28 अगस्त 2026
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भारत-कनाडा वित्तीय साझेदारी पर सीतारमण का बड़ा बयान, टोरंटो बिजनेस राउंडटेबल में रखा रोडमैप

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भारत-कनाडा वित्तीय साझेदारी पर सीतारमण का बड़ा बयान, टोरंटो बिजनेस राउंडटेबल में रखा रोडमैप

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टोरंटो में भारत-कनाडा बिजनेस राउंडटेबल में दोनों देशों की आर्थिक पूरकताओं को रेखांकित किया और गिफ्ट आईएफएससी में निवेश का आमंत्रण दिया। भारत का जीएनपीए अनुपात दो दशकों के निचले स्तर 2.31% पर — यह यात्रा कूटनीतिक तनाव के बाद संबंधों की नई शुरुआत का संकेत है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 28 अगस्त 2026 को टोरंटो में भारत-कनाडा बिजनेस राउंडटेबल को संबोधित किया।
कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का जीएनपीए अनुपात मार्च 2018 के 11.18% से घटकर मार्च 2025 में 2.31% — दो दशकों का न्यूनतम।
सीतारमण ने कनाडाई संस्थानों को गिफ्ट आईएफएससी में बैंकिंग, फंड प्रबंधन, पुनर्बीमा और सतत वित्त में निवेश का आमंत्रण दिया।
डिजिटल सहयोग पर जोर — यूपीआई , इंडिया स्टैक और सीमा-पार भुगतान प्रणाली को साझेदारी का आधार बताया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 28 अगस्त 2026 को टोरंटो में आयोजित उच्चस्तरीय भारत-कनाडा बिजनेस राउंडटेबल को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूद पूरकताएं एक मजबूत और दीर्घकालिक वित्तीय साझेदारी की नींव बन सकती हैं। इस अवसर पर कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन भी उपस्थित रहे।

राउंडटेबल में उठाए गए मुख्य बिंदु

सीतारमण ने कहा कि भारत अपनी विशाल बाजार क्षमता, तीव्र आर्थिक वृद्धि और विविध निवेश अवसरों के साथ एक आकर्षक गंतव्य है, जबकि कनाडा के पास दीर्घकालिक पूंजी, सुदृढ़ संस्थागत ढांचा और गहरी वित्तीय विशेषज्ञता है। उन्होंने कहा कि इन पूरकताओं को मिलाकर दोनों देश भविष्योन्मुखी आर्थिक संबंध स्थापित कर सकते हैं।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीतारमण ने कहा कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में हाल के वर्षों में नई गति आई है और अब इस सकारात्मक माहौल को वित्तीय क्षेत्र में गहरे सहयोग और ठोस निवेश साझेदारियों में बदलने की जरूरत है।

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती

सीतारमण ने पिछले एक दशक में हुए वित्तीय सुधारों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एसेट क्वालिटी रिव्यू, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 4आर रणनीति और ईएएसई सुधारों ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनाया है।

एक महत्वपूर्ण आंकड़े का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात मार्च 2018 के 11.18 प्रतिशत से घटकर मार्च 2025 में 2.31 प्रतिशत पर आ गया है — जो पिछले दो दशकों का सबसे निचला स्तर है।

डिजिटल वित्तीय सहयोग की संभावनाएं

सीतारमण ने कहा, "भारत और कनाडा अब यह तलाश रहे हैं कि डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से वित्तीय सहयोग को और कैसे मजबूत किया जा सकता है, जिसमें आसान भुगतान व्यवस्था, सीमा-पार धन हस्तांतरण और नागरिकों के लिए अधिक डिजिटल भुगतान विकल्प शामिल हैं।"

उन्होंने जैम, यूपीआई, अकाउंट एग्रीगेटर और इंडिया स्टैक जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्लेटफॉर्म का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेनदेन को नई दिशा दी है। साथ ही उन्होंने पूंजी बाजारों की गहराई, बीमा क्षेत्र के विस्तार और फिनटेक नवाचारों को भी भारत की ताकत के रूप में रेखांकित किया।

गिफ्ट आईएफएससी में कनाडाई निवेश का आमंत्रण

वित्त मंत्री ने कनाडाई वित्तीय संस्थानों को गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (गिफ्ट आईएफएससी) में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग, फंड प्रबंधन, पुनर्बीमा, सतत वित्त, वैश्विक क्षमता केंद्र तथा विमान एवं जहाज लीजिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-कनाडा संबंध पिछले कुछ वर्षों की कूटनीतिक तनातनी के बाद नई सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। सीतारमण की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

आगे की राह

राउंडटेबल में हुई चर्चाओं का केंद्र तीन प्रमुख विषय रहे — वैश्विक और घरेलू व्यापक आर्थिक विकास का आकलन, दोनों देशों की नीति प्राथमिकताएं और निवेश सहयोग को गहरा करने के उपाय। सीतारमण ने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक विकास, वित्तीय नवाचार और निवेश विस्तार का आधार बन सकती है। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच वित्तीय क्षेत्र में ठोस करारों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या कनाडाई संस्थागत निवेशक — जो पहले भारत के बुनियादी ढांचे में बड़े खिलाड़ी थे — वास्तव में गिफ्ट आईएफएससी में कदम रखेंगे। डिजिटल भुगतान और सीमा-पार धन हस्तांतरण पर जोर व्यावहारिक है, क्योंकि इससे सीधे भारतीय प्रवासी समुदाय को लाभ मिलता है — जो कनाडा में राजनीतिक रूप से भी प्रभावशाली है। बिना किसी बाध्यकारी समझौते के, यह बैठक संकेत तो देती है, लेकिन दिशा तय करने के लिए ठोस करारों की दरकार अभी भी बनी हुई है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्मला सीतारमण की टोरंटो यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 28 अगस्त 2026 को टोरंटो में भारत-कनाडा बिजनेस राउंडटेबल में भाग लिया, जहाँ दोनों देशों के बीच वित्तीय क्षेत्र में सहयोग और दीर्घकालिक निवेश साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई। कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन भी इस बैठक में शामिल रहे।
भारत का जीएनपीए अनुपात अभी कितना है और इसका क्या महत्व है?
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात मार्च 2025 में 2.31 प्रतिशत रह गया, जो मार्च 2018 के 11.18 प्रतिशत से काफी कम है और पिछले दो दशकों का सबसे निचला स्तर है। यह आंकड़ा भारतीय बैंकिंग प्रणाली की बेहतर सेहत का संकेत है, जिसे सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों के सामने विश्वास-निर्माण के तर्क के रूप में पेश किया।
गिफ्ट आईएफएससी में कनाडाई संस्थानों के लिए कौन-से अवसर हैं?
वित्त मंत्री ने कनाडाई वित्तीय संस्थानों को गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (गिफ्ट आईएफएससी) में बैंकिंग, फंड प्रबंधन, पुनर्बीमा, सतत वित्त, वैश्विक क्षमता केंद्र तथा विमान एवं जहाज लीजिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश का आमंत्रण दिया। गिफ्ट आईएफएससी भारत का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र है, जो गुजरात में स्थित है।
भारत-कनाडा डिजिटल वित्तीय सहयोग में क्या शामिल है?
सीतारमण ने कहा कि दोनों देश डिजिटल प्रौद्योगिकियों के जरिए आसान भुगतान व्यवस्था, सीमा-पार धन हस्तांतरण और नागरिकों के लिए अधिक डिजिटल भुगतान विकल्पों पर काम कर रहे हैं। यूपीआई, इंडिया स्टैक और अकाउंट एग्रीगेटर जैसे प्लेटफॉर्म इस सहयोग की रीढ़ बन सकते हैं।
भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों की मौजूदा स्थिति क्या है?
दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में हाल के वर्षों में कूटनीतिक तनाव के बावजूद नई गति देखी गई है। सीतारमण ने कहा कि अब इस सकारात्मक माहौल को वित्तीय क्षेत्र में गहरे सहयोग और निवेश साझेदारियों में बदलने की जरूरत है, जो दोनों देशों के दीर्घकालिक आर्थिक हितों के अनुकूल होगा।
राष्ट्र प्रेस
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