नीट-यूजी पेपर लीक: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा, 22 लाख छात्र प्रभावित — अरविंद सावंत
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने 1 जून 2026 को नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई मूल्यांकन विवाद के मद्देनज़र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की माँग की। उनका कहना है कि इन अनियमितताओं की वजह से देशभर के करीब 22 लाख छात्रों का भविष्य दाँव पर लग गया है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है।
मुख्य आरोप और माँग
सांसद सावंत ने कहा कि जब इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षाएँ और करियर प्रभावित हों, तो सरकार की जवाबदेही और भी बढ़ जाती है। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में बार-बार गड़बड़ियाँ सामने आना पूरे तंत्र की बड़ी विफलता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महज जाँच के नाम पर समय निकालना पर्याप्त नहीं — जिम्मेदारी तय होनी ही चाहिए।
सावंत ने सवाल उठाया कि आखिर देश में कौन-सी परीक्षा अब पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो रही है। उनका तर्क है कि यह स्थिति छात्रों और उनके परिवारों के लिए भारी मानसिक व आर्थिक संकट का कारण बन रही है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पहले नीट परीक्षा में पेपर लीक के आरोप सामने आए और अब सीबीएसई के मूल्यांकन को लेकर भी इसी तरह की शिकायतें उठ रही हैं। अनवर के अनुसार, एक के बाद एक परीक्षाओं में अनियमितता की खबरें आना पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को अपने पद से हटकर जाँच में सहयोग करना चाहिए। अनवर ने आरोप लगाया कि भाजपा में किसी भी विफलता की जिम्मेदारी लेने की परंपरा नहीं रही है, जो इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।
छात्रों पर असर
नीट-यूजी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें हर साल लाखों छात्र सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए बैठते हैं। कथित तौर पर 22 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के भविष्य पर इस विवाद का सीधा असर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएँ न केवल मेरिट-आधारित प्रणाली को नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के छात्रों को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं।
सरकार की स्थिति और आगे की राह
अब तक केंद्र सरकार की ओर से इन माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्षी दलों का दबाव बढ़ने के साथ यह मामला संसद के अगले सत्र में भी गूँजने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा सुधारों की माँग पहले से ही ज़ोर पकड़ रही है।