नीट पेपर लीक: AAP के अनुराग ढांडा ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा, बोले — बिना जवाबदेही बातचीत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय मीडिया इंचार्ज अनुराग ढांडा ने 22 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की माँग दोहराई और स्पष्ट किया कि नीट पेपर लीक विवाद पर जवाबदेही तय हुए बिना किसी भी बातचीत का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र अपने भविष्य को लेकर एकजुट हैं और यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का अभियान नहीं है।
मुख्य माँग: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
ढांडा ने कहा, 'सरकार ने शुरुआत में छात्र आंदोलन को दबाने और बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। अब यह आंदोलन केवल छात्रों के मुद्दों पर केंद्रित है और उनकी माँग है कि नीट पेपर लीक विवाद की जिम्मेदारी तय की जाए।' उन्होंने आगे कहा, 'यदि सरकार नहीं चाहती कि देश का युवा उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए तो उन्हें जल्द से जल्द शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए।'
चर्चा की पेशकश पर सवाल
केंद्र सरकार की ओर से संवाद की पेशकश को AAP नेता ने अपर्याप्त बताया। ढांडा ने कहा, 'देश में लगातार पेपर लीक की घटनाएँ सामने आई हैं और ऐसे में केवल चर्चा करने के बजाय जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।' उनके अनुसार कई मामलों में सरकारी कार्रवाई प्रभावी नहीं रही और शिक्षा मंत्रालय में जवाबदेही सुनिश्चित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
आंदोलन की प्रकृति: राजनीतिक नहीं, छात्र-नेतृत्व
ढांडा ने जोर देकर कहा कि नीट विवाद को लेकर चल रहा आंदोलन किसी राजनीतिक दल द्वारा शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'यह आंदोलन न तो किसी राजनीतिक दल का अभियान है और न ही मीडिया द्वारा बनाया गया मुद्दा है।' उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में मीडिया ने भी इस आंदोलन को पर्याप्त जगह नहीं दी, फिर भी छात्रों की आवाज लगातार मजबूत होती गई।
सभी दलों से अपील
AAP नेता ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में जनता की आवाज को महत्व देना पड़ता है। किसी भी सरकार को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि वह जनता से ऊपर है।' उनके अनुसार जो भी राजनीतिक दल या संगठन छात्रों के साथ खड़ा होना चाहता है, उसे उनकी माँगों का समर्थन करना चाहिए।
आगे की स्थिति
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद ने देशभर में शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े किए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर छात्र समुदाय में व्यापक असंतोष है। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और शिक्षा मंत्रालय के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।