25 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अखिलेश यादव बोले — 'यह इस्तीफा नहीं, इंकलाब है'

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अखिलेश यादव बोले — 'यह इस्तीफा नहीं, इंकलाब है'

सारांश

नीट विवाद में घिरे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अखिलेश यादव ने 'इंकलाब' करार दिया। डिंपल यादव, नवीन पटनायक, आदित्य ठाकरे और वी.डी. सतीशन समेत विपक्ष एकजुट हुआ — लेकिन माँगें अभी बाकी हैं: नीट में पारदर्शिता, मुआवज़ा और मुकदमे वापसी।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'इस्तीफा नहीं, इंकलाब' बताया।
सपा सांसद डिंपल यादव ने सोशल मीडिया पर छात्रों को बधाई दी और व्यवस्था में भ्रष्टाचार खत्म करने की माँग की।
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 'जेन जी' पीढ़ी की भूमिका को सराहा।
आदित्य ठाकरे ने शिवाजी पार्क में तिरंगा यात्रा का ऐलान किया; अमित राज ठाकरे ने इसे 'युवाओं की जीत' कहा।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी.
सतीशन ने कहा — इस्तीफा देर से आया, लेकिन छात्र संघर्ष की यह ऐतिहासिक जीत है।
विपक्ष की शेष माँगें: संसद में नीट पर बहस, पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा और आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस ।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह महज एक मंत्री का पद-त्याग नहीं, बल्कि देश के युवाओं का इंकलाब है। नीट परीक्षा विवाद के बीच छात्र आंदोलन की बढ़ती लहर के सामने प्रधान को अंततः इस्तीफा देना पड़ा, और इस घटनाक्रम ने देशभर में राजनीतिक बहस को नई धार दे दी है।

सपा की प्रतिक्रिया

सपा सांसद डिंपल यादव ने सोशल मीडिया पर छात्रों को संबोधित करते हुए लिखा, 'प्यारे बच्चों, यह जीत आपकी है। हम आपके साहस, दृढ़ संकल्प और लगन को सलाम करते हैं, जिसकी वजह से शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।' उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को जो तकलीफ, मारपीट और अपमान झेलना पड़ा, उसका उन्हें गहरा अफसोस है। उनके अनुसार देश को ऐसे बदलाव की ज़रूरत है जिससे व्यवस्था में जान-बूझकर फैलाए गए भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सके।

विपक्षी नेताओं की एकजुट आवाज़

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने युवाओं को बधाई देते हुए कहा, 'जवाबदेही और जनमत के प्रति संवेदनशीलता एक मजबूत लोकतंत्र के अहम मूल्य हैं। कोई भी जनता की इच्छा से ऊपर नहीं है।' उन्होंने खासतौर पर 'जेन जी' पीढ़ी की भूमिका की सराहना की।

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने घोषणा की कि रविवार को शिवाजी पार्क में तिरंगा यात्रा आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा, 'हम युवाओं की इस जीत का जश्न मनाने और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा के बारे में जवाब माँगने के लिए एकजुट हो रहे हैं। यह राजनीतिक मतभेदों से ऊपर, देश के लिए है।'

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के पुत्र अमित राज ठाकरे ने कहा कि यह जीत पूरी तरह देश के युवाओं की है, किसी राजनीतिक दल की नहीं। उन्होंने छात्रों के संघर्ष — पुलिस लाठियाँ, चिलचिलाती धूप और बारिश में घंटों सड़कों पर डटे रहना — को शब्दों में बयान करना असंभव बताया। उन्होंने माँग की कि संसद में नीट पर पूरी बहस हो, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा मिले और आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएँ।

केरल के मुख्यमंत्री का बयान

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तय था और उन्होंने देर से यह कदम उठाया। उन्होंने कहा, 'यह इस्तीफा तब आया जब कई दिनों तक सड़कों पर बच्चों को पीटने की कोशिशें नाकाम रहीं। यह देश के छात्रों के संघर्ष की जीत है।' सतीशन ने यह भी कहा कि गंभीर आरोपों के बावजूद प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रधान का बचाव करने की कोशिश की, लेकिन अंततः उन्हें शर्मिंदगी के साथ पद छोड़ना पड़ा।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि इस्तीफे के बाद भी उनकी माँगें समाप्त नहीं हुई हैं। नीट परीक्षा में पारदर्शिता, पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा और आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी — ये तीन मुद्दे अब केंद्र सरकार के सामने प्रमुख चुनौती बनकर खड़े हैं। यह घटनाक्रम भारत में छात्र राजनीति और जन-आंदोलन की बदलती ताकत का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नीट व्यवस्था में सुधार की माँग अब कहाँ जाएगी — क्योंकि एक मंत्री के जाने से परीक्षा तंत्र की खामियाँ अपने आप नहीं मिटतीं। विपक्ष की एकजुटता प्रभावशाली है, लेकिन यह एकता तब तक अर्थहीन है जब तक संसद में नीट सुधार पर ठोस विधायी दबाव न बने। छात्र आंदोलन ने जो ऊर्जा दिखाई है, वह भारतीय लोकतंत्र के लिए उत्साहवर्धक है — पर इसे 'इंकलाब' तभी कहा जा सकेगा जब व्यवस्थागत बदलाव धरातल पर दिखे, महज एक इस्तीफे तक सीमित न रहे।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट परीक्षा विवाद और उसके बाद भड़के देशव्यापी छात्र आंदोलन के दबाव में इस्तीफा दिया। कथित तौर पर परीक्षा में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी को लेकर छात्र लंबे समय से सड़कों पर थे।
अखिलेश यादव ने इस्तीफे को 'इंकलाब' क्यों कहा?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस इस्तीफे को केवल एक मंत्री के पद-त्याग से बड़ा बताया — उनके अनुसार यह युवाओं की उस शक्ति का प्रमाण है जो व्यवस्था को बदलने में सक्षम है। उन्होंने इसे छात्रों के सामूहिक संघर्ष की जीत करार दिया।
विपक्ष की अभी भी क्या माँगें बाकी हैं?
अमित राज ठाकरे और अन्य विपक्षी नेताओं के अनुसार तीन प्रमुख माँगें अभी अधूरी हैं — संसद में नीट पर विस्तृत बहस, नीट विवाद में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा, और आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेना।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने इस्तीफे पर क्या कहा?
वी.डी. सतीशन ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तय था और वे देर से इस नतीजे पर पहुँचे। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रधानमंत्री ने आरोपों के बावजूद प्रधान का बचाव किया, लेकिन अंततः छात्रों का संघर्ष जीता।
नीट विवाद में छात्र आंदोलन की भूमिका क्या रही?
छात्रों ने पुलिस लाठीचार्ज, धूप और बारिश की परवाह किए बिना लंबे समय तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। उनके इस अनुशासित और निरंतर दबाव को विपक्षी नेताओं ने लोकतंत्र की ताकत का उदाहरण बताया और इसे अंततः शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का कारण माना।
राष्ट्र प्रेस
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