जो परीक्षा-दर-परीक्षा दोहराई जा रही है। संसद में चर्चा से बचना और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेना — ये दोनों कदम सरकार की स्थिति को कमज़ोर करते हैं, मज़बूत नहीं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका चतुर्वेदी ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों माँगा?
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने नीट-यूजी समेत कई परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, 22 से अधिक छात्रों की आत्महत्या और छात्र प्रदर्शनों को दमन से संभालने में विफलता के आधार पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा। उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय सोशल मीडिया पर सफाई दे रहे हैं।
नीट विवाद में कितने छात्रों को हिरासत में लिया गया?
प्रियंका चतुर्वेदी के अनुसार, छात्र प्रदर्शनों के दौरान 900 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया गया। दिल्ली और मुंबई में छात्रों पर लाठीचार्ज और आँसू गैस के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है।
शिवसेना (यूबीटी) ने हिरासत में लिए गए छात्रों की मदद के लिए क्या कदम उठाए?
आदित्य ठाकरे ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों को कानूनी सहायता देने के लिए एक विशेष कानूनी टीम गठित की है। उद्धव ठाकरे के निर्देश पर पार्टी नेताओं ने दिल्ली और मुंबई दोनों जगह प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया।
विपक्षी नेताओं की हिरासत पर प्रियंका चतुर्वेदी का क्या कहना है?
चतुर्वेदी ने कहा कि राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लेना लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है। उनके अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा के विपक्ष के नेताओं को हिरासत में लेना सरकार के बढ़ते अहंकार का प्रमाण है।
सरकार के विदेशी साजिश के दावे पर चतुर्वेदी की क्या प्रतिक्रिया है?
प्रियंका चतुर्वेदी ने विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में विदेशी ताकतें अस्थिरता फैला रही हैं, तो गृह मंत्री और प्रधानमंत्री इसे रोकने में विफल क्यों रहे — और यह आख्यान छात्रों के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास मात्र है।
राष्ट्र प्रेस
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