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नीट-यूजी पेपर लीक: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा, 22 लाख छात्र प्रभावित — अरविंद सावंत

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नीट-यूजी पेपर लीक: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा, 22 लाख छात्र प्रभावित — अरविंद सावंत

सारांश

नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई विवाद ने 22 लाख छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस दोनों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की है। यह परीक्षा तंत्र में बार-बार होने वाली विफलताओं की एक और कड़ी है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की माँग की।
नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई मूल्यांकन विवाद से करीब 22 लाख छात्र प्रभावित बताए जा रहे हैं।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी सरकार से जवाबदेही और जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने की माँग की।
विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार में विफलताओं की जिम्मेदारी लेने की परंपरा नहीं है।
केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने 1 जून 2026 को नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई मूल्यांकन विवाद के मद्देनज़र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की माँग की। उनका कहना है कि इन अनियमितताओं की वजह से देशभर के करीब 22 लाख छात्रों का भविष्य दाँव पर लग गया है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है।

मुख्य आरोप और माँग

सांसद सावंत ने कहा कि जब इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षाएँ और करियर प्रभावित हों, तो सरकार की जवाबदेही और भी बढ़ जाती है। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में बार-बार गड़बड़ियाँ सामने आना पूरे तंत्र की बड़ी विफलता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महज जाँच के नाम पर समय निकालना पर्याप्त नहीं — जिम्मेदारी तय होनी ही चाहिए।

सावंत ने सवाल उठाया कि आखिर देश में कौन-सी परीक्षा अब पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो रही है। उनका तर्क है कि यह स्थिति छात्रों और उनके परिवारों के लिए भारी मानसिक व आर्थिक संकट का कारण बन रही है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पहले नीट परीक्षा में पेपर लीक के आरोप सामने आए और अब सीबीएसई के मूल्यांकन को लेकर भी इसी तरह की शिकायतें उठ रही हैं। अनवर के अनुसार, एक के बाद एक परीक्षाओं में अनियमितता की खबरें आना पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को अपने पद से हटकर जाँच में सहयोग करना चाहिए। अनवर ने आरोप लगाया कि भाजपा में किसी भी विफलता की जिम्मेदारी लेने की परंपरा नहीं रही है, जो इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।

छात्रों पर असर

नीट-यूजी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें हर साल लाखों छात्र सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए बैठते हैं। कथित तौर पर 22 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के भविष्य पर इस विवाद का सीधा असर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएँ न केवल मेरिट-आधारित प्रणाली को नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के छात्रों को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं।

सरकार की स्थिति और आगे की राह

अब तक केंद्र सरकार की ओर से इन माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्षी दलों का दबाव बढ़ने के साथ यह मामला संसद के अगले सत्र में भी गूँजने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा सुधारों की माँग पहले से ही ज़ोर पकड़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी हर बार जाँच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। 22 लाख छात्रों का आँकड़ा महज संख्या नहीं, यह उन परिवारों की तपस्या है जो वर्षों की मेहनत और लाखों रुपये दाँव पर लगाते हैं। असली सवाल यह नहीं कि मंत्री इस्तीफा दें या न दें — असली सवाल यह है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की संरचनात्मक खामियों को दूर करने के लिए कोई ठोस, जाँचयोग्य सुधार कब होगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद क्या है?
नीट-यूजी देश की राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें कथित तौर पर पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस विवाद से करीब 22 लाख परीक्षार्थियों के परिणाम और प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हुई बताई जा रही है।
अरविंद सावंत ने शिक्षा मंत्री से इस्तीफा क्यों माँगा?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत का कहना है कि नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई मूल्यांकन विवाद जैसी बड़ी चूकों की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर बनती है। उनके अनुसार 22 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़े मामले में मंत्री का पद पर बने रहना उचित नहीं है।
सीबीएसई मूल्यांकन विवाद क्या है?
नीट पेपर लीक के बाद सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि एक के बाद एक परीक्षाओं में इस तरह की शिकायतें पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं।
इस मामले में कांग्रेस का क्या रुख है?
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने मामले को गंभीर और चिंताजनक बताया है। उन्होंने माँग की है कि जिम्मेदार अधिकारी अपने पद से हटकर जाँच में सहयोग करें और शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।
केंद्र सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
अब तक केंद्र सरकार की ओर से विपक्ष की इस्तीफे की माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला संसद के अगले सत्र में उठाए जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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