भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र, कर सुधारों से बढ़ा निवेशकों का विश्वास
सारांश
Key Takeaways
- भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र पर निर्भर है।
- कर सुधारों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।
- सेवाओं के निर्यात में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- विनिर्माण क्षेत्र में सालाना 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई।
- आर्थिक स्थिरता के लिए बुनियादी ढांचे का विकास आवश्यक है।
वाशिंगटन, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग, सेवाओं के निर्यात में लचीलापन और निरंतर सुधारों के आधार पर तेजी से प्रगति कर रही है। सेवा क्षेत्र भारतीय आर्थिक विकास का मुख्य आधार बना हुआ है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं और बढ़ते निवेश इस विकास को मजबूती दे रहे हैं। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं और बेहतर बुनियादी ढांचा उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुए हैं।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि निजी उपभोग यह वृद्धि सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण घटक बना हुआ है। कम महंगाई, कर प्रणाली में सुधार और उपभोक्ता विश्वास में वृद्धि के चलते खुदरा मांग स्थिर बनी हुई है। 2025 के अंत तक, उपभोक्ता विश्वास महामारी के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया था।
घरेलू मांग ने वस्तुओं के निर्यात में आई कमी की भरपाई करने में मदद की है। टैरिफ संबंधी व्यवधानों के चलते माल के शिपमेंट में मामूली वृद्धि हुई, पर सेवाओं का निर्यात मजबूत बना रहा, जिसमें हाल के महीनों में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
सूचना प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक सेवाओं की वृद्धि ने न केवल निर्यात आय को बढ़ाया, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी लाई है। विनिर्माण क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के नेतृत्व में 2023 से 2025 के बीच विनिर्माण में सालाना 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई।
यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम के साथ संभावित मुक्त व्यापार समझौतों से भारत के व्यापारिक परिदृश्य में और सुधार की संभावना है। इन समझौतों के लागू होने पर अधिकांश वस्तुओं पर शुल्क में कमी आएगी और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम जनता पर भी पड़ेगा, जिससे कम कीमतों और आय में वृद्धि के जरिए उपभोग में विस्तार की संभावना है।
आर्थिक स्थिरता भी भारत की मजबूती का एक प्रमुख कारक रही है। खाद्य कीमतों में कमी के चलते 2025 के दौरान महंगाई दर केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के भीतर बनी रही। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती से उपभोग और निवेश को बढ़ावा मिला है।
वित्तीय क्षेत्र भी स्थिर बना हुआ है, जहां बैंकों की पूंजी स्थिति मजबूत है और ऋण उपलब्धता में सुधार हुआ है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिला है।
विश्व बैंक ने कहा है कि बुनियादी ढांचे के विकास, कर सुधारों और वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाने जैसे संरचनात्मक सुधारों ने भारत की उत्पादकता और निवेशकों के भरोसे को बढ़ाया है।
रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों जैसे बाहरी जोखिमों के बावजूद, भारत की मजबूत घरेलू बुनियाद और सुधार की दिशा इसे विकास बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में रखती है।
हाल के वर्षों में भारत ने विकास पूर्वानुमानों से लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है, जो इसकी दृढ़ता और स्थिर नीतिगत समर्थन को दर्शाता है। दीर्घकाल में, निरंतर सुधार और निवेश इसकी आर्थिक प्रगति को और मजबूत कर सकते हैं।