25 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गहलोत बोले: 'लोकतंत्र की जीत, छात्रों का संघर्ष सफल'

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गहलोत बोले: 'लोकतंत्र की जीत, छात्रों का संघर्ष सफल'

सारांश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोकतंत्र की जीत बताया। उनके अनुसार यह राहुल गांधी और लाखों छात्रों के पेपर लीक विरोधी आंदोलन का नतीजा है — और यह संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ।

मुख्य बातें

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया।
गहलोत ने इसे राहुल गांधी और लाखों छात्रों के पेपर लीक विरोधी आंदोलन की जीत बताया।
उन्होंने कहा कि जनता के भारी दबाव के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कार्रवाई करने पर विवश होना पड़ा।
गहलोत ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पेलेट गन और आँसू गैस के इस्तेमाल की घटनाओं का जिक्र किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती और शिक्षा प्रणाली की गरिमा बहाल नहीं होती।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत करार दिया। गहलोत ने कहा कि यह उस निरंतर संघर्ष का परिणाम है जो विपक्ष के नेता राहुल गांधी और लाखों छात्रों ने पेपर लीक मामले में जवाबदेही की माँग को लेकर चलाया।

गहलोत की प्रतिक्रिया: संघर्ष की जीत

गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी और लाखों छात्रों द्वारा पेपर लीक के विरुद्ध चलाए गए आंदोलन की आज जीत हुई है। उनके अनुसार इस आंदोलन ने देश की शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग रखी, ऐसे समय में जब — उनके शब्दों में — मोदी सरकार बार-बार जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही थी।

गहलोत ने आगे कहा कि जनता के भारी दबाव के कारण अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कार्रवाई करने पर विवश होना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री ने लंबे समय तक उनका बचाव किया, लेकिन जनता की जवाबदेही की माँग के आगे वे उन्हें बचा नहीं सके।'

राहुल गांधी के बयान का संदर्भ

गहलोत ने उल्लेख किया कि उसी दिन सुबह राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाना चाहिए। गहलोत के अनुसार, छात्रों और उनकी आकांक्षाओं के प्रति राहुल गांधी के अटूट समर्थन ने इस आंदोलन को निर्णायक मजबूती दी।

छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई की याद

गहलोत ने पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश प्रदर्शनकारी छात्रों पर पेलेट गन और आँसू गैस के इस्तेमाल को नहीं भूला है। उनके अनुसार, राहुल गांधी के साथ छात्र समर्थन में खड़े होने के दौरान हुई कथित बदसलूकी भी लोकतांत्रिक असहमति को दबाने के प्रयास की याद दिलाती है।

आगे का संघर्ष जारी रहेगा

गहलोत ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा संघर्ष का अंत नहीं है। उन्होंने कहा, 'भारत की जनता उस सरकार को कभी माफ नहीं करेगी जिसने लाखों युवा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।' उनके अनुसार, यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक हर प्रभावित छात्र को न्याय नहीं मिलता, दोषियों को सजा नहीं होती और भारत की शिक्षा प्रणाली की गरिमा पूरी तरह बहाल नहीं होती।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मंत्री के जाने से पेपर लीक की जड़ें खत्म होंगी या सिर्फ राजनीतिक दबाव का वाल्व खुला। गहलोत का बयान कांग्रेस की उस रणनीति को दर्शाता है जो छात्र आंदोलन को व्यापक सत्ता-विरोधी आख्यान से जोड़ती है — लेकिन यह भी उतना ही सच है कि राजस्थान में कांग्रेस के शासनकाल में भी परीक्षा घोटाले सामने आए थे। बिना संस्थागत सुधार के केवल व्यक्ति-परिवर्तन से पारदर्शिता नहीं आती — यह वह प्रश्न है जो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पेपर लीक मामले में बढ़ते जन-दबाव और विपक्षी आंदोलन के बीच हुआ। अशोक गहलोत के अनुसार, जनता की जवाबदेही की माँग के आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कार्रवाई करने पर विवश होना पड़ा।
अशोक गहलोत ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस्तीफे को 'लोकतंत्र की जीत' बताया। उन्होंने कहा कि यह राहुल गांधी और लाखों छात्रों के पेपर लीक विरोधी आंदोलन का परिणाम है।
पेपर लीक आंदोलन में राहुल गांधी की क्या भूमिका रही?
गहलोत के अनुसार, राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में आंदोलन को मजबूती दी और 25 जुलाई की सुबह स्पष्ट रूप से धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की माँग की। उनके अटूट समर्थन को गहलोत ने आंदोलन की निर्णायक शक्ति बताया।
क्या प्रधान के इस्तीफे से पेपर लीक का मुद्दा सुलझ जाएगा?
गहलोत ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष का अंत नहीं है। उनके अनुसार, जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती और भारत की शिक्षा प्रणाली की गरिमा पूरी तरह बहाल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर क्या आरोप लगे?
गहलोत ने कहा कि पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों में छात्रों पर पेलेट गन और आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक असहमति दबाने का प्रयास बताया।
राष्ट्र प्रेस
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