धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह बोले — भाजपा में पद से बड़ा देश और युवा पीढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भाजपा की प्राथमिकताओं का प्रमाण बताया और कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा नीट-यूजी परीक्षा में 3 मई को सामने आई अनियमितताओं की पृष्ठभूमि में आया है, जिसके बाद केंद्र सरकार ने जाँच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की।
गौरतलब है कि 20 लाख से अधिक छात्रों की पुनः परीक्षा 21 जून को राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और विद्यार्थियों के सहयोग से सफलतापूर्वक आयोजित की गई। साथ ही सरकार ने अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (कंप्यूटर-आधारित परीक्षण) मोड में कराने का निर्णय भी लिया।
अमित शाह का बयान
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक के दोषियों को कठोर दंड दिलाने के लिए लिए गए निर्णय सराहनीय हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन कदमों से नीट परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा।
प्रधान का एक्स पोस्ट और विदाई संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा: 'मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।'
उन्होंने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा का अवसर मिला, इसके लिए वे आभारी हैं और राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रधान के कार्यकाल की उपलब्धियाँ
अमित शाह ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया।
शाह के अनुसार, परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने के प्रयास भी प्रधान के कार्यकाल की विशेष उपलब्धि रही। यह कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है।
आगे क्या
शिक्षा मंत्रालय में नए नेतृत्व की नियुक्ति और नीट सुधारों की दिशा पर अब सभी की नजरें टिकी हैं। सीबीआई की जाँच जारी है और पेपर लीक के दोषियों पर कठोर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।