नीट पेपर लीक: एनएसयूआई का कैंडल मार्च, सुप्रीम कोर्ट जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

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नीट पेपर लीक: एनएसयूआई का कैंडल मार्च, सुप्रीम कोर्ट जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

सारांश

नीट पेपर लीक के बाद छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं ने एनएसयूआई को सड़कों पर उतार दिया। दिल्ली से लातूर तक कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन — माँग है सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच, पीड़ित परिवारों को मुआवजा और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।

मुख्य बातें

एनएसयूआई ने 16 मई को नई दिल्ली में नीट पेपर लीक पीड़ितों के लिए कैंडल मार्च निकाला।
एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने सरकार पर छात्रों का आत्मविश्वास तोड़ने का आरोप लगाया।
संगठन ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच, पीड़ित परिवारों को आर्थिक मुआवजा और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की माँग की।
कांग्रेस सांसद शिवाजी कालगे ने 22–24 लाख छात्रों के भविष्य को दाँव पर बताते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।
महाराष्ट्र के लातूर सहित कई शहरों में एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
हिमाचल प्रदेश के मंत्री राजेश धरमानी ने कहा कि एनटीए से नहीं, व्यवस्था में चरित्रवान लोगों की ज़रूरत है।

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के सदस्यों ने 16 मई को नई दिल्ली में नीट पेपर लीक मामले में जान गँवाने वाले अभ्यर्थियों को श्रद्धांजलि देने के लिए कैंडल मार्च निकाला और सरकार से न्याय की माँग की। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को आर्थिक मुआवजे की माँग रखी।

मुख्य घटनाक्रम

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कैंडल मार्च में कहा कि जिन विद्यार्थियों ने डॉक्टर बनने का सपना देखा और जिन माता-पिता ने कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाया, उनके लिए पेपर लीक के बाद हुई आत्महत्याएँ एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं कि सरकार कहाँ है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक की वजह से छात्र-छात्राओं का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और वे डिप्रेशन में हैं, क्योंकि सरकार ने उनका आत्मविश्वास कमज़ोर कर दिया है।

जाखड़ ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और शिक्षा मंत्री की ओर से केवल पेपर रद्द करने की बात कही गई, जो पर्याप्त नहीं है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि कोई भी गलत कदम न उठाएँ और भरोसा दिलाया कि एनएसयूआई इस लड़ाई को मज़बूती से लड़ेगी।

माँगें और प्रदर्शन का दायरा

एनएसयूआई की प्रमुख माँगें हैं — पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से आर्थिक मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जाँच, और मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई। यह प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा — महाराष्ट्र के लातूर में भी एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के सैकड़ों छात्र व कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे।

नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद शिवाजी कालगे ने लातूर में प्रदर्शन के दौरान कहा कि उन 22–24 लाख छात्रों की कोई गलती नहीं जिन्होंने यह परीक्षा दी, न उन माता-पिता की जो दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, और न उन शिक्षकों की जो बच्चों को तैयार करते हैं। कालगे ने आरोप लगाया कि कुछ भ्रष्ट लोगों को बचाने की कोशिश में सरकार ने पूरे देश के छात्रों को परेशान किया है। उन्होंने यूथ कांग्रेस की ओर से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।

हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री राजेश धरमानी ने कहा कि सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाओं के बावजूद भ्रष्टाचार थमा नहीं है। उनके अनुसार एनटीए बनाने से तब तक कोई मदद नहीं मिलेगी जब तक अच्छे चरित्र वाले लोग इस व्यवस्था में नहीं आते।

आम जनता और छात्रों पर असर

नीट पेपर लीक मामले ने देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है। कथित तौर पर कई छात्र मानसिक तनाव और अवसाद में हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।

क्या होगा आगे

एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाते, विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच की माँग के साथ यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप की दिशा में भी बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राजनीतिक दबाव किसी ठोस संस्थागत सुधार में बदलेगा। एनटीए की विश्वसनीयता पर यह पहला हमला नहीं है — पिछले कुछ वर्षों में कई परीक्षाओं में अनियमितताएँ सामने आई हैं, फिर भी व्यवस्था में बुनियादी बदलाव नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की माँग सही दिशा में है, लेकिन मुआवजे और इस्तीफे की माँगें तब तक प्रतीकात्मक रहेंगी जब तक परीक्षा प्रणाली की जड़ों में पारदर्शिता नहीं आती। 22–24 लाख छात्रों का भविष्य किसी एक मंत्री के इस्तीफे से नहीं, बल्कि जवाबदेह और तकनीक-आधारित परीक्षा ढाँचे से सुरक्षित होगा।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक मामले में एनएसयूआई की मुख्य माँगें क्या हैं?
एनएसयूआई ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जाँच, पीड़ित परिवारों को सरकारी आर्थिक मुआवजा, और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई। इसके अलावा यूथ कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी माँग की है।
नीट पेपर लीक से कितने छात्र प्रभावित हुए हैं?
कांग्रेस सांसद शिवाजी कालगे के अनुसार इस परीक्षा में 22–24 लाख छात्र शामिल हुए थे, जो सभी इस लीक से प्रभावित हैं। एनटीए और शिक्षा मंत्री की ओर से अब तक केवल पेपर रद्द करने की बात कही गई है।
एनएसयूआई का कैंडल मार्च कहाँ-कहाँ हुआ?
16 मई को नई दिल्ली में मुख्य कैंडल मार्च निकाला गया। इसके साथ ही महाराष्ट्र के लातूर में भी एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के सैकड़ों छात्र व कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
क्या नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी होगी?
अभी तक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच की माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। एनएसयूआई ने यह माँग रखी है और कहा है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।
नीट पेपर लीक के बाद छात्रों की मानसिक स्थिति पर क्या असर पड़ा है?
एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के अनुसार पेपर लीक की वजह से कई छात्र-छात्राओं का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और वे डिप्रेशन में हैं। कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों ने आत्महत्या भी की है, जिसके बाद एनएसयूआई ने यह कैंडल मार्च आयोजित किया।
राष्ट्र प्रेस
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