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ऋषभ पंत के शॉट सिलेक्शन पर अश्विन का कड़ा संदेश: '50 टेस्ट बाद जिम्मेदारी लो, खास ट्रीटमेंट बंद करो'

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ऋषभ पंत के शॉट सिलेक्शन पर अश्विन का कड़ा संदेश: '50 टेस्ट बाद जिम्मेदारी लो, खास ट्रीटमेंट बंद करो'

सारांश

अश्विन का पंत को सीधा संदेश — प्रतिभा पर नहीं, जिम्मेदारी पर सवाल है। 50 टेस्ट खेल चुके पंत अगर परिस्थिति के हिसाब से खेलना सीख लें, तो वे तीनों फॉर्मेट के खिलाड़ी बन सकते हैं। 'पीढ़ी में एक बार' का तर्क अब काफी नहीं।

मुख्य बातें

रविचंद्रन अश्विन ने 28 अगस्त को अपने यूट्यूब चैनल 'ऐश की बात' पर ऋषभ पंत के शॉट सिलेक्शन की कड़ी आलोचना की।
श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में पंत ने 168 रन बनाए, लेकिन बार-बार गैर-जरूरी जोखिम उठाकर आउट हुए।
अश्विन ने कहा कि सिडनी और ब्रिस्बेन की जीत में वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर का योगदान भी उतना ही अहम था।
अश्विन ने 'पीढ़ी में एक बार' वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा — यही छूट यशस्वी जायसवाल को भी मिलनी चाहिए।
अश्विन के अनुसार पंत के निर्णय लेने के तरीके के कारण ही वे अभी तीनों फॉर्मेट में नहीं खेल रहे।

पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत के शॉट सिलेक्शन पर तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि 50 टेस्ट मैच खेल चुके पंत को अब मैच की परिस्थितियों के अनुसार खेलने की जिम्मेदारी उठानी होगी। 28 अगस्त को अपने यूट्यूब चैनल 'ऐश की बात' पर दिए एक विस्तृत विश्लेषण में अश्विन ने स्पष्ट किया कि पंत की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन उच्च-दबाव के क्षणों में उनके निर्णय टीम को नुकसान पहुँचाते हैं।

श्रीलंका सीरीज में पंत का प्रदर्शन

श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में ऋषभ पंत ने कुल 168 रन बनाए। हालाँकि, अश्विन के अनुसार पंत बार-बार तेज़ रन बनाने की जल्दबाजी में गैर-जरूरी जोखिम उठाकर पवेलियन लौटे। अश्विन ने कहा, 'ऋषभ पंत से मेरी उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। मुझे बहुत अफसोस है। सोनल दिनुशा का स्ट्राइक रेट बहुत अच्छा था। हालाँकि, फर्क हाई-रिस्क विकल्प का है। जब गेम आपके हाथ में होता है, तो ये सब बातें होती हैं — 'ऋषभ ऐसे ही खेलते हैं।' यह इस बारे में है कि आपकी टीम को क्या चाहिए।'

सिडनी और ब्रिस्बेन का संदर्भ

अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया दौरे की यादगार पारियों का हवाला देते हुए कहा कि वे जीत सामूहिक प्रयास का नतीजा थीं। उनके शब्दों में, 'सिडनी और ब्रिस्बेन में ऋषभ ने शानदार पारी खेली, लेकिन वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर के बिना आप वह मैच नहीं जीत सकते थे। टेस्ट मैच खेलने और उसे खेल के आखिरी सेशन में जीतने के लिए 11 क्रिकेटरों की जरूरत होती है, लेकिन टेस्ट मैच हारने के लिए बस एक पल की बेवकूफी ही काफी है।' यह टिप्पणी उस व्यापक बहस की ओर इशारा करती है जिसमें पंत की व्यक्तिगत शैली को टीम हित से ऊपर रखने पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

अश्विन की मुख्य आपत्ति: 'खास ट्रीटमेंट बंद करो'

अश्विन ने 'पीढ़ी में एक बार' वाले तर्क को सीधे खारिज किया। उन्होंने कहा, 'किसी एक खिलाड़ी को खास ट्रीटमेंट न दें। अगर आप 'पीढ़ी में एक बार' आने वाले खिलाड़ी को सपोर्ट कर रहे हैं, तो यह सपोर्ट सभी को दें। जायसवाल भी ऐसे ही खिलाड़ी हैं।' उन्होंने वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे आक्रामक बल्लेबाजों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी प्रतिकूल परिस्थितियों में अनावश्यक जोखिम नहीं उठाते थे। अश्विन ने कहा, 'मेरे सामने ऐसी मार्केटिंग वाली बातें दोबारा कभी मत कीजिएगा।'

तीनों फॉर्मेट पर बड़ी बात

अश्विन ने संकेत दिया कि पंत के निर्णय लेने का तरीका ही वह कारण है जिससे वे अभी तीनों फॉर्मेट में नहीं खेल रहे। उन्होंने कहा, 'उनके फैसले लेने के तरीके की वजह से ही वह बाकी दो फॉर्मेट नहीं खेल रहे हैं। जिस दिन आप उन्हें सच बताएंगे, वह भारत के लिए तीनों फॉर्मेट के खिलाड़ी बन जाएंगे।' यह टिप्पणी इस मायने में महत्वपूर्ण है क्योंकि अश्विन खुद पंत के साथ लंबे समय तक भारतीय ड्रेसिंग रूम में रहे हैं और उनकी क्षमता के गवाह रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 50 टेस्ट के बाद भी यदि शॉट सिलेक्शन की समस्या बनी हुई है, तो यह प्रबंधन और चयन समिति के लिए भी उतना ही असुविधाजनक सवाल है। अश्विन का 'तीनों फॉर्मेट' वाला बिंदु सबसे तीखा है — यह सुझाव देता है कि पंत की सीमाएँ तकनीकी नहीं, बल्कि मानसिक और रणनीतिक हैं, जिन्हें ठीक किया जा सकता है, बशर्ते सच्ची प्रतिक्रिया दी जाए।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अश्विन ने ऋषभ पंत की आलोचना क्यों की?
अश्विन ने पंत के शॉट सिलेक्शन पर आपत्ति जताई, खासकर तब जब मैच दांव पर हो और अनावश्यक जोखिम उठाया जाए। उनका कहना है कि 50 टेस्ट खेल चुके पंत को परिस्थितियों के अनुसार खेलने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
श्रीलंका सीरीज में ऋषभ पंत ने कितने रन बनाए?
श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में ऋषभ पंत ने कुल 168 रन बनाए। हालाँकि, अश्विन के अनुसार वे बार-बार जल्दबाजी में आउट हुए।
अश्विन ने 'खास ट्रीटमेंट' से क्या मतलब निकाला?
अश्विन ने कहा कि पंत को 'पीढ़ी में एक बार' आने वाला खिलाड़ी कहकर उनकी गलतियों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ी भी उतने ही प्रतिभाशाली हैं और सभी के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए।
अश्विन ने सिडनी और ब्रिस्बेन का जिक्र क्यों किया?
अश्विन ने यह बताने के लिए कि पंत की उन पारियों की सफलता में वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर का भी बराबर योगदान था। उनका कहना था कि टेस्ट मैच जीतने के लिए 11 खिलाड़ी चाहिए, लेकिन एक पल की गलती से हार हो सकती है।
क्या पंत तीनों फॉर्मेट में वापसी कर सकते हैं?
अश्विन के अनुसार, पंत में तीनों फॉर्मेट खेलने की क्षमता है, लेकिन उनके निर्णय लेने के तरीके में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिस दिन पंत को सच्ची प्रतिक्रिया मिलेगी, वे भारत के लिए तीनों फॉर्मेट के खिलाड़ी बन सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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