भारत-कनाडा वित्तीय साझेदारी पर सीतारमण का बड़ा बयान, टोरंटो बिजनेस राउंडटेबल में रखा रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 28 अगस्त 2026 को टोरंटो में आयोजित उच्चस्तरीय भारत-कनाडा बिजनेस राउंडटेबल को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूद पूरकताएं एक मजबूत और दीर्घकालिक वित्तीय साझेदारी की नींव बन सकती हैं। इस अवसर पर कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन भी उपस्थित रहे।
राउंडटेबल में उठाए गए मुख्य बिंदु
सीतारमण ने कहा कि भारत अपनी विशाल बाजार क्षमता, तीव्र आर्थिक वृद्धि और विविध निवेश अवसरों के साथ एक आकर्षक गंतव्य है, जबकि कनाडा के पास दीर्घकालिक पूंजी, सुदृढ़ संस्थागत ढांचा और गहरी वित्तीय विशेषज्ञता है। उन्होंने कहा कि इन पूरकताओं को मिलाकर दोनों देश भविष्योन्मुखी आर्थिक संबंध स्थापित कर सकते हैं।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीतारमण ने कहा कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में हाल के वर्षों में नई गति आई है और अब इस सकारात्मक माहौल को वित्तीय क्षेत्र में गहरे सहयोग और ठोस निवेश साझेदारियों में बदलने की जरूरत है।
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती
सीतारमण ने पिछले एक दशक में हुए वित्तीय सुधारों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एसेट क्वालिटी रिव्यू, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 4आर रणनीति और ईएएसई सुधारों ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनाया है।
एक महत्वपूर्ण आंकड़े का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात मार्च 2018 के 11.18 प्रतिशत से घटकर मार्च 2025 में 2.31 प्रतिशत पर आ गया है — जो पिछले दो दशकों का सबसे निचला स्तर है।
डिजिटल वित्तीय सहयोग की संभावनाएं
सीतारमण ने कहा, "भारत और कनाडा अब यह तलाश रहे हैं कि डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से वित्तीय सहयोग को और कैसे मजबूत किया जा सकता है, जिसमें आसान भुगतान व्यवस्था, सीमा-पार धन हस्तांतरण और नागरिकों के लिए अधिक डिजिटल भुगतान विकल्प शामिल हैं।"
उन्होंने जैम, यूपीआई, अकाउंट एग्रीगेटर और इंडिया स्टैक जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्लेटफॉर्म का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेनदेन को नई दिशा दी है। साथ ही उन्होंने पूंजी बाजारों की गहराई, बीमा क्षेत्र के विस्तार और फिनटेक नवाचारों को भी भारत की ताकत के रूप में रेखांकित किया।
गिफ्ट आईएफएससी में कनाडाई निवेश का आमंत्रण
वित्त मंत्री ने कनाडाई वित्तीय संस्थानों को गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (गिफ्ट आईएफएससी) में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग, फंड प्रबंधन, पुनर्बीमा, सतत वित्त, वैश्विक क्षमता केंद्र तथा विमान एवं जहाज लीजिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-कनाडा संबंध पिछले कुछ वर्षों की कूटनीतिक तनातनी के बाद नई सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। सीतारमण की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
आगे की राह
राउंडटेबल में हुई चर्चाओं का केंद्र तीन प्रमुख विषय रहे — वैश्विक और घरेलू व्यापक आर्थिक विकास का आकलन, दोनों देशों की नीति प्राथमिकताएं और निवेश सहयोग को गहरा करने के उपाय। सीतारमण ने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक विकास, वित्तीय नवाचार और निवेश विस्तार का आधार बन सकती है। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच वित्तीय क्षेत्र में ठोस करारों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।