भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज: GDP 7.7%, GST संग्रह ₹1.95 लाख करोड़, वैश्विक दबाव के बीच मजबूत प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार द्वारा जारी ताज़ा आर्थिक आँकड़ों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद ठोस गति से आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की GDP वृद्धि दर के साथ भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। चौथी तिमाही में यह दर और तेज़ होकर 7.8 प्रतिशत तक पहुँची, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 7 प्रतिशत से अधिक है।
विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में लगातार विस्तार
HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI जून 2026 में 54.2 पर रहा — यह लगातार 37वाँ महीना है जब यह सूचकांक 50 अंक के विस्तार-संकुचन विभाजक से ऊपर बना हुआ है। सर्वेक्षण के अनुसार उत्पादन, नए ऑर्डर, रोज़गार और खरीद गतिविधियों में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है, जो घरेलू माँग और कारोबारी विश्वास की मज़बूती को दर्शाती है।
सेवा क्षेत्र में भी सकारात्मक रुझान बरकरार है। HSBC इंडिया सर्विसेज़ PMI बिज़नेस एक्टिविटी इंडेक्स अप्रैल के 58.8 से बढ़कर मई 2026 में 59.8 पर पहुँच गया — यह नवंबर 2025 के बाद सबसे तेज़ विस्तार है।
औद्योगिक उत्पादन और पूंजीगत व्यय में तेज़ी
इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) मई 2026 में 5.1 प्रतिशत पर पहुँचा, जो अप्रैल के 4.9 प्रतिशत से अधिक और पिछले पाँच महीनों का उच्चतम स्तर है। इसमें विनिर्माण क्षेत्र की 5.5 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति की 9.9 प्रतिशत वृद्धि का अहम योगदान रहा। मोटर वाहन और इलेक्ट्रिकल उपकरण जैसे क्षेत्रों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
पूंजीगत वस्तुओं (कैपिटल गुड्स) के उत्पादन में 12.9 प्रतिशत की वृद्धि निवेश गतिविधियों में तेज़ी और औद्योगिक क्षमता विस्तार का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) भी रफ्तार पकड़ रहा है — अप्रैल-मई 2026 के दौरान कैपेक्स ₹2.51 लाख करोड़ रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह ₹2.21 लाख करोड़ था। यानी केवल दो महीनों में करीब ₹29,650 करोड़ की अतिरिक्त पूंजीगत निवेश हुई।
गौरतलब है कि यह निवेश मुख्य रूप से सड़क, रेलवे, दूरसंचार, रक्षा और अन्य बुनियादी ढाँचा क्षेत्रों में किया जा रहा है।
GST और प्रत्यक्ष कर संग्रह में उछाल
जून 2026 में सकल GST संग्रह 13.9 प्रतिशत बढ़कर लगभग ₹1.95 लाख करोड़ पर पहुँच गया, जबकि जून 2025 में यह ₹1.71 लाख करोड़ था। वहीं, 17 जून 2026 तक चालू वित्त वर्ष में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर ₹5.21 लाख करोड़ हो गया, जिसमें कॉर्पोरेट और गैर-कॉर्पोरेट दोनों श्रेणियों का योगदान उल्लेखनीय रहा।
पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बावजूद कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में नरमी ने सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 के राजकोषीय संतुलन (फिस्कल कंसोलिडेशन) के लक्ष्य पर बने रहने में मदद की है।
वाहन बिक्री और ग्रामीण माँग में रिकॉर्ड प्रदर्शन
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में माँग उल्लेखनीय रूप से मज़बूत बनी हुई है। अप्रैल 2026 में 26.11 लाख वाहनों की खुदरा बिक्री हुई — यह भारत के ऑटो रिटेल बाज़ार के इतिहास में किसी भी अप्रैल माह का सबसे बड़ा आँकड़ा है। मई में ग्रामीण क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल बिक्री 7.8 प्रतिशत बढ़ी, जो ऊँचे आधार के बावजूद ग्रामीण माँग की निरंतर मज़बूती को दर्शाती है।
व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियाँ भी सुदृढ़ हैं। मई में ई-वे बिल की संख्या में 10.9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो देशभर में वस्तुओं की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों में जीवंतता का प्रमाण है।
आगे की राह
आँकड़ों के अनुसार भारत की वृद्धि गाथा अभी थमती नहीं दिख रही। विनिर्माण, सेवा, कर संग्रह और ग्रामीण माँग — सभी मोर्चों पर एक साथ सकारात्मक संकेत मिलना असामान्य है। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताएँ और भू-राजनीतिक तनाव आगे चलकर निर्यात और निवेश प्रवाह पर असर डाल सकते हैं। सरकार के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह गति दूसरी और तीसरी तिमाही में भी बरकरार रह सकती है।