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विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए और कदम उठाएगी सरकार: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का ऐलान

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विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए और कदम उठाएगी सरकार: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का ऐलान

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हीरो माइंडमाइन समिट 2026 में साफ़ किया — बॉन्ड मार्केट के लिए RBI के हालिया उपाय अंत नहीं, बल्कि शुरुआत हैं। विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने, विदेशी मुद्रा भंडार मज़बूत रखने और GCC-डेटा सेंटर इकोसिस्टम को टियर-2 शहरों तक ले जाने की सरकार की रणनीति स्पष्ट है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 15 जून 2026 को हीरो माइंडमाइन समिट में कहा कि सरकार विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए आगे भी कदम उठाएगी।
RBI द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बैंकों को विदेश से धन जुटाने की अनुमति को सरकार ने 'शुरुआत' बताया, अंतिम कदम नहीं।
बॉन्ड मार्केट में विदेशी पूंजी की सुविधा अभी केवल सरकारी प्रतिभूतियों तक सीमित है; इसे और विस्तार देने का संकेत।
कच्चे तेल की कीमत, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बीमा लागत और उर्वरक आपूर्ति की अनिश्चितता को भारत के आयात बिल के लिए बड़ा जोखिम बताया।
GCC और डेटा सेंटर गतिविधियाँ अब तुमकुरु और मंगलुरु जैसे टियर-2 शहरों तक विस्तृत हो रही हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 15 जून 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार आगे भी ठोस कदम उठाएगी और हाल ही में बॉन्ड मार्केट के लिए घोषित उपाय महज एक शुरुआत हैं। हीरो माइंडमाइन समिट 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बैंकों को विदेश से धन जुटाने की अनुमति देना इस यात्रा का अंतिम पड़ाव नहीं है।

बॉन्ड मार्केट और विदेशी पूंजी की रणनीति

सीतारमण ने कहा, 'हम मानते हैं कि बॉन्ड मार्केट आने वाली विदेशी पूंजी को समाहित करने का एक अच्छा माध्यम बन सकता है। फिलहाल यह सुविधा केवल सरकारी प्रतिभूतियों के लिए दी गई है, लेकिन यह अंतिम कदम नहीं है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार RBI के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि बाज़ारों को निरंतर निवेश मिलता रहे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी प्रवाह अनिश्चित बना हुआ है।

वैश्विक अनिश्चितताओं का भारत पर असर

वित्त मंत्री ने माना कि भारत भी कई ऐसी वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है जो उसके नियंत्रण से परे हैं — जिनमें टैरिफ, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएँ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत का बड़ा घरेलू बाज़ार इन झटकों से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन देश अब भी कई महत्वपूर्ण कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पादों के आयात पर निर्भर है।

उन्होंने विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुज़रने वाले तेल जहाज़ों के लिए बढ़ती बीमा और जोखिम लागत का उल्लेख किया। सीतारमण ने कहा, 'सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही चुनौती नहीं है — स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुज़रने वाले जहाज़ों के लिए बीमा और जोखिम की लागत भी बढ़ गई है। ऐसे में भारत को बढ़ती बाहरी ज़रूरतों के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखना होगा।'

उर्वरक बाज़ार और आपूर्ति श्रृंखला

वित्त मंत्री ने उर्वरक बाज़ार की अस्थिरता का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट पेश होने के बाद से वैश्विक आपूर्ति की स्थिति कई बार बदली है। कुछ पारंपरिक आपूर्तिकर्ता देशों ने घरेलू भंडार बढ़ाने के लिए निर्यात कम कर दिया था, जिससे कमी की आशंका पैदा हुई थी। हालाँकि, लगभग एक वर्ष बाद चीन के दोबारा निर्यात बाज़ार में लौटने से कुछ राहत मिली है।

डेटा सेंटर और GCC इकोसिस्टम का विस्तार

सीतारमण ने भारत के डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकोसिस्टम की तेज़ रफ़्तार वृद्धि को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जो गतिविधियाँ पहले केवल बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-NCR तक सीमित थीं, वे अब तुमकुरु और मंगलुरु जैसे टियर-2 शहरों तक भी पहुँच रही हैं। इससे रोज़गार के नए अवसर, डेटा सुरक्षा में मज़बूती और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर डेटा सेंटर और GCC नीतियों को बेहतर तरीके से लागू करने पर काम कर रही है। राज्य सरकारें भी अब केवल नीतियाँ बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सक्रिय संवाद कर रही हैं। आने वाले महीनों में इस दिशा में और नीतिगत घोषणाओं की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'और कदम उठाएंगे' जैसे अस्पष्ट वादे बाज़ार को ठोस नीतिगत रोडमैप की जगह नहीं दे सकते। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) वित्त वर्ष 2024-25 में कई वर्षों के निचले स्तर पर रहा है, और बॉन्ड मार्केट तक पहुँच को सरकारी प्रतिभूतियों से आगे बढ़ाने की समयसीमा अभी भी अस्पष्ट है। GCC और डेटा सेंटर की टियर-2 विस्तार की कहानी उत्साहजनक है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या राज्य स्तर पर नीतिगत एकरूपता और बुनियादी ढाँचा इस महत्वाकांक्षा को ज़मीन पर उतार सकते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त मंत्री सीतारमण ने विदेशी निवेश पर क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 15 जून 2026 को हीरो माइंडमाइन समिट में कहा कि सरकार देश में अधिक विदेशी पूंजी लाने के लिए आगे भी कई कदम उठाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि RBI द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को विदेश से धन जुटाने की अनुमति देना अंतिम कदम नहीं है।
भारत के बॉन्ड मार्केट में विदेशी पूंजी की क्या स्थिति है?
फिलहाल बॉन्ड मार्केट में विदेशी पूंजी की सुविधा केवल सरकारी प्रतिभूतियों तक सीमित है। सीतारमण ने संकेत दिया कि इसे और व्यापक बनाया जाएगा, हालाँकि इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर कौन-से जोखिम हैं?
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुज़रने वाले जहाज़ों की बीमा लागत में वृद्धि और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएँ भारत के आयात बिल को प्रभावित कर रही हैं। सीतारमण ने कहा कि इन बाहरी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखना ज़रूरी है।
भारत में GCC और डेटा सेंटर का विस्तार कहाँ तक पहुँचा है?
GCC और डेटा सेंटर गतिविधियाँ अब बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-NCR से आगे बढ़कर तुमकुरु और मंगलुरु जैसे टियर-2 शहरों तक पहुँच रही हैं। सरकार राज्यों के साथ मिलकर इन नीतियों को बेहतर तरीके से लागू करने पर काम कर रही है।
उर्वरक आपूर्ति पर सरकार का क्या रुख है?
सीतारमण ने बताया कि बजट के बाद से वैश्विक उर्वरक आपूर्ति की स्थिति कई बार बदली है। कुछ देशों के निर्यात कम करने से कमी की आशंका थी, लेकिन चीन के दोबारा निर्यात बाज़ार में लौटने से स्थिति में कुछ सुधार आया है।
राष्ट्र प्रेस
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