वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत में वस्तुओं की कर योग्य आपूर्ति 27% बढ़ी, सेवाएं भी 22.2% ऊपर
सारांश
मुख्य बातें
वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में भारत की घरेलू खपत और आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत बनी रहीं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, अप्रैल 2026 में वस्तुओं की कर योग्य आपूर्ति में 27 प्रतिशत और सेवाओं की कर योग्य आपूर्ति में 22.2 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो व्यापक-आधारित मांग का संकेत है। यह आँकड़े मई में दाखिल किए गए जीएसटी रिटर्न से सामने आए हैं।
वस्तु क्षेत्र में व्यापक वृद्धि
आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में वस्तुओं के सभी क्षेत्रों की कर योग्य आपूर्ति सालाना आधार पर 26.9 प्रतिशत बढ़कर ₹40.10 लाख करोड़ पहुँच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में ₹31.61 लाख करोड़ थी। उल्लेखनीय यह है कि सभी 27 कमोडिटी समूहों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज हुई — जो किसी एकल क्षेत्र की नहीं, बल्कि संपूर्ण अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
क्षेत्रवार देखें तो सोना और कीमती धातुओं से जुड़े क्षेत्रों में कर योग्य आपूर्ति 46.9 प्रतिशत बढ़ी। इलेक्ट्रिक मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में 34.1 प्रतिशत, तैयार खाद्य उत्पादों में 27.1 प्रतिशत, दूरसंचार उपकरणों में 24.6 प्रतिशत और यात्री वाहनों व बसों के क्षेत्र में 21.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कृषि, विनिर्माण, रसायन, धातु और उपभोक्ता वस्तुओं सहित लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में भी वृद्धि व्यापक रूप से देखी गई।
सेवा क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन
सेवा क्षेत्र ने भी उत्साहजनक प्रदर्शन किया। अप्रैल में सेवाओं की कर योग्य आपूर्ति सालाना आधार पर 22.2 प्रतिशत बढ़कर ₹11.50 लाख करोड़ हो गई, जो पिछले वर्ष ₹9.41 लाख करोड़ थी।
इस वृद्धि में सबसे तेज उछाल रियल एस्टेट सेवाओं में रहा, जहाँ 50 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। आवास, भोजन और पेय पदार्थ सेवाओं में 41.6 प्रतिशत और परिवहन, डाक व कूरियर सेवाओं में 21.3 प्रतिशत का विस्तार देखा गया। रियल एस्टेट, निर्माण, पेशेवर सेवाएं और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक रुझान बना रहा।
आयात और आईजीएसटी संग्रह में उछाल
मई में आयात पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) संग्रह में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स इस वृद्धि में सबसे बड़े योगदानकर्ता रहे — प्रोसेसिंग यूनिट्स के आयात में 387 प्रतिशत और मेमोरी चिप्स के आयात में 205 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि दर्ज की गई।
गौरतलब है कि अकेले कोयले का योगदान आईजीएसटी वृद्धि में 8 प्रतिशत से अधिक रहा, जो ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती औद्योगिक माँग को रेखांकित करता है।
आर्थिक संकेत और आगे की राह
वस्तुओं और सेवाओं — दोनों क्षेत्रों में एक साथ मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि घरेलू मांग में वृद्धि किसी एक उद्योग तक सीमित नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न स्तरों पर व्यापक रूप से दिखाई दे रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की घरेलू खपत को विकास का मुख्य इंजन माना जा रहा है। आने वाले महीनों के जीएसटी आँकड़े यह तय करेंगे कि यह गति टिकाऊ है या मौसमी कारकों से प्रेरित।