धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शरद पवार बोले — 'युवा शक्ति की एकता की ऐतिहासिक जीत'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली / मुंबई, 25 जुलाई: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को महाराष्ट्र के विपक्षी दलों ने शनिवार को देशभर के युवाओं की निर्णायक जीत करार दिया। नीट पेपर लीक विवाद के बीच जंतर-मंतर पर 28 दिनों तक चले अनवरत प्रदर्शन के बाद यह इस्तीफा आया, जिसे विपक्ष ने लोकतंत्र की शक्ति का प्रमाण बताया।
शरद पवार की प्रतिक्रिया
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार 28 दिनों तक युवाओं द्वारा दिखाया गया संघर्ष और दृढ़ संकल्प वास्तव में सराहनीय है। उन्होंने कहा, 'प्रदर्शनकारियों की लगातार माँग के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया। यह लड़ाई, जिसने बिना किसी डर के दमन के खिलाफ मज़बूती से आवाज़ उठाई और सरकार को अन्याय के खिलाफ नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए मजबूर किया, लोकतंत्र की शक्ति का प्रतीक है।'
पवार ने आगे कहा कि विपक्षी दलों के सभी सांसदों को भी हार्दिक धन्यवाद, जिन्होंने अपने प्रमुख नेताओं के माध्यम से देश के युवाओं को नैतिक और संसदीय समर्थन प्रदान किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'देश में लोकतंत्र की विजय हुई है, और इसका श्रेय निस्संदेह देश की युवा पीढ़ी को जाता है।'
संजय राउत का तीखा वार
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा यह साबित करता है कि मोदी-शाह अजेय नहीं हैं। उन्होंने जोड़ा, 'वे भी जाएंगे!'
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि इससे पहले किसी भी प्रधानमंत्री को खुद का बचाव करने के लिए इस तरह का वीडियो जारी करने की ज़रूरत नहीं पड़ी। वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि हाल ही में जारी किए गए वीडियो की करोड़ों तक पहुँच जनता के प्यार का प्रतिबिंब नहीं, बल्कि भाजपा के आईटी सेल के ज़रिए पैदा किया गया कृत्रिम प्रचार है।
उन्होंने कहा, 'आज सोशल मीडिया पर 95 प्रतिशत लोग नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार के खिलाफ बोलते नज़र आ रहे हैं। बेरोज़गारी, पेपर घोटाले, महँगाई और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर देशभर में आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है।' वडेट्टीवार ने यह भी कहा कि दुष्प्रचार से सच्चाई नहीं बदलती और जनता का फैसला किसी भी आईटी सेल से कहीं बड़ा है।
आम जनता और युवाओं पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 पेपर लीक प्रकरण को लेकर देशभर में छात्र समुदाय में गहरा असंतोष व्याप्त है। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर 28 दिनों तक चला यह आंदोलन हाल के वर्षों में किसी शैक्षणिक मुद्दे पर हुए सबसे लंबे और संगठित युवा प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस इस्तीफे से परीक्षा प्रणाली में सुधार की माँग और तेज़ होगी।
आगे क्या
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय में नए नेतृत्व और नीट सुधारों की दिशा पर सभी की नज़रें टिकी हैं। विपक्ष ने माँग की है कि अगला कदम पेपर लीक की निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि देश के लाखों परीक्षार्थियों को न्याय मिल सके।