धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गहलोत बोले: 'लोकतंत्र की जीत, छात्रों का संघर्ष सफल'
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत करार दिया। गहलोत ने कहा कि यह उस निरंतर संघर्ष का परिणाम है जो विपक्ष के नेता राहुल गांधी और लाखों छात्रों ने पेपर लीक मामले में जवाबदेही की माँग को लेकर चलाया।
गहलोत की प्रतिक्रिया: संघर्ष की जीत
गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी और लाखों छात्रों द्वारा पेपर लीक के विरुद्ध चलाए गए आंदोलन की आज जीत हुई है। उनके अनुसार इस आंदोलन ने देश की शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग रखी, ऐसे समय में जब — उनके शब्दों में — मोदी सरकार बार-बार जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही थी।
गहलोत ने आगे कहा कि जनता के भारी दबाव के कारण अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कार्रवाई करने पर विवश होना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री ने लंबे समय तक उनका बचाव किया, लेकिन जनता की जवाबदेही की माँग के आगे वे उन्हें बचा नहीं सके।'
राहुल गांधी के बयान का संदर्भ
गहलोत ने उल्लेख किया कि उसी दिन सुबह राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाना चाहिए। गहलोत के अनुसार, छात्रों और उनकी आकांक्षाओं के प्रति राहुल गांधी के अटूट समर्थन ने इस आंदोलन को निर्णायक मजबूती दी।
छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई की याद
गहलोत ने पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश प्रदर्शनकारी छात्रों पर पेलेट गन और आँसू गैस के इस्तेमाल को नहीं भूला है। उनके अनुसार, राहुल गांधी के साथ छात्र समर्थन में खड़े होने के दौरान हुई कथित बदसलूकी भी लोकतांत्रिक असहमति को दबाने के प्रयास की याद दिलाती है।
आगे का संघर्ष जारी रहेगा
गहलोत ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा संघर्ष का अंत नहीं है। उन्होंने कहा, 'भारत की जनता उस सरकार को कभी माफ नहीं करेगी जिसने लाखों युवा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।' उनके अनुसार, यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक हर प्रभावित छात्र को न्याय नहीं मिलता, दोषियों को सजा नहीं होती और भारत की शिक्षा प्रणाली की गरिमा पूरी तरह बहाल नहीं होती।