28 जुलाई 2026
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अखिलेश यादव का बड़ा बयान: व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव बिना छात्रों को न्याय नहीं

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अखिलेश यादव का बड़ा बयान: व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव बिना छात्रों को न्याय नहीं

सारांश

अखिलेश यादव ने संसद परिसर में साफ कहा — धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा महज़ शुरुआत है, असली बदलाव व्यवस्था की जड़ में होना चाहिए। 20 लाख नीट परीक्षार्थियों और उनके परिवारों के दबाव ने सरकार को झुकाया, लेकिन सपा की नज़र में लड़ाई अभी बाकी है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 28 जुलाई 2026 को संसद परिसर में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव बिना छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद शनिवार को इस्तीफा दिया था।
सपा प्रमुख ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 20 से अधिक परीक्षा पत्र लीक हो चुके हैं।
करीब 20 लाख नीट परीक्षार्थी और उनके परिवारों समेत लगभग एक करोड़ लोग सीधे प्रभावित बताए गए।
लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा 28 जुलाई दोपहर 2 बजे शुरू हुई।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने पेपर लीक पर सख्त कानून लाकर यूपीए का अधूरा काम पूरा किया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 28 जुलाई 2026 को संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट कहा कि जब तक शिक्षा और शासन व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव नहीं होता, तब तक देश के छात्रों को सच्चा न्याय नहीं मिलेगा। उनका यह बयान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के ठीक बाद आया है, जो परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर हफ्तों तक चले छात्र आंदोलन के दबाव में शनिवार को अपना पद छोड़ चुके हैं।

मुख्य बयान और मांग

अखिलेश यादव ने कहा, "जब तक स्थापित व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव नहीं होगा, तब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल किसी मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है — व्यवस्था की सोच और कार्यप्रणाली में भी बुनियादी परिवर्तन अनिवार्य है। सपा प्रमुख के अनुसार, छात्र आंदोलन को उनके परिवारों का व्यापक समर्थन मिला, जिसने इसे इतना व्यापक रूप दिया कि केंद्र सरकार को अंततः उनकी मांगों के सामने झुकना पड़ा।

नीट और उत्तर प्रदेश का संदर्भ

उत्तर प्रदेश का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि राज्य में 20 से अधिक परीक्षा पत्र लीक हो चुके हैं और हालिया छात्र आंदोलन में शामिल अधिकांश युवा उत्तर प्रदेश से थे। उन्होंने कहा, "करीब 20 लाख छात्रों ने नीट परीक्षा दी थी — यानी उनके परिवारों समेत लगभग एक करोड़ लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए।" उनके अनुसार, इसी व्यापक जनप्रभाव के कारण सत्तारूढ़ गठबंधन के कई सांसदों को राजनीतिक दबाव महसूस हुआ और सरकार को छात्रों की मांगें माननी पड़ीं।

गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल

सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मौजूद रहना चाहिए था, क्योंकि पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी युवाओं पर बर्बरता की। गौरतलब है कि यह आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

संसद में विधेयक पर चर्चा

28 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। बहस की शुरुआत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कानून लाकर यूपीए सरकार के अधूरे काम को पूरा किया है। यह विधेयक ऐसे समय में पेश हुआ है जब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस अपने चरम पर है।

आगे क्या होगा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व किसे सौंपा जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। संशोधन विधेयक पर संसद में जारी बहस और विपक्ष की मांगें यह तय करेंगी कि सरकार परीक्षा सुधार को किस दिशा में ले जाती है। अखिलेश यादव के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष केवल मंत्री-परिवर्तन से संतुष्ट नहीं होगा — उसकी नज़र व्यापक संस्थागत सुधार पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अखिलेश यादव का यह सवाल कहीं अधिक तीखा है — क्या मंत्री बदलने से परीक्षा माफिया टूटता है? उत्तर प्रदेश में 20 से अधिक पेपर लीक के दावे, अगर सत्यापित हों, तो यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि संस्थागत विफलता है। संशोधन विधेयक सख्त प्रावधान ला सकता है, लेकिन कानून की धार तभी काम करती है जब जाँच एजेंसियाँ स्वतंत्र हों और राजनीतिक संरक्षण न मिले — इस पर न सरकार ने जवाब दिया है, न विपक्ष ने माँगा है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने छात्र न्याय को लेकर क्या कहा?
अखिलेश यादव ने 28 जुलाई 2026 को संसद परिसर में कहा कि जब तक शिक्षा और शासन व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव नहीं होगा, तब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा। उनके अनुसार केवल किसी मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सप्ताह तक चले छात्र आंदोलन के दबाव में शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दिया। यह आंदोलन मुख्यतः नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के विरोध में था।
नीट आंदोलन से कितने लोग प्रभावित हुए?
अखिलेश यादव के अनुसार करीब 20 लाख छात्रों ने नीट परीक्षा दी थी और उनके परिवारों समेत लगभग एक करोड़ लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इसी व्यापक जनप्रभाव के कारण सांसदों पर राजनीतिक दबाव बना और सरकार को झुकना पड़ा।
पब्लिक एग्जामिनेशंस संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करता है। 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में इस पर चर्चा शुरू हुई; केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे यूपीए के अधूरे काम को पूरा करने वाला कदम बताया।
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में पेपर लीक को लेकर क्या दावा किया?
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 20 से अधिक परीक्षा पत्र लीक हो चुके हैं और हालिया छात्र आंदोलन में शामिल अधिकांश युवा उत्तर प्रदेश से थे। यह दावा उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में किया।
राष्ट्र प्रेस
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