26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष बोला — 'जेन-जी की जीत, छात्रों का संघर्ष रंग लाया'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष बोला — 'जेन-जी की जीत, छात्रों का संघर्ष रंग लाया'

सारांश

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने इसे जेन-जी और छात्रों की जीत बताया। कांग्रेस से BJD तक सभी ने पेपर लीक पर जवाबदेही, छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और प्रधानमंत्री से माफी की माँग उठाई — यह आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ।

मुख्य बातें

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को विपक्षी दलों ने जेन-जी और छात्रों की जीत बताया।
सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी।
दीपक बैज (छत्तीसगढ़ कांग्रेस) ने इस्तीफे को 'दबाव में लिया गया फैसला' बताया, लाठीचार्ज की निंदा की।
देवेंद्र यादव (दिल्ली कांग्रेस) ने पेपर लीक रोकने, छात्रों पर मुकदमे वापस लेने और PM मोदी से माफी की माँग की।
BJD सांसद सुलता देव के अनुसार सरकार के 12 वर्षों में 124 पेपर लीक हुए, किसी पर चार्जशीट नहीं।
राहुल गांधी ने इस लड़ाई के लिए छात्रों और युवाओं को धन्यवाद दिया।

नई दिल्ली, 26 जुलाईकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को विपक्षी दलों ने 'जेन-जी की जीत' करार दिया है। सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। जंतर-मंतर पर हफ्तों से धरना दे रहे छात्रों की माँगों के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रधान का इस्तीफा नैतिक आधार पर नहीं, बल्कि दबाव में आकर दिया गया। उन्होंने कहा, 'देश के युवा अपने भविष्य, अधिकारों और हक के लिए जंतर-मंतर पर सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे — यह युवाओं की जीत है।' बैज ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को गलत बताते हुए कहा कि इस कार्रवाई की जितनी निंदा की जाए, कम है। उन्होंने यह भी बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी युवाओं और छात्रों को इस लड़ाई के लिए धन्यवाद दिया है।

दिल्ली कांग्रेस की माँगें

दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इस्तीफे को 'लंबी लड़ाई का पहला पड़ाव' बताया। उन्होंने माँग की कि अब छात्रों की जरूरतों पर ध्यान दिया जाए, पेपर लीक रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएँ और छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएँ। यादव ने कहा, 'पेपर लीक से दुखी होकर कई छात्रों ने अपनी जान गंवाई, दिल्ली में उन पर लाठीचार्ज किया गया — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माफी माँगनी चाहिए।' उन्होंने नवनियुक्त प्रभारी मंत्री प्रह्लाद जोशी से छात्र हित में काम करने की अपेक्षा जताई।

बीजेडी सांसद का बयान

बीजू जनता दल (BJD) की सांसद सुलता देव ने कहा, 'यह जेन-जी की जीत है, छात्रों की जीत है और लोकतंत्र की जीत है। जेन-जी ने सरकार को मजबूर कर दिया, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।' उन्होंने जंतर-मंतर पर चले छात्र आंदोलन को 'क्रांतिकारी' बताते हुए कहा कि वहाँ 'वंदे मातरम्' के नारे गूँज रहे थे, फिर भी सरकार ने उनकी आवाज़ नहीं सुनी। उन्होंने इस भावना की तुलना 'भारत छोड़ो आंदोलन' से की।

पेपर लीक पर गंभीर आरोप

सुलता देव ने आरोप लगाया कि इस सरकार के 12 वर्षों के शासन में 124 पेपर लीक हो चुके हैं। उनके अनुसार, आज तक किसी के विरुद्ध चार्जशीट फ्रेम नहीं हुई और न ही किसी की जवाबदेही तय कर जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि कई बच्चों ने आत्महत्या कर ली, और पाठ्यपुस्तकों में हजारों गलतियाँ होने के बावजूद उन पर ध्यान नहीं दिया गया। गौरतलब है कि ये आँकड़े सांसद के बयान पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।

आगे की राह

विपक्षी दलों ने एकजुट होकर माँग की है कि नए प्रभारी मंत्री प्रह्लाद जोशी पेपर लीक पर ठोस कार्रवाई करें, छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लें और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करें। यह देखना होगा कि सरकार इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक है या संरचनात्मक भी। BJD सांसद का '124 पेपर लीक और शून्य चार्जशीट' का दावा — अगर सत्यापित हो — तो यह महज मंत्री-परिवर्तन से कहीं बड़ी जवाबदेही की माँग करता है। विपक्ष की एकजुटता प्रभावशाली दिखती है, लेकिन उनकी माँगें — मुकदमे वापसी, माफी, पेपर लीक पर कार्रवाई — के लिए कोई समयसीमा नहीं है। प्रह्लाद जोशी के पास अब अवसर है कि वे ठोस कदम उठाकर इस आंदोलन की आग को शांत करें, वरना छात्रों का गुस्सा फिर सड़कों पर उतर सकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?
विपक्षी नेताओं के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नैतिक आधार पर नहीं, बल्कि जंतर-मंतर पर लगातार चले छात्र आंदोलन के दबाव में आकर दिया गया। पेपर लीक विवाद और छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद यह दबाव लगातार बढ़ रहा था।
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी क्यों दी गई?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। विपक्ष ने उनसे उम्मीद जताई है कि वे पेपर लीक रोकने और छात्र हित में ठोस कदम उठाएँगे।
जेन-जी आंदोलन की मुख्य माँगें क्या थीं?
छात्रों की मुख्य माँगें थीं — पेपर लीक पर प्रभावी रोक, आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेना, और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई। विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी से सार्वजनिक माफी की भी माँग की है।
पेपर लीक को लेकर क्या आरोप लगाए गए हैं?
BJD सांसद सुलता देव ने दावा किया कि सरकार के 12 वर्षों के शासन में 124 पेपर लीक हो चुके हैं और आज तक किसी के विरुद्ध चार्जशीट फ्रेम नहीं हुई। यह आँकड़ा उनके बयान पर आधारित है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।
राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन पर क्या कहा?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस लड़ाई के लिए युवाओं और छात्रों को धन्यवाद दिया। कांग्रेस ने इस्तीफे को छात्र आंदोलन की आंशिक जीत बताते हुए आगे और माँगें पूरी करने का दबाव बनाए रखा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. कल
  4. कल
  5. कल
  6. कल
  7. कल
  8. 6 दिन पहले