भारत की GDP वृद्धि दर Q1 FY27 में 7.8%, घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र बने इंजन: इंडस्ट्री चैम्बर्स
सारांश
मुख्य बातें
भारत की रियल जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही, जो एक वर्ष पूर्व की 6.9 प्रतिशत की दर से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। इंडस्ट्री चैम्बर्स ने 31 अगस्त को इस आँकड़े का स्वागत करते हुए कहा कि यह विस्तार मजबूत घरेलू मांग, औद्योगिक क्षेत्र की सुदृढ़ता, बढ़ते निवेश और तेज़ी से उभरते सेवा क्षेत्र की बदौलत संभव हुआ है।
जीडीपी के प्रमुख आँकड़े
स्थिर कीमतों पर पहली तिमाही में रियल जीडीपी ₹81.36 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह ₹75.46 लाख करोड़ थी — यानी एक वर्ष में ₹5.9 लाख करोड़ की बढ़ोतरी। सेवा क्षेत्र ने स्थिर कीमतों पर 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसमें वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी और पेशेवर सेवाओं ने 12.1 प्रतिशत की छलांग लगाई। निर्माण क्षेत्र में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि भी उत्साहजनक रही।
औद्योगिक और बुनियादी ढाँचा संकेतक
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जूनजा ने बताया कि पहली तिमाही में सीमेंट उत्पादन सूचकांक में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आईआईपी इन्फ्रास्ट्रक्चर और निर्माण वस्तुओं में 7.2 प्रतिशत तथा आईआईपी बिजली में 9.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मांग संकेतकों की बात करें तो यात्री परिवहन वाहनों के पंजीकरण में 13.9 प्रतिशत और माल परिवहन वाहनों के पंजीकरण में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि रही — जो उपभोक्ता और कारोबारी विश्वास दोनों की मज़बूती का संकेत है।
निर्यात में उछाल
बाह्य क्षेत्र में भी उत्साहजनक तस्वीर रही। वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में सालाना आधार पर 25.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि परिवहन वस्तुओं के निर्यात में 52.2 प्रतिशत की असाधारण बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों ने सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, डिजिटलाइज़ेशन, सेवा निर्यात और वित्तीय क्षेत्र की बेहतर होती बैलेंस शीट को इस उछाल का प्रमुख आधार बताया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा ने कहा कि यदि नीतिगत सुधार निजी निवेश को बढ़ावा देने और विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सफल रहते हैं, तो भारत मध्यम अवधि में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर बनाए रख सकता है।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, 'मजबूत जीडीपी वृद्धि अर्थव्यवस्था में चक्रीय तेज़ी की पुष्टि करती है, जो कॉरपोरेट आय सहित व्यापक स्तर के उच्च-आवृत्ति वाले संकेतकों में भी दिखाई दे रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व संकट के बावजूद गतिविधियों का स्तर मजबूत बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि कंपनियाँ बढ़ी हुई इनपुट लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्राहकों पर डालने में सक्षम रही हैं।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, 'तृतीयक क्षेत्र में 10 प्रतिशत और निर्माण क्षेत्र में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि बेहद उत्साहजनक है। यह संकेत देती है कि 7 प्रतिशत से अधिक की मजबूत वृद्धि की रफ्तार पूरे वित्त वर्ष में जारी रहेगी।'
आगे की राह
गौरतलब है कि यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ और मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, निजी निवेश को और गति देना तथा विनिर्माण क्षेत्र में रोज़गार सृजन सुनिश्चित करना आने वाली तिमाहियों की असली परीक्षा होगी। यदि मौजूदा नीतिगत गति बनी रही, तो पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में भारत 7 प्रतिशत से ऊपर की वृद्धि दर बनाए रख सकता है।