अखिलेश यादव का बड़ा बयान: व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव बिना छात्रों को न्याय नहीं
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 28 जुलाई 2026 को संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट कहा कि जब तक शिक्षा और शासन व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव नहीं होता, तब तक देश के छात्रों को सच्चा न्याय नहीं मिलेगा। उनका यह बयान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के ठीक बाद आया है, जो परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर हफ्तों तक चले छात्र आंदोलन के दबाव में शनिवार को अपना पद छोड़ चुके हैं।
मुख्य बयान और मांग
अखिलेश यादव ने कहा, "जब तक स्थापित व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव नहीं होगा, तब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल किसी मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है — व्यवस्था की सोच और कार्यप्रणाली में भी बुनियादी परिवर्तन अनिवार्य है। सपा प्रमुख के अनुसार, छात्र आंदोलन को उनके परिवारों का व्यापक समर्थन मिला, जिसने इसे इतना व्यापक रूप दिया कि केंद्र सरकार को अंततः उनकी मांगों के सामने झुकना पड़ा।
नीट और उत्तर प्रदेश का संदर्भ
उत्तर प्रदेश का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि राज्य में 20 से अधिक परीक्षा पत्र लीक हो चुके हैं और हालिया छात्र आंदोलन में शामिल अधिकांश युवा उत्तर प्रदेश से थे। उन्होंने कहा, "करीब 20 लाख छात्रों ने नीट परीक्षा दी थी — यानी उनके परिवारों समेत लगभग एक करोड़ लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए।" उनके अनुसार, इसी व्यापक जनप्रभाव के कारण सत्तारूढ़ गठबंधन के कई सांसदों को राजनीतिक दबाव महसूस हुआ और सरकार को छात्रों की मांगें माननी पड़ीं।
गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल
सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मौजूद रहना चाहिए था, क्योंकि पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी युवाओं पर बर्बरता की। गौरतलब है कि यह आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
संसद में विधेयक पर चर्चा
28 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। बहस की शुरुआत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कानून लाकर यूपीए सरकार के अधूरे काम को पूरा किया है। यह विधेयक ऐसे समय में पेश हुआ है जब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस अपने चरम पर है।
आगे क्या होगा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व किसे सौंपा जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। संशोधन विधेयक पर संसद में जारी बहस और विपक्ष की मांगें यह तय करेंगी कि सरकार परीक्षा सुधार को किस दिशा में ले जाती है। अखिलेश यादव के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष केवल मंत्री-परिवर्तन से संतुष्ट नहीं होगा — उसकी नज़र व्यापक संस्थागत सुधार पर है।