21 जुलाई 2026
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नीट पेपर लीक: एनएसयूआई के विनोद जाखड़ की माँग — एनटीए बंद हो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें

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नीट पेपर लीक: एनएसयूआई के विनोद जाखड़ की माँग — एनटीए बंद हो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें

सारांश

नीट पेपर लीक के बाद दिल्ली में छात्रों पर कथित लाठीचार्ज को लेकर एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मोर्चा खोला — NTA बंद करो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। 28 राज्यों में आंदोलन और 25 से अधिक छात्रों की कथित आत्महत्या के बीच यह विवाद अब सड़क से संसद तक पहुँचने की राह पर है।

मुख्य बातें

एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने 21 जुलाई को NTA पर प्रतिबंध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।
जाखड़ के अनुसार नीट पेपर लीक के बाद कथित तौर पर 25 से अधिक छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की है।
नई दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस , लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल का आरोप; छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार की भी शिकायत।
जाखड़ ने दावा किया कि पत्थरबाजी छात्रों ने नहीं बल्कि दिल्ली पुलिस ने परिस्थितियाँ बनाकर कराई।
राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' अभियान 28 राज्यों में सक्रिय; कई स्थानों पर कार्यक्रम की अनुमति रद्द करने का आरोप।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष जाँच नहीं होती, देशभर में आंदोलन जारी रहेगा।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने 21 जुलाई को नई दिल्ली में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर कड़े आरोप लगाते हुए माँग की कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। जाखड़ ने यह बयान नीट पेपर लीक विवाद, छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आरएमएल अस्पताल दौरे की पृष्ठभूमि में दिया।

कथित लाठीचार्ज और प्रदर्शनकारियों पर आरोप

जाखड़ के अनुसार, छात्र तीन प्रमुख माँगों — धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक पर सख्त कानून और NTA पर प्रतिबंध — को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के गोले छोड़े गए, बैरिकेडिंग की गई, सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने लाठियाँ चलाईं और छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएँ सामने आईं। जाखड़ ने कहा, 'देश का युवा जाग चुका है और धर्म, जाति व संप्रदाय की राजनीति से ऊपर उठकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।'

पत्थरबाजी पर दिल्ली पुलिस पर पलटवार

प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पत्थरबाजी के सवाल पर जाखड़ ने दिल्ली पुलिस पर ही आरोप मढ़ दिए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल पर पहुँचने से पहले छात्रों के बैग और वाहनों की जाँच की जा रही थी, मेट्रो और रेलवे स्टेशन बंद थे, इसलिए छात्र पत्थर लेकर नहीं आ सकते थे। उनके अनुसार बैरिकेड पर पहले से वेल्डिंग और नुकीले तार लगाए गए थे, और पुलिस ने स्वयं ऐसी परिस्थितियाँ बनाईं जिनसे हिंसा भड़की। बड़ी संख्या में छात्र पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के कार्यालयों में शरण लेने पर मजबूर हुए।

आरएमएल अस्पताल में घायल छात्र

जाखड़ ने बताया कि वह देर रात आरएमएल अस्पताल पहुँचे और घायल छात्रों से मिले। उनके अनुसार कई छात्रों के सिर फटे हुए थे, किसी का कान घायल था और किसी का पैर टूटा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न तो पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई और न ही किसी प्रकार की सांत्वना दी। यह ऐसे समय में आया है जब जाखड़ ने दावा किया कि नीट पेपर लीक के बाद 25 से अधिक छात्र-छात्राओं ने कथित तौर पर आत्महत्या की है।

राहुल गांधी के अभियान और सरकार की प्रतिक्रिया

जाखड़ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान 28 राज्यों में चलाया जा रहा है और लाखों छात्र इससे जुड़ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कोटा और देहरादून समेत कई स्थानों पर राहुल गांधी के कार्यक्रम की अनुमति रद्द करके उसी मैदान में मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए गए। उनके अनुसार यह सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें छात्रों की समस्याओं पर चर्चा के बजाय उनका ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

एनएसयूआई की माँगें और आगे का रास्ता

जाखड़ ने स्पष्ट किया कि एनएसयूआई का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक तीन शर्तें पूरी नहीं होतीं: NTA पर प्रतिबंध, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कानून और प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जाँच। विभिन्न राज्यों में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पुतले फूँके जा रहे हैं तथा कैंडल मार्च और मशाल मार्च निकाले जा रहे हैं। गौरतलब है कि एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर पहले भी इस मुद्दे को लेकर मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया जा चुका है। देश का युवा अब शिक्षा, रोजगार और अपने अधिकारों पर सरकार से जवाब माँग रहा है — और यह दबाव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल अनुत्तरित है — नीट पेपर लीक की जवाबदेही तय करने में सरकार ने अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? छात्रों की माँगों को 'राजनीतिक' बताकर खारिज करना उस व्यापक शैक्षिक संकट को नजरअंदाज करना है जिसमें NTA की साख पहले ही धूल में मिल चुकी है। जाखड़ के दावे — खासकर पत्थरबाजी में पुलिस की भूमिका वाले — स्वतंत्र जाँच की माँग करते हैं, जो अभी तक घोषित नहीं हुई। विपक्ष का 'छात्रों की गूंज' अभियान भले ही राजनीतिक हो, लेकिन 25 से अधिक कथित आत्महत्याओं का आँकड़ा किसी भी सरकार के लिए नैतिक जवाबदेही का प्रश्न बन जाता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनोद जाखड़ ने NTA पर प्रतिबंध की माँग क्यों की?
एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने नीट पेपर लीक विवाद के बाद NTA की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने की माँग की। उनके अनुसार इस लीक के बाद कथित तौर पर 25 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है और सरकार ने अभी तक पर्याप्त जवाबदेही तय नहीं की है।
दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर क्या हुआ?
जाखड़ के अनुसार 21 जुलाई को नई दिल्ली में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार की भी शिकायतें सामने आईं।
एनएसयूआई की प्रमुख माँगें क्या हैं?
एनएसयूआई ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NTA पर प्रतिबंध, और प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जाँच। इसके अलावा पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की भी माँग की गई है।
राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' अभियान क्या है?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरू किए गए इस अभियान के तहत वे कोटा, देहरादून समेत कई स्थानों पर छात्रों से संवाद कर रहे हैं। जाखड़ के अनुसार यह अभियान 28 राज्यों में चलाया जा रहा है और लाखों छात्र इससे जुड़ चुके हैं।
दिल्ली में पत्थरबाजी को लेकर जाखड़ ने क्या कहा?
जाखड़ ने पत्थरबाजी के लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया। उनका दावा है कि प्रदर्शन स्थल पर पहुँचने से पहले छात्रों के बैग और वाहनों की जाँच हो रही थी और मेट्रो-रेलवे स्टेशन बंद थे, इसलिए छात्र पत्थर नहीं ला सकते थे। उन्होंने कहा कि बैरिकेड पर पहले से वेल्डिंग और नुकीले तार लगाए गए थे।
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