नीट पेपर लीक: एनएसयूआई के विनोद जाखड़ की माँग — एनटीए बंद हो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें
सारांश
मुख्य बातें
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने 21 जुलाई को नई दिल्ली में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर कड़े आरोप लगाते हुए माँग की कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। जाखड़ ने यह बयान नीट पेपर लीक विवाद, छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आरएमएल अस्पताल दौरे की पृष्ठभूमि में दिया।
कथित लाठीचार्ज और प्रदर्शनकारियों पर आरोप
जाखड़ के अनुसार, छात्र तीन प्रमुख माँगों — धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक पर सख्त कानून और NTA पर प्रतिबंध — को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के गोले छोड़े गए, बैरिकेडिंग की गई, सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने लाठियाँ चलाईं और छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएँ सामने आईं। जाखड़ ने कहा, 'देश का युवा जाग चुका है और धर्म, जाति व संप्रदाय की राजनीति से ऊपर उठकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।'
पत्थरबाजी पर दिल्ली पुलिस पर पलटवार
प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पत्थरबाजी के सवाल पर जाखड़ ने दिल्ली पुलिस पर ही आरोप मढ़ दिए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल पर पहुँचने से पहले छात्रों के बैग और वाहनों की जाँच की जा रही थी, मेट्रो और रेलवे स्टेशन बंद थे, इसलिए छात्र पत्थर लेकर नहीं आ सकते थे। उनके अनुसार बैरिकेड पर पहले से वेल्डिंग और नुकीले तार लगाए गए थे, और पुलिस ने स्वयं ऐसी परिस्थितियाँ बनाईं जिनसे हिंसा भड़की। बड़ी संख्या में छात्र पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के कार्यालयों में शरण लेने पर मजबूर हुए।
आरएमएल अस्पताल में घायल छात्र
जाखड़ ने बताया कि वह देर रात आरएमएल अस्पताल पहुँचे और घायल छात्रों से मिले। उनके अनुसार कई छात्रों के सिर फटे हुए थे, किसी का कान घायल था और किसी का पैर टूटा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न तो पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई और न ही किसी प्रकार की सांत्वना दी। यह ऐसे समय में आया है जब जाखड़ ने दावा किया कि नीट पेपर लीक के बाद 25 से अधिक छात्र-छात्राओं ने कथित तौर पर आत्महत्या की है।
राहुल गांधी के अभियान और सरकार की प्रतिक्रिया
जाखड़ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान 28 राज्यों में चलाया जा रहा है और लाखों छात्र इससे जुड़ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कोटा और देहरादून समेत कई स्थानों पर राहुल गांधी के कार्यक्रम की अनुमति रद्द करके उसी मैदान में मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए गए। उनके अनुसार यह सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें छात्रों की समस्याओं पर चर्चा के बजाय उनका ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
एनएसयूआई की माँगें और आगे का रास्ता
जाखड़ ने स्पष्ट किया कि एनएसयूआई का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक तीन शर्तें पूरी नहीं होतीं: NTA पर प्रतिबंध, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कानून और प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जाँच। विभिन्न राज्यों में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पुतले फूँके जा रहे हैं तथा कैंडल मार्च और मशाल मार्च निकाले जा रहे हैं। गौरतलब है कि एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर पहले भी इस मुद्दे को लेकर मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया जा चुका है। देश का युवा अब शिक्षा, रोजगार और अपने अधिकारों पर सरकार से जवाब माँग रहा है — और यह दबाव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।