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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस बोली — करोड़ों छात्रों के संघर्ष की जीत

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस बोली — करोड़ों छात्रों के संघर्ष की जीत

सारांश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को कांग्रेस ने करोड़ों छात्रों के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया। अरुण यादव और उमंग सिंघार ने कहा — सरकार का अहंकार आखिरकार टूटा, लेकिन मध्य प्रदेश में पेपर लीक और भर्ती के मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 25 जुलाई को देश के करोड़ों छात्रों के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कहा — परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवालों के बाद छात्रों के लोकतांत्रिक दबाव ने सरकार को झुकाया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सड़क से संसद तक के संघर्ष को कांग्रेस ने इस जीत का अहम हिस्सा बताया।
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा — BJP सरकार को अंततः युवाओं की एकजुटता के आगे झुकना पड़ा।
मध्य प्रदेश में शिक्षा, भर्ती और पेपर लीक के मुद्दे अभी भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 25 जुलाई को देश के करोड़ों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लोकतांत्रिक संघर्ष की ऐतिहासिक जीत करार दिया। भोपाल में कांग्रेस नेताओं ने इस घटनाक्रम को सत्य और जवाबदेही की विजय बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए।

कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कहा कि यह इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक परिवर्तन नहीं, बल्कि उन लाखों-करोड़ों युवाओं के भविष्य, विश्वास और मेहनत की जीत है, जिन्होंने वर्षों तक कठिन परिश्रम कर अपने सपनों को साकार करने का संकल्प लिया था।

यादव ने कहा कि जब परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा, तब देशभर के विद्यार्थियों ने लोकतांत्रिक तरीके से न्याय की माँग की और अंततः उनके संघर्ष ने केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया।

राहुल गांधी की भूमिका पर जोर

अरुण यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे आंदोलन के दौरान युवाओं की आवाज को मजबूती से उठाया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार विद्यार्थियों के साथ खड़े रहे और सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उनके अनुसार, यह विपक्ष के निरंतर दबाव का भी परिणाम है।

सरकार पर तीखा प्रहार

पूर्व केंद्रीय मंत्री यादव ने आरोप लगाया कि शुरुआत में सरकार ने छात्रों की पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया और लाखों विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों की चिंताओं की लगातार अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि देश के कोने-कोने से उठी आवाज और विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक संघर्ष ने अंततः सरकार को झुकने के लिए विवश कर दिया।

यादव ने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री और एनटीए प्रमुख का इस्तीफा सरकार की जवाबदेही स्वीकार करने का प्रतीक है। यह स्पष्ट संदेश है कि लोकतंत्र में जनता और युवाओं की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।

विधानसभा नेता प्रतिपक्ष का बयान

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि देशभर के छात्र-युवाओं के अथक संघर्ष और एकजुटता के आगे भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि जब युवा जागरूक होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो सरकार को सुनना ही पड़ता है।

मध्य प्रदेश के युवाओं से आह्वान

सिंघार ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश में भी शिक्षा, भर्ती, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े अनेक गंभीर मुद्दे आज भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश का युवा भी अन्याय, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ मजबूती से अपनी आवाज बुलंद करेगा। यह घटनाक्रम आने वाले समय में शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग को और तेज कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह इस्तीफा परीक्षा प्रणाली की संरचनागत खामियों को दूर करेगा या केवल जनदबाव को शांत करने का प्रतीकात्मक कदम साबित होगा। एनटीए विवाद ने यह उजागर किया कि करोड़ों छात्रों की मेहनत एक भ्रष्ट प्रक्रिया की भेंट चढ़ सकती है — और इसके लिए जवाबदेही तंत्र लगभग अनुपस्थित था। कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक है, परंतु मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएँ विपक्षी शासनकाल में भी हुई हैं — यह तथ्य इस 'जीत' के दावे को एकतरफा बनाता है। सुधार की असली कसौटी नए मंत्री और पुनर्गठित एनटीए का प्रदर्शन होगा, न कि किसी के जाने की घोषणा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठे सवालों और देशव्यापी छात्र आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया। कांग्रेस के अनुसार, विपक्ष के लगातार दबाव और लाखों छात्रों के संघर्ष ने सरकार को यह कदम उठाने के लिए विवश किया।
कांग्रेस ने इस इस्तीफे को किस रूप में देखा?
कांग्रेस ने इसे करोड़ों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कहा कि यह सरकार की जवाबदेही स्वीकार करने और उसके अहंकार के पतन का प्रतीक है।
राहुल गांधी की इस मामले में क्या भूमिका रही?
कांग्रेस के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार विद्यार्थियों के साथ खड़े रहे और सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने छात्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी।
मध्य प्रदेश में युवाओं से जुड़े कौन-से मुद्दे अभी भी लंबित हैं?
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अनुसार, मध्य प्रदेश में शिक्षा, भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े अनेक गंभीर मुद्दे अभी भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं।
एनटीए प्रमुख का इस्तीफा भी हुआ क्या?
कांग्रेस नेता अरुण यादव के बयान के अनुसार, शिक्षा मंत्री के साथ-साथ एनटीए प्रमुख का भी इस्तीफा हुआ। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही की स्वीकृति बताया।
राष्ट्र प्रेस
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