जीडीपी विवाद पर पीयूष गोयल का पलटवार: 'आंकड़े तोड़ने से सच नहीं छुपता', सरकार ने संशोधन को सही ठहराया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार, 2 सितंबर को विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया जिनमें जीडीपी आंकड़ों में हेरफेर का दावा किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया वर्षों से स्थापित एक स्वतंत्र व्यवस्था के तहत चलती है, जिसमें राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। गोयल ने कहा, 'आंकड़ों को तोड़-मरोड़कर पेश करने से सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता।'
मुख्य घटनाक्रम
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) के एक कार्यक्रम की साइडलाइन में मीडिया से बातचीत करते हुए गोयल ने कहा कि जीडीपी आंकड़ों पर नकारात्मकता फैलाना 'अपनेआप को छोटा करना' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये आंकड़े किसी सरकार का नहीं, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के परिश्रम और सामर्थ्य का प्रतिबिंब हैं। उनके अनुसार, इस तरह की नकारात्मक सोच 'जनता के हौसले को तोड़ने की कोशिश' है।
अर्थव्यवस्था की मज़बूती के संकेत
गोयल ने देश के औद्योगिक प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि स्टील, सीमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र मज़बूती से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि निर्यात में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनियों ने अच्छी आय वृद्धि रिपोर्ट की है। उनके अनुसार ये सभी संकेत देश में मज़बूत घरेलू माँग की पुष्टि करते हैं।
सरकार का तकनीकी स्पष्टीकरण
विपक्ष ने आरोप लगाया था कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े को बेहतर दिखाने के लिए पिछले वर्ष की पहली तिमाही की चालू जीडीपी को ₹86 लाख करोड़ से घटाकर ₹80 लाख करोड़ कर दिया गया। विपक्ष का तर्क था कि यदि यह संशोधन न किया जाता, तो चालू कीमतों पर जीडीपी वृद्धि दर केवल 2.6 प्रतिशत होती।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि 2026-27 की पहली तिमाही का जीडीपी अनुमान 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई श्रृंखला के आधार पर तैयार किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, इस नई श्रृंखला के आंकड़ों की तुलना पुरानी श्रृंखला — जो 2011-12 आधार वर्ष पर आधारित थी — के ₹86 लाख करोड़ के आंकड़े से करना सांख्यिकीय दृष्टि से गलत है। सही तुलना केवल नई श्रृंखला के ₹80 लाख करोड़ के आंकड़े से ही संभव है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि आधार वर्ष में बदलाव एक मानक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जो समय-समय पर अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना को प्रतिबिंबित करने के लिए अपनाई जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है। आलोचकों का कहना है कि आधार वर्ष परिवर्तन की समयसीमा और उसकी पारदर्शिता पर अधिक स्पष्टता ज़रूरी है।
आगे क्या होगा
सरकार और विपक्ष के बीच जीडीपी पद्धति को लेकर यह बहस आगामी संसद सत्र में भी गूंजने की संभावना है। सांख्यिकी मंत्रालय से अपेक्षा है कि वह नई और पुरानी श्रृंखलाओं के बीच तुलनीयता पर विस्तृत तकनीकी दस्तावेज़ सार्वजनिक करे, ताकि इस विवाद का समाधान हो सके।