भारत की GDP वृद्धि दर FY2025-26 में 7.7%, वैश्विक अस्थिरता के बीच मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज का दमदार प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 5 जून 2026 को जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, भारत की रियल जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत रही — जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के अंतिम आँकड़े 7.1 प्रतिशत से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। यह तेज़ी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के दौर से गुज़र रही है।
मुख्य आँकड़े एक नज़र में
मंत्रालय के डेटा के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत रही। इसी अवधि में रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 7.9 प्रतिशत और नॉमिनल GVA में 9.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ये आँकड़े नए आधार वर्ष 2022-23 के आधार पर जारी किए गए हैं, जिसे केंद्र सरकार ने 27 फरवरी 2026 को अपनाया था — पहले यह 2011-12 था।
द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र की अगुवाई
विकास की इस रफ़्तार में द्वितीयक क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग) और तृतीयक क्षेत्र (सर्विसेज) की भूमिका सबसे बड़ी रही। स्थिर कीमतों पर इन दोनों की वृद्धि दर क्रमश: 8.8 प्रतिशत और 9.3 प्रतिशत रही। विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन, ब्रॉडकास्टिंग, स्टोरेज, फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में स्थिर और मौजूदा — दोनों कीमतों पर — वृद्धि दर दोहरे अंकों में रही।
वहीं, प्राथमिक क्षेत्र — जिसमें कृषि और मत्स्य पालन शामिल हैं — की वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम, 3.2 प्रतिशत, रही। यह संकेत देता है कि ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था की रफ़्तार अभी भी औद्योगिक और सेवा क्षेत्र से पीछे है।
चौथी तिमाही का प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च 2026) में देश की रियल जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत और नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 9.1 प्रतिशत रही। इस तिमाही में रियल GVA 7.9 प्रतिशत और नॉमिनल GVA 9.9 प्रतिशत की दर से बढ़ा। द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र की वृद्धि दर इस तिमाही में क्रमश: 7.9 प्रतिशत और 9.9 प्रतिशत रही।
नया आधार वर्ष: क्या बदला
सरकार ने इस बार पहली बार नए आधार वर्ष 2022-23 के आधार पर जीडीपी डेटा प्रकाशित किया है। यह बदलाव आँकड़ों की तुलनात्मकता और सटीकता को बेहतर बनाने के लिए ज़रूरी था, क्योंकि पुराना आधार वर्ष 2011-12 भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना को सटीक रूप से नहीं दर्शाता था।
वैश्विक संदर्भ में भारत की स्थिति
गौरतलब है कि यह वृद्धि दर ऐसे वैश्विक माहौल में हासिल हुई है जहाँ अमेरिका-ईरान तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मंदी की आशंका बनी हुई है। आँकड़ों के अनुसार, भारत इस समय दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार बना हुआ है। आने वाली तिमाहियों में घरेलू खपत और सरकारी पूँजीगत व्यय की दिशा यह तय करेगी कि यह गति बरकरार रहती है या नहीं।