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भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज: GDP 7.7%, GST संग्रह ₹1.95 लाख करोड़, वैश्विक दबाव के बीच मजबूत प्रदर्शन

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भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज: GDP 7.7%, GST संग्रह ₹1.95 लाख करोड़, वैश्विक दबाव के बीच मजबूत प्रदर्शन

सारांश

वैश्विक उठापटक के बीच भारत के आर्थिक आँकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं — 7.7% GDP वृद्धि, ₹1.95 लाख करोड़ का GST संग्रह, 37 महीने से विस्तार में विनिर्माण PMI और अप्रैल में रिकॉर्ड वाहन बिक्री। घरेलू माँग और सरकारी कैपेक्स मिलकर इस रफ्तार को थामे हुए हैं।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही; चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की दर से विस्तार।
HSBC मैन्युफैक्चरिंग PMI जून 2026 में 54.2 — लगातार 37वाँ महीना 50 से ऊपर।
जून 2026 में सकल GST संग्रह 13.9% बढ़कर ₹1.95 लाख करोड़ ; शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64% बढ़कर ₹5.21 लाख करोड़ ।
अप्रैल-मई 2026 में सरकारी कैपेक्स ₹2.51 लाख करोड़ — पिछले वर्ष से ₹29,650 करोड़ अधिक।
अप्रैल 2026 में 26.11 लाख वाहनों की रिकॉर्ड खुदरा बिक्री; ग्रामीण ऑटो बिक्री 7.8% बढ़ी।
मई में ई-वे बिल संख्या में 10.9% की सालाना वृद्धि, IIP मई 2026 में पाँच महीनों के उच्च 5.1% पर।

केंद्र सरकार द्वारा जारी ताज़ा आर्थिक आँकड़ों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद ठोस गति से आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की GDP वृद्धि दर के साथ भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। चौथी तिमाही में यह दर और तेज़ होकर 7.8 प्रतिशत तक पहुँची, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 7 प्रतिशत से अधिक है।

विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में लगातार विस्तार

HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI जून 2026 में 54.2 पर रहा — यह लगातार 37वाँ महीना है जब यह सूचकांक 50 अंक के विस्तार-संकुचन विभाजक से ऊपर बना हुआ है। सर्वेक्षण के अनुसार उत्पादन, नए ऑर्डर, रोज़गार और खरीद गतिविधियों में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है, जो घरेलू माँग और कारोबारी विश्वास की मज़बूती को दर्शाती है।

सेवा क्षेत्र में भी सकारात्मक रुझान बरकरार है। HSBC इंडिया सर्विसेज़ PMI बिज़नेस एक्टिविटी इंडेक्स अप्रैल के 58.8 से बढ़कर मई 2026 में 59.8 पर पहुँच गया — यह नवंबर 2025 के बाद सबसे तेज़ विस्तार है।

औद्योगिक उत्पादन और पूंजीगत व्यय में तेज़ी

इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) मई 2026 में 5.1 प्रतिशत पर पहुँचा, जो अप्रैल के 4.9 प्रतिशत से अधिक और पिछले पाँच महीनों का उच्चतम स्तर है। इसमें विनिर्माण क्षेत्र की 5.5 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति की 9.9 प्रतिशत वृद्धि का अहम योगदान रहा। मोटर वाहन और इलेक्ट्रिकल उपकरण जैसे क्षेत्रों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।

पूंजीगत वस्तुओं (कैपिटल गुड्स) के उत्पादन में 12.9 प्रतिशत की वृद्धि निवेश गतिविधियों में तेज़ी और औद्योगिक क्षमता विस्तार का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) भी रफ्तार पकड़ रहा है — अप्रैल-मई 2026 के दौरान कैपेक्स ₹2.51 लाख करोड़ रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह ₹2.21 लाख करोड़ था। यानी केवल दो महीनों में करीब ₹29,650 करोड़ की अतिरिक्त पूंजीगत निवेश हुई।

गौरतलब है कि यह निवेश मुख्य रूप से सड़क, रेलवे, दूरसंचार, रक्षा और अन्य बुनियादी ढाँचा क्षेत्रों में किया जा रहा है।

GST और प्रत्यक्ष कर संग्रह में उछाल

जून 2026 में सकल GST संग्रह 13.9 प्रतिशत बढ़कर लगभग ₹1.95 लाख करोड़ पर पहुँच गया, जबकि जून 2025 में यह ₹1.71 लाख करोड़ था। वहीं, 17 जून 2026 तक चालू वित्त वर्ष में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर ₹5.21 लाख करोड़ हो गया, जिसमें कॉर्पोरेट और गैर-कॉर्पोरेट दोनों श्रेणियों का योगदान उल्लेखनीय रहा।

पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बावजूद कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में नरमी ने सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 के राजकोषीय संतुलन (फिस्कल कंसोलिडेशन) के लक्ष्य पर बने रहने में मदद की है।

वाहन बिक्री और ग्रामीण माँग में रिकॉर्ड प्रदर्शन

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में माँग उल्लेखनीय रूप से मज़बूत बनी हुई है। अप्रैल 2026 में 26.11 लाख वाहनों की खुदरा बिक्री हुई — यह भारत के ऑटो रिटेल बाज़ार के इतिहास में किसी भी अप्रैल माह का सबसे बड़ा आँकड़ा है। मई में ग्रामीण क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल बिक्री 7.8 प्रतिशत बढ़ी, जो ऊँचे आधार के बावजूद ग्रामीण माँग की निरंतर मज़बूती को दर्शाती है।

व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियाँ भी सुदृढ़ हैं। मई में ई-वे बिल की संख्या में 10.9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो देशभर में वस्तुओं की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों में जीवंतता का प्रमाण है।

आगे की राह

आँकड़ों के अनुसार भारत की वृद्धि गाथा अभी थमती नहीं दिख रही। विनिर्माण, सेवा, कर संग्रह और ग्रामीण माँग — सभी मोर्चों पर एक साथ सकारात्मक संकेत मिलना असामान्य है। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताएँ और भू-राजनीतिक तनाव आगे चलकर निर्यात और निवेश प्रवाह पर असर डाल सकते हैं। सरकार के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह गति दूसरी और तीसरी तिमाही में भी बरकरार रह सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी पूरी तस्वीर देखना ज़रूरी है। 37 महीने से विस्तार में बना मैन्युफैक्चरिंग PMI और रिकॉर्ड वाहन बिक्री घरेलू माँग की वास्तविक मज़बूती दर्शाते हैं, परंतु यह वृद्धि काफी हद तक सरकारी कैपेक्स पर टिकी है — निजी निवेश की भागीदारी अभी भी उस स्तर पर नहीं पहुँची जो दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अपेक्षित है। GST और प्रत्यक्ष कर संग्रह में दोहरे अंकों की वृद्धि राजकोषीय स्वास्थ्य के लिए शुभ संकेत है, किंतु वैश्विक व्यापार अनिश्चितताएँ और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव निर्यात मोर्चे पर जोखिम बनाए हुए हैं। असली कसौटी यह है कि क्या निजी क्षेत्र सरकारी निवेश की छड़ी थामने को तैयार है — अभी तक यह प्रश्न अनुत्तरित है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP वृद्धि दर कितनी रही?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। चौथी तिमाही में यह दर 7.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 7 प्रतिशत से अधिक है।
जून 2026 में GST संग्रह कितना रहा?
जून 2026 में सकल GST संग्रह 13.9 प्रतिशत बढ़कर लगभग ₹1.95 लाख करोड़ पर पहुँचा, जबकि जून 2025 में यह ₹1.71 लाख करोड़ था। यह वृद्धि घरेलू उपभोग और व्यापारिक गतिविधियों में मज़बूती का संकेत है।
भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI कितने महीनों से विस्तार में है?
HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI जून 2026 में 54.2 पर रहा और यह लगातार 37वाँ महीना है जब यह सूचकांक 50 अंक के स्तर से ऊपर बना हुआ है। 50 से ऊपर का आँकड़ा विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार का संकेत माना जाता है।
अप्रैल 2026 में वाहन बिक्री का क्या रिकॉर्ड बना?
अप्रैल 2026 में 26.11 लाख वाहनों की खुदरा बिक्री हुई, जो भारत के ऑटो रिटेल बाज़ार के इतिहास में किसी भी अप्रैल माह का सबसे बड़ा आँकड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में मई में ऑटोमोबाइल बिक्री 7.8 प्रतिशत बढ़ी।
सरकार का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) इस वर्ष कितना बढ़ा?
अप्रैल-मई 2026 के दौरान केंद्र सरकार का कैपेक्स ₹2.51 लाख करोड़ रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह ₹2.21 लाख करोड़ था — यानी दो महीनों में करीब ₹29,650 करोड़ की अतिरिक्त पूंजीगत निवेश। यह निवेश मुख्य रूप से सड़क, रेलवे, दूरसंचार और रक्षा क्षेत्रों में किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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