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मसूरी गोलीकांड स्मृति दिवस: CM धामी ने वर्चुअल श्रद्धांजलि दी, बोले- बलिदान को पीढ़ियाँ याद रखेंगी

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मसूरी गोलीकांड स्मृति दिवस: CM धामी ने वर्चुअल श्रद्धांजलि दी, बोले- बलिदान को पीढ़ियाँ याद रखेंगी

सारांश

मसूरी गोलीकांड के शहीदों की याद में आयोजित स्मृति सभा में CM धामी खटीमा में तेज बारिश के कारण पहुँच नहीं सके और वर्चुअल माध्यम से श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बेलमती चौहान सहित छह शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य इन्हीं बलिदानों की नींव पर खड़ा है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 सितंबर को मसूरी गोलीकांड के शहीदों को वर्चुअल माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।
खटीमा में सुबह 8:30 बजे से तेज बारिश के कारण वह मसूरी में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके।
धामी ने शहीदों बेलमती चौहान , हंसा धनाई , बलबीर सिंह नेगी , धनपत सिंह , राय सिंह बंगारी और मनमोहन ममगाईं को नमन किया।
डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी को भी कर्तव्य पालन में प्राण देने के लिए भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
CM ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है और आने वाली पीढ़ियाँ इसे याद रखेंगी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 सितंबर को मसूरी गोलीकांड के शहीदों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया और उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सभी ज्ञात-अज्ञात शहीदों को नमन किया। खटीमा में तेज बारिश के कारण वह मसूरी में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती उन वीर आंदोलनकारियों के बलिदान की सदा ऋणी रहेगी।

मुख्य घटनाक्रम

मसूरी में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि वह पिछले पाँच वर्षों से लगातार इस स्मृति दिवस पर मसूरी पहुँचकर शहीदों को श्रद्धांजलि देते रहे हैं। इस बार खटीमा में सुबह करीब 8:30 बजे से लगातार तेज बारिश होने के कारण वह 10:30 बजे तक मसूरी नहीं पहुँच सके। उन्होंने स्वीकार किया कि लगातार पाँच वर्षों तक उपस्थित रहने के बाद इस बार कार्यक्रम में न पहुँच पाना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से दुखद रहा।

गोलीकांड की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके विरोध में मसूरी में भी आंदोलन हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग उत्तराखंड राज्य की माँग को लेकर आंदोलनकारी पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे — उनके पास न कोई हथियार था, न हिंसा का कोई भाव। आंदोलनकारियों के सामने केवल एक बेहतर और स्वायत्त उत्तराखंड का स्वप्न था। धामी ने कहा कि तत्कालीन व्यवस्था ने इस लोकतांत्रिक आवाज़ को गोलियों से दबाने का प्रयास किया।

शहीदों को नमन

मुख्यमंत्री ने अमर बलिदानी बेलमती चौहान, हंसा धनाई, बलबीर सिंह नेगी, धनपत सिंह, राय सिंह बंगारी और मनमोहन ममगाईं को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इसके साथ ही उन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान प्राण गँवाने वाले डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन बलिदानों ने अलग राज्य के आंदोलन को नई शक्ति, दिशा और संघर्ष का बल दिया।

आम जनता और भावी पीढ़ियों पर असर

धामी ने शहीदों के परिजनों और कार्यक्रम में उपस्थित आंदोलनकारियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य आंदोलन के इन बलिदानों को आने वाली पीढ़ियाँ भी याद रखेंगी। उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण इन्हीं आंदोलनकारियों के संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान का परिणाम है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे करने की ओर अग्रसर है और शहीदों की विरासत को संजोने की माँग समाज में लगातार उठती रही है।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि हर वर्ष इस स्मृति दिवस पर राज्य सरकार और आंदोलनकारी संगठन मिलकर शहीदों को याद करते हैं। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि शहीदों की स्मृतियाँ उत्तराखंड की अस्मिता और स्वाभिमान से सदा जुड़ी रहेंगी और राज्य सरकार इस परंपरा को आगे भी जारी रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि श्रद्धांजलि की रस्म से आगे शहीदों के परिजनों के लिए ठोस कदम कितने उठाए गए हैं। धामी का पाँच वर्षों से लगातार इस कार्यक्रम में उपस्थित रहना राजनीतिक प्रतिबद्धता का संकेत है, पर आलोचकों का कहना है कि स्मृति संरक्षण और शहीद परिवारों के कल्याण की नीतियाँ अभी भी अधूरी हैं। उत्तराखंड राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने के करीब, यह अवसर केवल भावनात्मक श्रद्धांजलि का नहीं, बल्कि उन वादों के मूल्यांकन का भी है जो राज्य स्थापना के साथ किए गए थे।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मसूरी गोलीकांड क्या था?
मसूरी गोलीकांड उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुई वह घटना थी जिसमें अलग राज्य की माँग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर गोलियाँ चलाई गई थीं। इस घटना में बेलमती चौहान, हंसा धनाई सहित कई आंदोलनकारी शहीद हुए थे।
CM धामी मसूरी स्मृति दिवस पर क्यों नहीं पहुँच सके?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा में 2 सितंबर की सुबह 8:30 बजे से हो रही तेज बारिश के कारण 10:30 बजे तक मसूरी नहीं पहुँच सके। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की और व्यक्तिगत रूप से न पहुँच पाने का खेद व्यक्त किया।
मसूरी गोलीकांड में किन शहीदों को याद किया गया?
इस वर्ष के स्मृति दिवस पर CM धामी ने बेलमती चौहान, हंसा धनाई, बलबीर सिंह नेगी, धनपत सिंह, राय सिंह बंगारी और मनमोहन ममगाईं को श्रद्धांजलि दी। कर्तव्य पालन के दौरान प्राण गँवाने वाले डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी को भी नमन किया गया।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन का मसूरी गोलीकांड से क्या संबंध है?
खटीमा गोलीकांड के विरोध में मसूरी में भी आंदोलन भड़का था, जहाँ अलग राज्य की माँग कर रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई गई थीं। CM धामी के अनुसार इन बलिदानों ने राज्य आंदोलन को नई दिशा और शक्ति दी, जो अंततः उत्तराखंड राज्य के गठन में परिणत हुई।
CM धामी ने शहीदों के बलिदान के बारे में क्या कहा?
CM धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण इन्हीं आंदोलनकारियों के संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि शहीदों की स्मृतियाँ राज्य की अस्मिता और स्वाभिमान से सदा जुड़ी रहेंगी और आने वाली पीढ़ियाँ भी इन बलिदानों को याद रखेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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