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वित्त मंत्री सीतारमण ने वर्ल्ड बैंक के नीलकंठ मिश्रा, NPCI के दिलीप असबे और CPAI प्रतिनिधियों से की अलग-अलग बैठकें

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वित्त मंत्री सीतारमण ने वर्ल्ड बैंक के नीलकंठ मिश्रा, NPCI के दिलीप असबे और CPAI प्रतिनिधियों से की अलग-अलग बैठकें

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की एक ही दिन में तीन अहम बैठकें — विश्व बैंक, NPCI और CPAI के साथ — यह संकेत देती हैं कि सरकार विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और बाज़ार स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ सक्रिय है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 जून 2026 को विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा , NPCI के MD एवं CEO दिलीप असबे , और CPAI प्रतिनिधियों से अलग-अलग बैठकें कीं।
बैठकों की जानकारी वित्त मंत्री कार्यालय ने एक्स (X) पर साझा की।
RBI ने इस महीने की शुरुआत में विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों पर रिटर्न को कर-छूट के दायरे में लाने की घोषणा की थी।
सीतारमण ने कहा कि बॉन्ड मार्केट के लिए घोषित उपाय केवल शुरुआत हैं, आगे और कदम उठाए जाएंगे।
सरकार का लक्ष्य विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाकर रुपये में स्थिरता सुनिश्चित करना है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 जून 2026 को नई दिल्ली में तीन अलग-अलग महत्वपूर्ण बैठकें कीं — विश्व बैंक (World Bank) के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप असबे, और कमोडिटी एंड कैपिटल मार्केट पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CPAI) के प्रतिनिधियों से। इन बैठकों की जानकारी वित्त मंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई।

मुख्य घटनाक्रम

तीनों बैठकें सोमवार को अलग-अलग आयोजित की गईं। CPAI के प्रतिनिधियों से यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब भारतीय बाज़ारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत स्तर पर सक्रिय है।

विदेशी निवेश बढ़ाने की दिशा में ताज़ा कदम

इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) पर मिलने वाले रिटर्न को कर-छूट के दायरे में लाने की घोषणा की थी। इस कदम से एक ओर देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है, वहीं वैश्विक अस्थिरता के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में स्थिरता आने की भी संभावना जताई जा रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की योजना

जून के मध्य में एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि सरकार विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए आगे भी कई और कदम उठाएगी और बॉन्ड मार्केट के लिए घोषित उपाय महज़ शुरुआत हैं। उन्होंने कहा, 'हम मानते हैं कि देश में और अधिक विदेशी पूंजी आने की जरूरत है। लेकिन RBI द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बैंकों को विदेश से धन जुटाने की अनुमति देना इस कहानी का अंत नहीं है। हम आगे भी और कदम उठाएंगे।'

सीतारमण ने यह भी कहा कि सरकार RBI के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने पर काम कर रही है कि बाज़ारों को आवश्यक निवेश निरंतर मिलता रहे।

आम जनता और बाज़ार पर असर

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय शेयर बाज़ार और रुपये पर दबाव बना रहता है, जो आम निवेशकों की बचत और आयात लागत को प्रभावित करता है। सरकार के इन नीतिगत प्रयासों का उद्देश्य इस दबाव को कम करना और दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को स्थिर बनाना है।

क्या होगा आगे

विशेषज्ञों के अनुसार, वित्त मंत्री की इन बैठकों से आने वाले हफ्तों में विदेशी निवेश नीति से जुड़ी नई घोषणाओं के संकेत मिल सकते हैं। सरकार का ध्यान अब बॉन्ड मार्केट के साथ-साथ कमोडिटी और कैपिटल मार्केट में भी विदेशी भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

NPCI और CPAI — तीन अलग-अलग संस्थाओं से वित्त मंत्री की बैठकें महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं लगतीं; यह FII बिकवाली के दबाव में सरकार की बहु-आयामी रणनीति की झलक है। RBI की कर-छूट घोषणा के बाद अगला कदम क्या होगा, यह बाज़ार की असली जिज्ञासा है। गौरतलब है कि नीतिगत घोषणाओं और वास्तविक पूंजी प्रवाह के बीच का अंतर अक्सर अपेक्षाओं पर भारी पड़ता है — इसलिए क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता ही इन बैठकों की सफलता की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 जून को किन-किन से मुलाकात की?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 जून 2026 को विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा, NPCI के MD एवं CEO दिलीप असबे, और CPAI के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों की जानकारी वित्त मंत्री कार्यालय ने एक्स पर साझा की।
CPAI क्या है और इससे बैठक क्यों हुई?
CPAI यानी कमोडिटी एंड कैपिटल मार्केट पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, भारतीय कमोडिटी और पूंजी बाज़ार के प्रतिभागियों का प्रतिनिधि संगठन है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाज़ार में चिंता का विषय बनी हुई है और सरकार विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय है।
RBI ने विदेशी निवेशकों के लिए हाल में क्या घोषणा की?
RBI ने जून 2026 की शुरुआत में विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों पर रिटर्न से होने वाली कमाई को कर-छूट के दायरे में लाने की घोषणा की। इससे देश में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने और रुपये में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
वित्त मंत्री ने विदेशी निवेश को लेकर आगे क्या संकेत दिए?
सीतारमण ने कहा कि बॉन्ड मार्केट के लिए घोषित उपाय केवल शुरुआत हैं और सरकार आगे भी कई कदम उठाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि RBI के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बाज़ारों को निरंतर आवश्यक निवेश मिलता रहे।
इन बैठकों का आम निवेशकों पर क्या असर पड़ सकता है?
विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने से शेयर बाज़ार में स्थिरता आ सकती है और रुपये पर दबाव कम हो सकता है, जिसका सीधा असर आयात लागत और महंगाई पर पड़ता है। हालांकि, नीतिगत घोषणाओं का वास्तविक प्रभाव क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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