धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस बोली — युवाओं और जेन-Z की जीत, मोदी से माफी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा 25 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा सौंपे जाने के तुरंत बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने इसे देश के युवाओं और जेन-Z की ऐतिहासिक जीत करार दिया। पार्टी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि यह जीत उन करोड़ों छात्रों की है जिन्होंने बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए अपनी आवाज़ उठाई।
कांग्रेस का तीखा बयान
कांग्रेस ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के युवाओं और भारत की जेन-Z की जीत है। यह जीत देशभर के उन करोड़ों युवा छात्रों की है, जिन्होंने बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग के लिए संघर्ष किया।' पार्टी ने आगे कहा कि 'नरेंद्र मोदी का अहंकार टूट गया है और उनके झूठ की हार हुई है। युवाओं ने एक अक्षम और भ्रष्ट शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया।'
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि नीट पेपर लीक मामले के पहले दिन से ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी छात्रों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं — सड़क से लेकर संसद तक।
मोदी से माफी की मांग
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। पार्टी ने कहा, 'नरेंद्र मोदी को देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए।' पार्टी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा सौंपते हुए एक्स पर लिखा कि 'राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।' उन्होंने कहा कि वे पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। प्रधान ने बताया कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया।
उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष से नीट परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रधान ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।
जंतर-मंतर विरोध का संदर्भ
अपने इस्तीफे में प्रधान ने जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे नहीं चाहते कि देश के युवाओं का भविष्य राजनीतिक विवादों या कानूनी पेचीदगियों में उलझे। यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद ने पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है।
आने वाले दिनों में नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और नीट सुधारों की दिशा पर सरकार का रुख स्पष्ट होना बाकी है।