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जीडीपी विवाद पर पीयूष गोयल का पलटवार: 'आंकड़े तोड़ने से सच नहीं छुपता', सरकार ने संशोधन को सही ठहराया

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जीडीपी विवाद पर पीयूष गोयल का पलटवार: 'आंकड़े तोड़ने से सच नहीं छुपता', सरकार ने संशोधन को सही ठहराया

सारांश

जीडीपी आंकड़ों में हेरफेर के विपक्षी आरोपों पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पलटवार किया। सरकार ने ₹86 लाख करोड़ से ₹80 लाख करोड़ के संशोधन को आधार वर्ष बदलाव की मानक प्रक्रिया बताया — लेकिन पारदर्शिता का सवाल बरकरार है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 2 सितंबर को जीडीपी आंकड़ों पर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।
विपक्ष का दावा: ₹86 लाख करोड़ को ₹80 लाख करोड़ में संशोधित किया गया, जिससे बिना संशोधन के वृद्धि दर केवल 2.6% दिखती।
सरकार का जवाब: नई जीडीपी श्रृंखला 2022-23 आधार वर्ष पर है; पुरानी श्रृंखला ( 2011-12 आधार) से सीधी तुलना सांख्यिकीय दृष्टि से अनुचित।
गोयल ने निर्यात में ~15% वृद्धि और स्टील, सीमेंट, ऑटोमोबाइल क्षेत्रों के अच्छे प्रदर्शन को अर्थव्यवस्था की मज़बूती का प्रमाण बताया।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने औपचारिक बयान जारी कर आंकड़ों की पद्धति स्पष्ट की।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार, 2 सितंबर को विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया जिनमें जीडीपी आंकड़ों में हेरफेर का दावा किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया वर्षों से स्थापित एक स्वतंत्र व्यवस्था के तहत चलती है, जिसमें राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। गोयल ने कहा, 'आंकड़ों को तोड़-मरोड़कर पेश करने से सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता।'

मुख्य घटनाक्रम

ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) के एक कार्यक्रम की साइडलाइन में मीडिया से बातचीत करते हुए गोयल ने कहा कि जीडीपी आंकड़ों पर नकारात्मकता फैलाना 'अपनेआप को छोटा करना' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये आंकड़े किसी सरकार का नहीं, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के परिश्रम और सामर्थ्य का प्रतिबिंब हैं। उनके अनुसार, इस तरह की नकारात्मक सोच 'जनता के हौसले को तोड़ने की कोशिश' है।

अर्थव्यवस्था की मज़बूती के संकेत

गोयल ने देश के औद्योगिक प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि स्टील, सीमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र मज़बूती से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि निर्यात में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनियों ने अच्छी आय वृद्धि रिपोर्ट की है। उनके अनुसार ये सभी संकेत देश में मज़बूत घरेलू माँग की पुष्टि करते हैं।

सरकार का तकनीकी स्पष्टीकरण

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े को बेहतर दिखाने के लिए पिछले वर्ष की पहली तिमाही की चालू जीडीपी को ₹86 लाख करोड़ से घटाकर ₹80 लाख करोड़ कर दिया गया। विपक्ष का तर्क था कि यदि यह संशोधन न किया जाता, तो चालू कीमतों पर जीडीपी वृद्धि दर केवल 2.6 प्रतिशत होती।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि 2026-27 की पहली तिमाही का जीडीपी अनुमान 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई श्रृंखला के आधार पर तैयार किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, इस नई श्रृंखला के आंकड़ों की तुलना पुरानी श्रृंखला — जो 2011-12 आधार वर्ष पर आधारित थी — के ₹86 लाख करोड़ के आंकड़े से करना सांख्यिकीय दृष्टि से गलत है। सही तुलना केवल नई श्रृंखला के ₹80 लाख करोड़ के आंकड़े से ही संभव है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

गौरतलब है कि आधार वर्ष में बदलाव एक मानक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जो समय-समय पर अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना को प्रतिबिंबित करने के लिए अपनाई जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है। आलोचकों का कहना है कि आधार वर्ष परिवर्तन की समयसीमा और उसकी पारदर्शिता पर अधिक स्पष्टता ज़रूरी है।

आगे क्या होगा

सरकार और विपक्ष के बीच जीडीपी पद्धति को लेकर यह बहस आगामी संसद सत्र में भी गूंजने की संभावना है। सांख्यिकी मंत्रालय से अपेक्षा है कि वह नई और पुरानी श्रृंखलाओं के बीच तुलनीयता पर विस्तृत तकनीकी दस्तावेज़ सार्वजनिक करे, ताकि इस विवाद का समाधान हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी समयसीमा और संचार की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है — खासकर तब जब यह बदलाव एक नई तिमाही के आंकड़े जारी होने के साथ-साथ आया। सरकार का बचाव मज़बूत है, परंतु 'विश्वास करो' कहने की बजाय सांख्यिकी मंत्रालय को पुरानी और नई श्रृंखलाओं के बीच पूरी बैक-सीरीज़ सार्वजनिक करनी चाहिए थी। निर्यात वृद्धि और औद्योगिक प्रदर्शन के आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन पद्धतिगत विवाद को राजनीतिक बयानबाज़ी से नहीं, बल्कि डेटा की खुली उपलब्धता से ही सुलझाया जा सकता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने जीडीपी विवाद पर क्या कहा?
गोयल ने कहा कि आंकड़े एकत्र करने की व्यवस्था वर्षों से चली आ रही स्वतंत्र प्रक्रिया है जिसमें राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने विपक्ष पर 'आंकड़े तोड़-मरोड़कर' जनता का मनोबल तोड़ने का आरोप लगाया।
जीडीपी आंकड़ों में ₹86 लाख करोड़ से ₹80 लाख करोड़ का संशोधन क्यों किया गया?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, 2026-27 की पहली तिमाही का जीडीपी अनुमान नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) पर आधारित है। पुरानी श्रृंखला (आधार वर्ष 2011-12) का ₹86 लाख करोड़ का आंकड़ा अलग पद्धति से निकाला गया था, इसलिए दोनों की सीधी तुलना सांख्यिकीय दृष्टि से सही नहीं है।
विपक्ष का जीडीपी आंकड़ों पर क्या आरोप था?
विपक्ष का आरोप था कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़े बेहतर दिखाने के लिए पिछले वर्ष की चालू जीडीपी को जानबूझकर ₹86 लाख करोड़ से घटाकर ₹80 लाख करोड़ किया गया। उनके अनुसार, बिना इस संशोधन के चालू कीमतों पर वृद्धि दर केवल 2.6% होती।
भारत में जीडीपी आधार वर्ष बदलने की प्रक्रिया क्या होती है?
जीडीपी आधार वर्ष बदलना एक मानक सांख्यिकीय प्रक्रिया है जो अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए समय-समय पर की जाती है। भारत में यह कार्य सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन करता है और इसमें पुरानी श्रृंखला के आंकड़ों को नए आधार पर पुनर्गणना की जाती है।
गोयल ने अर्थव्यवस्था की मज़बूती के क्या संकेत गिनाए?
गोयल ने कहा कि स्टील, सीमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल उद्योग अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा निर्यात में करीब 15% की वृद्धि और कंपनियों की एक्सचेंज फाइलिंग में मज़बूत आय वृद्धि को उन्होंने देश में मज़बूत घरेलू माँग का प्रमाण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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