जीडीपी वृद्धि दर 2.6% के दावे को केंद्र ने नकारा, नई बेस सीरीज से तुलना अनुचित: सांख्यिकी मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2 सितंबर 2026 को उन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज किया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़ों को बेहतर दिखाने के लिए पिछले वर्ष की चालू जीडीपी को ₹86 लाख करोड़ से घटाकर ₹80 लाख करोड़ किया गया। मंत्रालय ने कहा कि यह संशोधन किसी हेरफेर का नतीजा नहीं, बल्कि 2022-23 को नए आधार वर्ष मानकर तैयार की गई नई जीडीपी सीरीज का स्वाभाविक परिणाम है।
विवाद की पृष्ठभूमि
कुछ आर्थिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों ने दावा किया था कि यदि 2025-26 की पहली तिमाही के आंकड़े को ₹86 लाख करोड़ पर ही रखा जाता, तो चालू कीमतों पर जीडीपी की वृद्धि दर मात्र 2.6 प्रतिशत रह जाती। इस दावे ने राजनीतिक और आर्थिक हलकों में हलचल मचा दी थी।
सरकार का स्पष्टीकरण
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी अनुमान 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई सीरीज के तहत तैयार किए गए हैं। इसलिए इन आंकड़ों की तुलना पुरानी सीरीज के ₹86 लाख करोड़ के आंकड़े से करना सांख्यिकीय दृष्टि से सही नहीं है, क्योंकि वह पुराना आंकड़ा 2011-12 आधार वर्ष पर आधारित था। सही और तुलनीय आधार नई सीरीज का ₹80 लाख करोड़ का आंकड़ा है।
तकनीकी पद्धति का विवरण
मंत्रालय ने बताया कि तिमाही जीडीपी अनुमान 'बेंचमार्क-इंडिकेटर' पद्धति से तैयार किए जाते हैं। इस पद्धति में 100 से अधिक वॉल्यूम और वैल्यू इंडिकेटर्स का उपयोग होता है — जैसे फसल उत्पादन में वृद्धि, सीमेंट उत्पादन सूचकांक, तैयार स्टील की खपत और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री। पिछले वर्ष के बेंचमार्क में बदलाव से चालू वर्ष की वास्तविक आर्थिक गतिविधि या अनुमान-संकेतकों में कोई कृत्रिम वृद्धि नहीं होती।
आर्थिक संदर्भ और महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की जीडीपी वृद्धि दर वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निगरानी में है। गौरतलब है कि आधार वर्ष में बदलाव एक नियमित सांख्यिकीय प्रक्रिया है — भारत इससे पहले 2004-05 से 2011-12 पर स्थानांतरित हो चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, दो अलग-अलग बेस सीरीज के आंकड़ों की सीधी तुलना भ्रामक निष्कर्षों की ओर ले जा सकती है।
आगे की स्थिति
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जीडीपी सीरीज में किए गए ये बदलाव पद्धतिगत और डेटा-संबंधी निरंतर सुधारों का हिस्सा हैं। विश्लेषकों का कहना है कि नई सीरीज के तहत आने वाले तिमाही आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था की अधिक सटीक और अद्यतन तस्वीर प्रस्तुत करेंगे।