पेपर लीक प्रदर्शन: राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, 'छात्रों पर पैलेट गन चलाई, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 24 जुलाई को पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग किया गया, जिसमें कई छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं। यह आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब देशभर में पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन तेज़ हो रहा है।
पैलेट गन के आरोप
राहुल गांधी ने दावा किया कि जब युवा हाथों में तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन पर पैलेट गन से हमला किया गया। उन्होंने कहा, 'जब यह युवा हाथों में हिंदुस्तान का तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था, तब इसे पैलेट गन से मारा गया। सरकार कहती है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ, लेकिन सच्चाई सबके सामने है।' सरकार ने इन आरोपों को अभी तक सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।
घायल छात्र की आँख पर चिंता
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पैलेट गन के हमले में एक छात्र की आँख गंभीर रूप से घायल हो गई और उसकी दृष्टि चली गई है। उन्होंने कहा, 'मैं पक्के तौर पर यह भी नहीं कह सकता कि इस युवा की आँखों की रोशनी बच पाएगी या नहीं।' गौरतलब है कि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
शिक्षा मंत्री पर सीधा हमला
राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान एक आपराधिक शिक्षा मंत्री हैं। उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए। वह देश की शिक्षा व्यवस्था के पतन का प्रतीक हैं। आज हजारों लोग सड़कों पर हैं, इसके लिए वही जिम्मेदार हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश के भविष्य पर हमला किया है।
छात्रों की तीन प्रमुख मांगें
राहुल गांधी के अनुसार प्रदर्शनकारी छात्रों की तीन मुख्य मांगें हैं — पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें; दूसरी, छात्रों पर कथित बर्बरता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो; और तीसरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों और देश से सार्वजनिक माफी माँगें।
सरकार से अपील
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से स्पष्ट अपील की कि वह छात्रों को डराना-धमकाना और उनके साथ मारपीट करना बंद करे, तथा उनकी माँगों पर गंभीरता से विचार करते हुए उन्हें पूरा करे। यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब पेपर लीक के मामले में सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और छात्र आंदोलन की दिशा इस मुद्दे का राजनीतिक रूप तय करेगी।