17 अगस्त 2026
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विकसित भारत 2047 के लिए बैंकिंग रोडमैप तय करेगी उच्च स्तरीय कमेटी: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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विकसित भारत 2047 के लिए बैंकिंग रोडमैप तय करेगी उच्च स्तरीय कमेटी: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

सारांश

वित्त मंत्री सीतारमण का यह ऐलान महज़ एक और समिति की घोषणा नहीं — यह बैंकिंग सेक्टर को 2047 के भारत की रीढ़ बनाने की रणनीतिक शुरुआत है। ग्रॉस एनपीए 14.6% से 1.93% पर आने के बाद सरकार अब इस मज़बूती को दीर्घकालिक विकास में बदलने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 17 अगस्त 2026 को ' विकसित भारत 2047 ' में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका तय करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी के शीघ्र गठन की घोषणा की।
यह प्रस्ताव पहली बार 2026-27 के केंद्रीय बजट में रखा गया था।
सार्वजनिक बैंकों का ग्रॉस एनपीए मार्च 2018 के 14.6% से घटकर मार्च 2026 में 1.93% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आया।
नेट एनपीए इसी अवधि में 8% से घटकर 2.39% हुआ।
29% भारतीय 15-29 आयु वर्ग में हैं; सीतारमण ने बैंकों से युवाओं के लिए एजुकेशन लोन , एंटरप्रेन्योरशिप फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स की पहुँच बढ़ाने को कहा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में घोषणा की कि सरकार शीघ्र ही एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करेगी, जो 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने में देश के बैंकिंग सेक्टर की भूमिका निर्धारित करेगी। यह घोषणा उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में की।

कमेटी का दायरा और उद्देश्य

सीतारमण ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, 'यह कमिटी विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकों की भूमिका पर विचार करेगी। 2047 का लक्ष्य बहुत दूर नहीं है — अभी 2026 चल रहा है, यानी हमारे पास 20 साल से भी कम समय बचा है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'एक बार जब समिति अपनी रिपोर्ट सौंप देगी, तो हम उसकी सिफारिशों पर तेज़ी से काम करेंगे।' गौरतलब है कि 2026-27 के केंद्रीय बजट में ही वित्त मंत्री ने इस उच्च स्तरीय कमिटी के गठन का प्रस्ताव रखा था, ताकि भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के साथ बैंकिंग सेक्टर के तालमेल की समीक्षा की जा सके।

एनपीए में ऐतिहासिक सुधार

वित्त मंत्री ने बैंकिंग सेक्टर की मज़बूत होती वित्तीय सेहत का उल्लेख करते हुए कहा कि नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) अपने सबसे निचले स्तर पर हैं, जो सुधारों को आगे बढ़ाने का सबसे उपयुक्त समय है। वित्तीय सेवा विभाग के संजय लोहिया ने आँकड़ों के साथ इसकी पुष्टि की — सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का ग्रॉस एनपीए मार्च 2018 के 14.6 प्रतिशत के उच्चतम स्तर से घटकर मार्च 2026 में 1.93 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इसी अवधि में नेट एनपीए 8 प्रतिशत से घटकर 2.39 प्रतिशत रह गया है।

सरकारी बैंकों को दिशा-निर्देश

सीतारमण ने सरकारी बैंकों से आग्रह किया कि वे अपनी मज़बूत बैलेंस शीट का उपयोग आर्थिक विकास के अगले चरण को गति देने और बैंकिंग सुधारों की तैयारी के लिए करें। उन्होंने बैंकिंग नेतृत्व से फाइनेंसिंग की नई ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 'व्यावहारिक और लागू करने योग्य विचार' प्रस्तुत करने को भी कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग लीडरशिप के सुझाव कमेटी के लिए अहम इनपुट साबित हो सकते हैं।

युवा आबादी पर विशेष ज़ोर

वित्त मंत्री ने बैंकों को देश की युवा आबादी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि 29 प्रतिशत भारतीय 15-29 आयु वर्ग में आते हैं और बैंकों को इस वर्ग के लिए एजुकेशन लोन, एंटरप्रेन्योरशिप फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स तक पहुँच बढ़ानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का अधिकतम उपयोग करने की दिशा में नीतियाँ बना रहा है।

आगे की राह

कमेटी की सिफारिशें आने के बाद बैंकिंग सेक्टर को 'भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने' के लिए तैयार रहने का आह्वान करते हुए सीतारमण ने संकेत दिया कि यह कमेटी केवल नीतिगत दस्तावेज़ तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसकी सिफारिशें सीधे क्रियान्वयन से जुड़ी होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए ज़रूरत समिति गठन की नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की जवाबदेही तय करने की है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित भारत 2047 के लिए बैंकिंग कमेटी क्या करेगी?
यह उच्च स्तरीय कमेटी यह तय करेगी कि 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने में भारत का बैंकिंग सेक्टर क्या भूमिका निभा सकता है। कमेटी की सिफारिशें आने के बाद सरकार उन पर तेज़ी से काम करेगी।
इस कमेटी का प्रस्ताव पहली बार कब आया था?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में इस उच्च स्तरीय कमिटी के गठन का प्रस्ताव रखा था। 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में सार्वजनिक बैंकों के सम्मेलन में उन्होंने इसके शीघ्र गठन की पुष्टि की।
भारतीय सार्वजनिक बैंकों का एनपीए अभी कितना है?
वित्तीय सेवा विभाग के संजय लोहिया के अनुसार, सार्वजनिक बैंकों का ग्रॉस एनपीए मार्च 2026 में 1.93 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, जो मार्च 2018 में 14.6 प्रतिशत था। नेट एनपीए भी 8 प्रतिशत से घटकर 2.39 प्रतिशत पर आ गया है।
सीतारमण ने युवाओं के लिए बैंकों से क्या माँगा?
वित्त मंत्री ने बैंकों से 15-29 आयु वर्ग की 29 प्रतिशत भारतीय आबादी के लिए एजुकेशन लोन, एंटरप्रेन्योरशिप फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स तक पहुँच बढ़ाने का आग्रह किया। उनका मानना है कि युवा आबादी पर ध्यान देना विकसित भारत के लक्ष्य के लिए अनिवार्य है।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य क्या है और बैंकिंग सेक्टर की भूमिका क्यों अहम है?
'विकसित भारत 2047' भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने पर देश को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने का सरकारी विजन है। बैंकिंग सेक्टर इस लक्ष्य में इसलिए केंद्रीय है क्योंकि अवसंरचना, उद्योग और आम नागरिकों तक वित्त की पहुँच इसी के माध्यम से होती है।
राष्ट्र प्रेस
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