नीट पेपर लीक 2026: एनएसयूआई का दिल्ली से यूपी तक विरोध, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और एनटीए बैन की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नीट पेपर लीक 2026: एनएसयूआई का दिल्ली से यूपी तक विरोध, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और एनटीए बैन की मांग

सारांश

नीट पेपर लीक का विवाद एक बार फिर सड़कों पर उतरा — एनएसयूआई ने दिल्ली से बस्ती तक प्रदर्शन किए, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और एनटीए पर बैन माँगा। छात्रों का आरोप है कि 10 साल में 89 पेपर लीक हो चुके हैं और लाखों विद्यार्थियों का भविष्य दाँव पर है।

मुख्य बातें

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने 18 मई 2026 को नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश में नीट पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
प्रमुख माँगें: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर स्थायी प्रतिबंध।
एनएसयूआई का दावा — पिछले 10 वर्षों में 89 अलग-अलग पेपर लीक की घटनाएँ हुई हैं।
पेपर लीक के सिलसिले में एक ब्यूटिशियन को गिरफ्तार किया गया है; प्रदर्शनकारियों ने बड़े नेटवर्क की जाँच की माँग की।
यूपी के बस्ती में एनएसयूआई ने झालमुड़ी वितरण कर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया।
छात्रों ने पेपर लीक से उत्पन्न मानसिक तनाव और अभिभावकों की आर्थिक क्षति पर भी चिंता जताई।

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) से जुड़े छात्र-कार्यकर्ताओं ने 18 मई 2026 को नई दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक नीट पेपर लीक मामले के विरोध में सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

बड़ी संख्या में एकत्रित एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार बरती जा रही अनियमितताओं के कारण लाखों विद्यार्थियों का भविष्य दाँव पर लग रहा है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमारी माँग बिल्कुल स्पष्ट है — सबसे पहले एनटीए को बैन किया जाए और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया जाए, क्योंकि लगातार हो रहे पेपर लीक की वजह से लाखों विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।' उसी प्रदर्शनकारी ने जोड़ा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्र पूरे साल परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन अंत में उन्हें बताया जाता है कि पेपर लीक हो चुका है।'

बार-बार हो रहे लीक पर गुस्सा

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं — 2021, 2024 और अब 2026 में भी ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं। एनएसयूआई ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 89 अलग-अलग पेपर लीक हुए हैं, जो कथित तौर पर परीक्षा प्रणाली में गहरी खामियों की ओर इशारा करते हैं।

गौरतलब है कि इसी सिलसिले में एक ब्यूटिशियन को गिरफ्तार किया गया है। एक प्रदर्शनकारी ने सवाल उठाया कि आखिर वो इतने बड़े पैमाने पर पेपर कैसे लीक कर सकती है — इशारा करते हुए कि इस नेटवर्क में और बड़े खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं।

छात्रों और परिवारों पर असर

प्रदर्शनकारियों ने विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति पर पड़ रहे गंभीर असर की ओर भी ध्यान खींचा। एक छात्र ने कहा, 'हमने कई रातें जागकर मेहनत की। अगर पेपर को सार्वजनिक रूप से बाज़ार में बेचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा, तो विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए कौन प्रेरित करेगा?' प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएँ न सिर्फ छात्रों, बल्कि उन अभिभावकों को भी बुरी तरह प्रभावित करती हैं जो अपनी मेहनत की कमाई बच्चों की पढ़ाई और तैयारी पर खर्च करते हैं।

उत्तर प्रदेश में अनोखा प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के बस्ती में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने एक अलग अंदाज़ में विरोध दर्ज कराया — उन्होंने लोगों के बीच झालमुड़ी का वितरण किया। यह प्रतीकात्मक विरोध सरकार की कथित संवेदनहीनता पर तंज़ था।

एनएसयूआई का रुख और आगे की राह

एनएसयूआई ने विरोध प्रदर्शन के दौरान दावा किया कि लगातार हो रहे पेपर लीक इस बात की पुष्टि करते हैं कि सरकार भर्ती और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बरतने में नाकाम रही है। संगठन ने बेरोज़गारी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। यह आंदोलन तब तक जारी रहने के संकेत हैं जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और एनटीए पर प्रतिबंध की माँगें पूरी नहीं होतीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताती है कि समस्या तंत्रगत है, महज संयोग नहीं। एनटीए पर बैन की माँग जायज़ सवाल उठाती है, लेकिन असली चुनौती यह है कि बिना किसी वैकल्पिक परीक्षा ढाँचे के एनटीए को हटाना लाखों छात्रों के लिए और बड़ी अनिश्चितता पैदा कर सकता है। एक गिरफ्तार ब्यूटिशियन पर सारा दोष मढ़ना उस व्यापक नेटवर्क की जाँच से ध्यान भटकाता है जो इतने बड़े पैमाने पर लीक को संभव बनाता है। जब तक परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही का कोई ठोस और सत्यापन-योग्य ढाँचा नहीं बनता, ये विरोध प्रदर्शन और माँगें हर साल दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक 2026 का मामला क्या है?
2026 में नीट परीक्षा का पेपर लीक होने की घटना सामने आई है, जिसके सिलसिले में एक ब्यूटिशियन को गिरफ्तार किया गया है। एनएसयूआई का आरोप है कि यह 2021 और 2024 के बाद तीसरी बड़ी पेपर लीक घटना है और पिछले 10 वर्षों में कुल 89 पेपर लीक हो चुके हैं।
एनएसयूआई धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों माँग रही है?
एनएसयूआई का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में बार-बार पेपर लीक हुए हैं और सरकार इन मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मंत्री इस पूरे प्रकरण को लेकर संवेदनहीन बने हुए हैं।
एनटीए पर बैन की माँग क्यों उठ रही है?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएँ आयोजित करती है। एनएसयूआई का आरोप है कि एनटीए लगातार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बरतने में नाकाम रही है, इसलिए उस पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाए।
पेपर लीक से छात्रों पर क्या असर पड़ रहा है?
प्रदर्शनकारियों के अनुसार बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों विद्यार्थी मानसिक तनाव में हैं और उनके सपने चकनाचूर हो रहे हैं। अभिभावकों की मेहनत की कमाई भी बर्बाद हो रही है जो बच्चों की तैयारी पर खर्च होती है।
उत्तर प्रदेश के बस्ती में एनएसयूआई ने क्या किया?
बस्ती में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने एक प्रतीकात्मक विरोध के तहत लोगों के बीच झालमुड़ी का वितरण किया। यह सरकार की कथित संवेदनहीनता पर तंज़ के रूप में किया गया अनोखा प्रदर्शन था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 22 घंटे पहले
  3. कल
  4. कल
  5. 5 दिन पहले
  6. 5 दिन पहले
  7. 6 दिन पहले
  8. 6 दिन पहले